Dhanteras: धनतेरस जो दिवाली से दो दिन पहले आता है, सोना और चांदी खरीदने के लिए एक बहुत ही शुभ समय माना जाता है। 'धनतेरस' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है 'धन' और 'तेरस' (जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार चंद्र पखवाड़े के 13वें दिन को दर्शाता है)।
Dhanteras: धनतेरस जो दिवाली से दो दिन पहले आता है, सोना और चांदी खरीदने के लिए एक बहुत ही शुभ समय माना जाता है। 'धनतेरस' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है 'धन' (जिसका अर्थ है संपत्ति या समृद्धि) और 'तेरस' (जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार चंद्र पखवाड़े के 13वें दिन को दर्शाता है)। इस दिन भगवान कुबेर, देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। भगवान धन्वंतरि को चिकित्सा और आरोग्य का देवता माना जाता है इसलिए चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए धनतेरस का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं कि इस दिन सोना और चांदी खरीदने की परंपरा के पीछे क्या मान्यताएं हैं...
धनतेरस पर सोना और चांदी क्यों खरीदे जाते हैं?
सोने को भगवान धन्वंतरि और भगवान कुबेर से जुड़ी धातु माना जाता है। माना जाता है कि सोना घर लाने से अच्छा स्वास्थ्य, सौभाग्य और सुख-समृद्धि आती है यही कारण है कि धनतेरस पर इसे खरीदने की परंपरा है। चांदी का संबंध चंद्रमा से है और माना जाता है कि यह शीतलता और शांति प्रदान करती है, जिससे मन में संतोष का भाव आता है। इस दिन चांदी खरीदने से व्यक्ति की प्रतिष्ठा, समृद्धि और कुल संपत्ति में भी वृद्धि होती है। धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदने की परंपरा से जुड़ी एक प्रचलित कथा भी है। यह राजा हिमा के पुत्र की कहानी है, जिसे श्राप मिला था कि विवाह के चौथे दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी। जब राजकुमार की पत्नी को यह बात पता चली, तो उसने अपने पति से उस चौथी रात को जागते रहने के लिए कहा। उसने घर के मुख्य द्वार पर सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं रख दीं और चारों ओर दीपक जला दिए। अपने पति को जगाए रखने के लिए उसने पूरी रात गीत गाए और कहानियां सुनाईं। जब यमराज एक सांप का रूप धारण करके राजकुमार के प्राण लेने आए तो वे सोने, चांदी और दीपकों की तेज चमक से चकाचौंध हो गए। घर के अंदर न जा पाने के कारण वे कीमती आभूषणों के ढेर पर बैठ गए और पूरी रात गीत सुनते रहे। सुबह होने तक, यमराज बिना राजकुमार के प्राण लिए ही वापस चले गए। तब से, बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए घरों के प्रवेश द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं। धनतेरस पर 'यमदीपदान' की परंपरा के पीछे यही कहानी है।
धनतेरस 2026 पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, 2026 में धनतेरस का त्योहार शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। खरीदारी के लिए शुभ समय शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा।
Trending Video
धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक
वृषभ काल: शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक
खरीदारी के लिए शुभ समय
धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। उक्त पंचांग के अनुसार, खरीदारी 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से शुरू की जा सकती है। हालाँकि स्थानीय पंचांग के आधार पर शुभ समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा है। माना जाता है कि झाड़ू का संबंध देवी लक्ष्मी से है और इसे घर लाने से दरिद्रता दूर होती है। इसके अलावा, साबुत धनिया खरीदना भी शुभ माना जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे घर में धन-समृद्धि आती है। धनतेरस पर नमक खरीदने की भी परंपरा है। माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है। यह भी पढ़ें-
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)