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Diwali: दिवाली पर घर में चावल से मां लक्ष्मी के चरण बनाने की परंपरा क्यों है? जानिए धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Diwali 2026: दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण बनाने के लिए चावल का इस्तेमाल करने के पीछे भी धार्मिक महत्व बताया जाता है। हिंदू पूजा-पद्धति में चावल यानी अक्षत को शुभता, पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।

Diwali
Diwali Puja: दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी के स्वागत और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई और सजावट करने के साथ ही माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए कई तरह की धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं। इन्हीं में से एक परंपरा घर के मुख्य द्वार से लेकर पूजा स्थल तक चावल या चावल के घोल से मां लक्ष्मी के छोटे-छोटे चरण बनाने की भी है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली पर चावल से ही मां लक्ष्मी के चरण क्यों बनाए जाते हैं और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है? आइए जानते हैं इसका महत्व।

मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक हैं चरण

हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है। दिवाली की रात विशेष रूप से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, प्रकाश से भरे घरों में प्रवेश करती हैं। इसी वजह से लोग अपने घर के मुख्य द्वार पर माता के चरण बनाते हैं। इन्हें मां लक्ष्मी के घर में प्रवेश करने का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि चरण बनाने से भक्त माता को अपने घर आने का निमंत्रण देते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

चावल से ही क्यों बनाए जाते हैं चरण?

दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण बनाने के लिए चावल का इस्तेमाल करने के पीछे भी धार्मिक महत्व बताया जाता है। हिंदू पूजा-पद्धति में चावल यानी अक्षत को शुभता, पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। पूजा में अक्षत का इस्तेमाल देवी-देवताओं को अर्पित करने के लिए किया जाता है। चावल को अन्न और खुशहाली से भी जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में चावल से मां लक्ष्मी के चरण बनाना घर में अन्न-धन की बरकत और समृद्धि की कामना का प्रतीक माना जाता है। कई घरों में चावल को पीसकर उसका घोल तैयार किया जाता है और इसी से माता के पैरों के निशान बनाए जाते हैं।

किस दिशा में बनाएं मां लक्ष्मी के चरण?

परंपरा के अनुसार, मां लक्ष्मी के चरण मुख्य द्वार से घर के अंदर की ओर बनाए जाते हैं। इन्हें इस तरह बनाया जाता है कि माता के पैर घर में प्रवेश करते हुए दिखाई दें। इसके पीछे मान्यता है कि मां लक्ष्मी घर के भीतर पधार रही हैं। कुछ लोग मुख्य द्वार से पूजा घर तक चरण बनाते हैं, जबकि कुछ परिवार इन्हें घर के प्रवेश द्वार के आसपास ही बनाना शुभ मानते हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इस परंपरा को निभाने का तरीका अलग हो सकता है।

दिवाली की पूजा में चरणों का महत्व

दिवाली की लक्ष्मी पूजा के दौरान मां लक्ष्मी के चरणों को विशेष शुभ माना जाता है। कई घरों में पूजा स्थल के पास भी चावल या रोली से माता के चरण बनाए जाते हैं। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मकता आती है और माता की कृपा बनी रहती है। भक्त इन चरणों के माध्यम से मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं कि उनके घर में कभी धन-धान्य की कमी न हो और परिवार के सभी सदस्यों को सुख-शांति प्राप्त हो। इस परंपरा में केवल धन की कामना ही नहीं, बल्कि घर में खुशहाली और अन्न की बरकत की भावना भी जुड़ी होती है।

चरण बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान

मां लक्ष्मी के चरण बनाते समय घर के मुख्य द्वार और आसपास की जगह को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। इसके बाद चावल को पीसकर उसका घोल तैयार किया जा सकता है। कुछ लोग चावल के घोल में हल्दी या कुमकुम मिलाकर भी चरण बनाते हैं। चरणों को घर के बाहर से अंदर की ओर बनाना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। इस दौरान मन में मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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