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Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी पर दीपदान करने का सही तरीका क्या है? जानें जरूरी नियम

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी पर दीपदान के लिए प्रदोष काल और संध्याकाल का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन सूर्यास्त के बाद घर के बाहर दीपक जलाने की परंपरा है। यम दीपदान के लिए शाम का समय शुभ माना जाता है।

Narak Chaturdashi
Narak Chaturdashi: दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घर में दीपक जलाने के साथ ही यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर विधि-विधान से दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है। हालांकि, दीपदान करते समय कुछ खास नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। क्या आपको पता है कि नरक चतुर्दशी पर दीपदान किस समय और किस दिशा में करना चाहिए? दीपक में कौन-सा तेल डालना शुभ माना जाता है? आइए जानते हैं दीपदान की सही विधि और जरूरी नियम...

नरक चतुर्दशी पर दीपदान का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन यमराज के निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय कम होता है। इसे यम दीपदान भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर यमराज से परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है, इसलिए इस दिशा में दीपदान करना विशेष फलदायी माना जाता है।

कब करना चाहिए दीपदान?

नरक चतुर्दशी पर दीपदान के लिए प्रदोष काल और संध्याकाल का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन सूर्यास्त के बाद घर के बाहर दीपक जलाने की परंपरा है। यम दीपदान के लिए शाम का समय शुभ माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार दीपदान की विधि और समय में अंतर हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र की धार्मिक परंपरा और पंचांग के अनुसार समय का ध्यान रखना चाहिए।

दीपदान की सही विधि

नरक चतुर्दशी के दिन सबसे पहले घर की साफ-सफाई करें। इसके बाद शाम के समय स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। अब मिट्टी का एक दीपक लें और उसमें सरसों का तेल डालें। दीपक में रूई की बत्ती लगाकर उसे जलाएं। इसके बाद घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखें। दीपक जलाते समय मन में यमराज का स्मरण करें और परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य तथा लंबी आयु की प्रार्थना करें।

आटे के दीपक का भी है महत्व

नरक चतुर्दशी पर मिट्टी के दीपक के साथ आटे का दीपक बनाने की भी परंपरा है। कई परिवारों में आटे से चौमुखी दीपक बनाकर उसमें तेल डालकर जलाया जाता है। इसे यमराज के निमित्त अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि आटे का दीपक जलाकर दीपदान करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। हालांकि, इस परंपरा का पालन परिवार की मान्यताओं के अनुसार किया जाता है।

दीपदान करते समय रखें ये जरूरी नियम

नरक चतुर्दशी पर दीपदान करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। दीपक साफ और साबुत मिट्टी का होना चाहिए। दीपक में सरसों का तेल डालना शुभ माना जाता है। दीपक जलाते समय मन में किसी के प्रति नकारात्मक भावना नहीं रखनी चाहिए। यम दीपक को दक्षिण दिशा में रखना चाहिए और दीपदान के दौरान यमराज का स्मरण करना चाहिए। दीपक को ऐसी सुरक्षित जगह पर रखें, जहां हवा से वह तुरंत बुझ न जाए और आग लगने का खतरा भी न हो।

कितने दीपक जलाना शुभ माना जाता है?

नरक चतुर्दशी पर दीपदान के लिए दीपकों की कोई एक निश्चित संख्या सभी परंपराओं में अनिवार्य नहीं मानी गई है। कुछ परिवारों में यमराज के निमित्त एक दीपक जलाया जाता है, जबकि कई जगहों पर घर के बाहर और आसपास कई दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता में दीपकों की संख्या से अधिक श्रद्धा और विधि का महत्व बताया गया है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार दीपदान कर सकते हैं।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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