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Ganesh Visarjan: गणेश विसर्जन के समय क्यों बोला जाते हैं ‘गणपति बप्पा मोरया’? जानें इसके पीछे की मान्यता

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Ganesh Visarjan: गणेश विसर्जन भगवान गणेश को विदाई देने का अवसर होता है। भक्त बप्पा की पूजा-अर्चना करने के बाद उनकी प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते हैं। 

Ganesh Visarjan
Ganesh Visarjan: गणेश उत्सव के दौरान जब बप्पा की विदाई का समय आता है, तो पूरा माहौल ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों से गूंज उठता है। भक्त ढोल-नगाड़ों के साथ गणपति की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते हैं और इस जयघोष के साथ उनसे अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान गणेश के नाम के साथ ‘मोरया’ ही क्यों बोला जाता है? इसके पीछे किस भक्त की कथा जुड़ी है? आइए जानते हैं।

क्या है ‘गणपति बप्पा मोरया’ का अर्थ?

‘गणपति बप्पा मोरया’ में ‘गणपति’ भगवान गणेश का नाम है, जबकि ‘बप्पा’ का अर्थ पिता या प्रिय संबोधन के रूप में लिया जाता है। भक्त प्रेम और श्रद्धा से गणेश जी को बप्पा कहकर पुकारते हैं। वहीं ‘मोरया’ शब्द को लेकर प्रमुख मान्यता संत मोरया गोसावी से जुड़ी हुई है। उन्हें भगवान गणेश का परम भक्त माना जाता है। इसी वजह से गणपति के जयघोष में उनके नाम का उल्लेख होने की परंपरा प्रचलित हुई। 

मोरया गोसावी कौन थे?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोरया गोसावी भगवान गणेश के अनन्य भक्त थे। उनका संबंध महाराष्ट्र के मोरगांव और चिंचवड़ की गणेश भक्ति परंपरा से बताया जाता है। कहा जाता है कि उनका पूरा जीवन गणपति की उपासना में समर्पित था। मोरया गोसावी से जुड़ी परंपराओं के अनुसार, वे गणेश जी के दर्शन के लिए नियमित रूप से मोरगांव जाते थे। उनकी भक्ति और साधना की वजह से उनका नाम गणपति भक्ति के साथ गहराई से जुड़ गया।

 

Ganesh Visarjan

गणपति के नाम के साथ क्यों जुड़ा ‘मोरया’?

मान्यता है कि मोरया गोसावी की भगवान गणेश के प्रति गहरी आस्था थी। उनकी भक्ति के कारण गणपति और उनके भक्त का नाम एक साथ लिया जाने लगा। इसी परंपरा से ‘गणपति बप्पा मोरया’ का जयघोष लोकप्रिय हुआ। कुछ परंपराओं में यह भी माना जाता है कि ‘मोरया’ शब्द मोरगांव के प्रसिद्ध मयूरेश्वर गणपति से जुड़ा हुआ है, इसलिए ‘मोरया’ की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं मिलती हैं, हालांकि सबसे प्रचलित मान्यता मोरया गोसावी से ही संबंधित है। 

विसर्जन के समय ही क्यों गूंजता है जयघोष?

गणेश विसर्जन भगवान गणेश को विदाई देने का अवसर होता है। भक्त बप्पा की पूजा-अर्चना करने के बाद उनकी प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते हैं। इस दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया’ के साथ ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ भी कहा जाता है। इस जयघोष में भक्त की भावना साफ दिखाई देती है। भक्त बप्पा से विदा लेते हुए यह कामना करते हैं कि भगवान गणेश अगले वर्ष फिर उनके घर और पंडाल में आएं। इसलिए विसर्जन के समय यह जयकारा भावनात्मक रूप से और भी खास हो जाता है।

 

Ganesh Visarjan

‘मंगलमूर्ति मोरया’ क्यों कहते हैं?

गणपति विसर्जन के दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया’ का जयघोष भी सुनाई देता है। यहां ‘मंगलमूर्ति’ भगवान गणेश के शुभ और मंगलकारी स्वरूप को संबोधित करता है। भक्त मानते हैं कि गणेश जी विघ्नों को दूर करने वाले और शुभ कार्यों के आरंभ में पूजे जाने वाले देवता हैं। इसलिए उनकी विदाई के समय भी भक्त उनके मंगलकारी स्वरूप का स्मरण करते हुए जयघोष करते हैं।

‘अगले बरस तू जल्दी आ’ का भाव

गणेश विसर्जन के समय बोला जाने वाला ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ केवल एक जयकारा नहीं, बल्कि बप्पा के प्रति भक्तों की भावनाओं को व्यक्त करने वाला वाक्य है। गणेश उत्सव के दिनों में भक्त घर और पंडाल में बप्पा की पूजा करते हैं, उन्हें भोग लगाते हैं और आरती करते हैं। विसर्जन के समय जब बप्पा की विदाई होती है, तो भक्त उन्हें अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण देते हैं। इसी भावना के साथ ‘गणपति बप्पा मोरया’ का जयघोष किया जाता है।

भक्त और भगवान के संबंध की झलक

‘गणपति बप्पा मोरया’ की परंपरा में भगवान और भक्त के संबंध की एक खास झलक दिखाई देती है। मोरया गोसावी की गणेश भक्ति से जुड़ी मान्यता ने उनके नाम को गणपति के जयघोष का हिस्सा बना दिया। यही वजह है कि आज भी गणेश उत्सव और खासकर विसर्जन के दौरान यह जयकारा श्रद्धा और उत्साह के साथ लगाया जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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