facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  festivals›  diwali 2026 par ghar mein kaise kare bhagwan ganesh aur maa lakshmi ki sthapana janiye vidhi aur niyam

Diwali 2026: दिवाली पर घर में कैसे करें भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की स्थापना? जानें संपूर्ण विधि और नियम

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Diwali Puja: दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की स्थापना करते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। पूजा के लिए हमेशा साफ और सुंदर प्रतिमाओं का चयन करें। खंडित या टूटी हुई मूर्तियों की स्थापना करने से बचना चाहिए। 

Diwali Puja
Diwali Puja: दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन घरों में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ मां लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सकारात्मकता आती है और परिवार पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। हालांकि, कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि दिवाली पर गणेश जी और मां लक्ष्मी की मूर्ति किस दिशा में रखनी चाहिए, दोनों की स्थापना किस तरह करनी चाहिए और पूजा के दौरान किन नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। क्या आपको पता है कि लक्ष्मी-गणेश की स्थापना के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है? आइए जानते हैं इसकी संपूर्ण विधि।

किस दिशा में करें स्थापना?

दिवाली की पूजा के लिए घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। इसके अलावा घर के पूजा स्थल या साफ-सुथरे स्थान पर भी लक्ष्मी-गणेश की स्थापना की जा सकती है। पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि प्रतिमाएं ऐसी जगह रखी हों, जहां परिवार के सभी सदस्य आसानी से बैठकर पूजा कर सकें। पूजा स्थल को पहले अच्छी तरह साफ कर लें और वहां चौकी बिछाकर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा रखें।

कैसे रखें मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति?

चौकी पर सबसे पहले भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें और उनके दाहिनी ओर मां लक्ष्मी की प्रतिमा रखें। ध्यान रहे कि यह दिशा भक्त की ओर से देखने के बजाय प्रतिमाओं के आपसी स्थान के अनुसार तय की जाती है। मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्तियों को एक-दूसरे के पास रखें, लेकिन उन्हें आपस में सटाकर न रखें। प्रतिमाओं के सामने पूजा की सामग्री व्यवस्थित तरीके से रखें।

स्थापना से पहले करें ये तैयारी

मूर्ति स्थापना से पहले चौकी और पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध कर लें। इसके बाद चौकी पर स्वास्तिक बनाएं और उस पर अक्षत रखें। अब लाल या पीले कपड़े पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा में कलश रखना भी शुभ माना जाता है। इसके लिए जल से भरे कलश में आम या अशोक के पत्ते लगाएं और ऊपर नारियल रखें। कलश को चौकी के पास स्थापित कर सकते हैं।

स्थापना के बाद कैसे करें पूजा?

मूर्ति स्थापना के बाद सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान और पूजन करें। उन्हें तिलक लगाएं, दूर्वा, फूल और मोदक अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को कुमकुम, अक्षत, कमल या अन्य पुष्प, फल और मिठाई चढ़ाएं। दोनों देवी-देवताओं के सामने दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें। अंत में परिवार के सभी सदस्यों के साथ आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करें।

मूर्ति स्थापना के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की स्थापना करते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। पूजा के लिए हमेशा साफ और सुंदर प्रतिमाओं का चयन करें। खंडित या टूटी हुई मूर्तियों की स्थापना करने से बचना चाहिए। भगवान गणेश की सूंड और मां लक्ष्मी की प्रतिमा का स्वरूप स्पष्ट और सुंदर होना चाहिए। पूजा स्थल पर गंदगी या बिखरी हुई सामग्री न रखें। साथ ही पूजा के दौरान मन को शांत रखें और श्रद्धा के साथ देवी-देवताओं का स्मरण करें।

किस समय करें लक्ष्मी-गणेश की स्थापना?

दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की स्थापना और पूजा प्रदोष काल तथा शुभ मुहूर्त में करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन स्थिर लग्न में पूजा करने की भी परंपरा है। हालांकि, पूजा का सही समय स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार दिवाली 2026 का लक्ष्मी पूजन मुहूर्त देखकर ही स्थापना और पूजा करें।

यह भी पढ़ें-

Narak Chaturdashi: नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है? जानें भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर से जुड़ी पौराणिक कथा 

Narak Chaturdashi 2026: कब है नरक चतुर्दशी? जानें छोटी दिवाली की सही तारीख, पूजा मुहूर्त और धार्मिक महत्व 

Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी पर क्यों जलाए जाते हैं दीपक? जानें इसका महत्व और परंपरा 
 

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel