facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  rama ekadashi vrat mein kya khayein aur kya nahi janiye vrat ke niyam aur dharmik mahatva

Rama Ekadashi: रमा एकादशी व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं, जानें नियम और धार्मिक महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Ekadashi Vrat: रमा एकादशी का व्रत केवल खानपान से जुड़े नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन, वचन और कर्म की शुद्धता का भी पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने के साथ जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए।

Rama Ekadashi Vrat
Rama Ekadashi Vrat Niyam: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने दो एकादशी आती हैं, जिनमें भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने का विधान है। इन्हीं में से एक रमा एकादशी है, जो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। रमा एकादशी का व्रत करते समय खानपान के नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में आइए जानते हैं कि रमा एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।

रमा एकादशी को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है। इस एकादशी का नाम माता लक्ष्मी के एक स्वरूप रमा के नाम पर पड़ा है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने का भी विधान है। मान्यता है कि रमा एकादशी का व्रत करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसके अलावा व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

रमा एकादशी व्रत में क्या खाएं?

रमा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। इस दिन फल खाना शुभ माना जाता है। आप सेब, केला, अनार, पपीता और मौसमी फल खा सकते हैं। इसके अलावा दूध, दही और अन्य सात्विक दुग्ध पदार्थों का सेवन भी किया जा सकता है। व्रत के दौरान कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और राजगिरा जैसे व्रत में इस्तेमाल होने वाले अनाज के विकल्पों से भोजन बनाया जा सकता है। 

इसके अलावा साबूदाना, आलू और शकरकंद का सेवन भी कई व्रत परंपराओं में किया जाता है। सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, भोजन बनाते समय शुद्धता और सात्विकता का ध्यान रखना जरूरी है। जो लोग निर्जला व्रत नहीं रख सकते, वे अपनी सेहत के अनुसार पानी, दूध और फलाहार लेकर व्रत कर सकते हैं। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही व्रत के नियम अपनाने चाहिए।

रमा एकादशी व्रत में क्या नहीं खाएं?

एकादशी के दिन चावल और सामान्य अनाज का सेवन नहीं किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गेहूं, चावल, जौ और दालों से बने भोजन से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा प्याज और लहसुन जैसे तामसिक माने जाने वाले खाद्य पदार्थ भी नहीं खाने चाहिए। व्रत के दौरान मांस, मछली, अंडे और शराब का सेवन पूरी तरह वर्जित माना जाता है। इसके अलावा बाहर का तला-भुना और बासी भोजन खाने से भी बचना चाहिए। एकादशी के दिन भोजन के साथ-साथ अपने विचारों और व्यवहार में भी सात्विकता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।

व्रत के जरूरी नियम

रमा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। पूजा में पीले फूल, फल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें। भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और रमा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। इस दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए और न ही मन में किसी के प्रति बुरे विचार रखने चाहिए। जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और अन्य जरूरी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है। रात में भगवान विष्णु का स्मरण और भजन-कीर्तन करना भी फलदायी माना गया है।

कब खोलना चाहिए व्रत?

एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वादशी के दिन शुभ पारण समय में भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद व्रत खोलना चाहिए। पारण के लिए पंचांग में दिए गए समय का ध्यान रखना जरूरी है। व्रत खोलते समय सात्विक भोजन करना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना चाहिए।

श्रद्धा और शुद्धता का रखें विशेष ध्यान

रमा एकादशी का व्रत केवल खानपान से जुड़े नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन, वचन और कर्म की शुद्धता का भी पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने के साथ जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए। सच्चे मन से किया गया व्रत, पूजा और दान व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। व्रत के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए ही नियमों का पालन करें।

ये भी पढ़ें -  रमा एकादशी पर पूर्वजों को कैसे करें प्रसन्न? जानें पितृदोष दूर करने के उपाय

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel