Ganga Dussehra and Ganga Saptami: हिंदू धर्म में गंगा को मां का दर्जा दिया गया है। कहा जाता है कि पवित्र गंगा में स्नान करने से व्यक्ति को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। मां गंगा की पूजा के लिए कुछ खास दिन भी होते हैं।
Ganga Dussehra and Ganga Saptami: हिंदू धर्म में गंगा को मां का दर्जा दिया गया है। कहा जाता है कि पवित्र गंगा में स्नान करने से व्यक्ति को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। मां गंगा की पूजा के लिए कुछ खास दिन भी होते हैं। इनमें से एक है गंगा सप्तमी और दूसरा है गंगा दशहरा। अक्सर भक्तों को भ्रम हो जाता है कि गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा दोनों एक ही त्योहार हैं। गंगा सप्तमी हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। जबकि गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।
गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार यानी 2025 में गंगा सप्तमी का पर्व 3 मई दिन शनिवार को मनाया जाएगा। इसके साथ ही इस साल गंगा दशहरा का पर्व 5 जून 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा।
गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा में अंतर
वैसे तो गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा दोनों ही दिन मां गंगा की पूजा का प्रावधान है, लेकिन दोनों का अपना-अपना महत्व है। शास्त्रों के अनुसार गंगा सप्तमी के दिन ही मां गंगा का स्वर्ग में ब्रह्माजी के कमंडल से जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन उनका जन्मदिन मनाया जाता है। वहीं, गंगा दशहरा के दिन को लेकर मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन ही मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं।
गंगा सप्तमी के दिन को लेकर एक मान्यता यह भी है कि इस दिन मां गंगा ने भगवान विष्णु के चरण धोए थे। जबकि इसी दिन उन्हें विष्णु लोक में स्थान मिला था और गंगा दशहरा के दिन ही मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं। गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा ने स्वर्ग के सभी देवी-देवताओं को अपने जल से पवित्र किया था। वहीं, गंगा दशहरा के दिन मां गंगा ने पृथ्वी पर आकर भागीरथ के पूर्वजों को मुक्ति दिलाई थी।