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Diwali 2026: दिवाली की रात घर में कपूर जलाने की परंपरा क्यों है खास? जानिए धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Diwali 2026: दिवाली की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। पूजा के दौरान दीपक, धूप, फूल, नैवेद्य और कपूर अर्पित करने की परंपरा है। 

Diwali
Diwali 2026: दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ-साथ दीपक, धूप और कपूर की सुगंध से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन घरों में विशेष साफ-सफाई की जाती है और शाम को विधि-विधान से पूजा करने के बाद आरती की जाती है। आरती के दौरान कपूर जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कपूर जलाना केवल पूजा का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि इसे घर में सकारात्मकता और पवित्रता बनाए रखने का प्रतीक भी माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली की रात कपूर जलाने को इतना खास क्यों माना जाता है और इसका मां लक्ष्मी की पूजा से क्या संबंध है? आइए जानते हैं इसके धार्मिक महत्व के बारे में।

कपूर जलाने की परंपरा

हिंदू धर्म में कपूर को पूजा-पाठ की महत्वपूर्ण सामग्री माना गया है। मंदिरों से लेकर घरों तक देवी-देवताओं की आरती कपूर से करने की परंपरा है। दिवाली के दिन भी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के बाद कपूर जलाकर आरती की जाती है। मान्यता है कि कपूर की सुगंध से वातावरण पवित्र होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही वजह है कि दिवाली की रात कपूर जलाने को शुभ माना जाता है।

मां लक्ष्मी की पूजा में महत्व

दिवाली की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। पूजा के दौरान दीपक, धूप, फूल, नैवेद्य और कपूर अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कपूर जलाकर आरती करने से देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा और समर्पण प्रकट होता है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का वातावरण बना रहता है। यही कारण है कि लक्ष्मी पूजन के बाद कपूर से आरती करना कई परिवारों की पूजा परंपरा का अहम हिस्सा है।

कपूर को माना जाता है पवित्रता का प्रतीक

धार्मिक दृष्टि से कपूर को शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। कपूर जलने पर पूरी तरह अग्नि में समा जाता है और सामान्यतः उसके जलने के बाद कोई अवशेष नहीं बचता। इसे आध्यात्मिक रूप से मनुष्य के अहंकार और नकारात्मक विचारों को त्यागने का प्रतीक माना जाता है। जिस तरह कपूर स्वयं जलकर वातावरण में सुगंध फैलाता है, उसी तरह मनुष्य को भी अपने भीतर के अहंकार को त्यागकर दूसरों के जीवन में अच्छाई और सकारात्मकता फैलानी चाहिए। दिवाली की रात कपूर जलाने के पीछे यह आध्यात्मिक संदेश भी जुड़ा हुआ है।

नकारात्मकता दूर करने की मान्यता

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कपूर जलाने से घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मकता दूर होती है। दिवाली पर विशेष रूप से घर के मंदिर और पूजा स्थल में कपूर जलाने की परंपरा है। माना जाता है कि इसकी सुगंध से घर में पवित्रता का भाव आता है। कई परिवार पूजा के बाद कपूर जलाकर पूरे घर में आरती करते हैं। हालांकि, ये धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं हैं।

कपूर जलाते समय रखें ध्यान

दिवाली की रात कपूर जलाते समय कुछ सावधानियां रखना भी जरूरी है। कपूर को हमेशा सुरक्षित आरती पात्र या धातु की थाली में ही जलाना चाहिए। इसे पर्दों, कपड़ों और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। कपूर जलाने के बाद बच्चों को आग के पास न जाने दें। साथ ही, घर में पर्याप्त हवा आने-जाने की व्यवस्था रखें। कपूर को जलाने के लिए सुरक्षित स्थान का चुनाव करना चाहिए।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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