facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  dhanteras par kyo ki jati hai dhanvantri dev ki pooja janiye katha

Dhanteras: धनतेरस पर क्यों की जाती है धनवंतरि देव की पूजा, जानिए कथा

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Dhanteras:  धनतेरस जिसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की तेरहवीं तिथि  को मनाया जाता है। यह पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली के त्योहार की शुरुआत का प्रतीक है। 

Dhanteras
Dhanteras:  धनतेरस जिसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की तेरहवीं तिथि  को मनाया जाता है। यह पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली के त्योहार की शुरुआत का प्रतीक है।  इस दिन मुख्य रूप से भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं कि भगवान धन्वंतरि कौन हैं और धनतेरस पर उनकी पूजा क्यों की जाती है।

भगवान धन्वंतरि कौन हैं?

भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। वे 'समुद्र मंथन' के दौरान हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का जनक और देवताओं का चिकित्सक माना जाता है। समुद्र मंथन के समय वे एक अत्यंत तेजस्वी रूप में प्रकट हुए थे, जिनके हाथों में अमृत का कलश था। उन्हें चार भुजाओं वाले रूप में दर्शाया जाता है जिनमें वे अमृत कलश, शंख, चक्र और औषधीय जड़ी-बूटियां या पौधे धारण किए हुए हैं।

भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है?

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि इसी दिन वे समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुए थे। माना जाता है कि इस अवसर पर उनकी पूजा करने से अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु प्राप्त होती है तथा व्यक्ति रोगों और कष्टों से मुक्त होता है। यह पूजा धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर के साथ की जाती है जिससे अच्छे स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि दोनों की कामना पूरी होती है।

भगवान धन्वंतरि की उत्पत्ति

कहा जाता है कि भगवान धन्वंतरि की उत्पत्ति 'समुद्र मंथन' से हुई थी। वे समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे जो देवताओं और असुरों के बीच एक बड़े संघर्ष का कारण बना। समुद्र मंथन का यह वृत्तांत श्रीमद्भागवत पुराण, महाभारत, विष्णु पुराण और अग्नि पुराण जैसे कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। एक अन्य कथा के अनुसार, काशी के राजकुल के राजा धन्वा ने अपनी भक्ति से देवता अज्जा को प्रसन्न किया, जिससे उन्हें धन्वंतरि नामक पुत्र की प्राप्ति हुई। इसका उल्लेख ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण में मिलता है। इसे धन्वंतरि का दूसरा अवतार माना जाता है; जबकि मूल रूप से धन्वंतरि समुद्र मंथन के समय प्रकट हुए थे। राजा धन्वा, काशी नगर के संस्थापक 'काश' के पुत्र थे।

भगवान धन्वंतरि के जन्म से जुड़ी एक और कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार प्यास से व्याकुल ऋषि गालव जंगल में भटक रहे थे, तभी उनकी भेंट वीरभद्रा नाम की एक स्त्री से हुई, जो पानी का घड़ा लिए जा रही थी। उसने ऋषि की प्यास बुझाई। प्रसन्न होकर ऋषि गालव ने उसे आशीर्वाद दिया, "तुम एक योग्य पुत्र की माता बनोगी।" जब वीरभद्रा ने बताया कि वह एक गणिका  है तो ऋषि उसे अपने आश्रम ले गए। वहां उन्होंने कुश घास से एक आकृति बनाई, उसे वीरभद्रा की गोद में रखा और वैदिक मंत्रों का उच्चारण करके उसमें प्राण फूंके यही बालक आगे चलकर धन्वंतरि कहलाया। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक माना जाता है। उन्होंने संसार की वनस्पतियों का अध्ययन किया और विभिन्न पौधों के लाभकारी व हानिकारक गुणों का पता लगाया। भगवान धन्वंतरि ने कई ग्रंथों की रचना की, जिनमें से एक 'धन्वंतरि संहिता' है जो आयुर्वेद का एक आधारभूत ग्रंथ है। आयुर्वेद के महान आचार्य सुश्रुत ने इस चिकित्सा विज्ञान का ज्ञान सीधे भगवान धन्वंतरि से ही प्राप्त किया था। बाद में चरक जैसे विद्वानों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।

स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद

धनतेरस के दिन को 'धन्वंतरि जयंती' और 'आयुर्वेद दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि उत्तम स्वास्थ्य को ही सबसे बड़ा धन माना गया है। भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से लोग शारीरिक और मानसिक कष्टों से राहत पाते हैं और उन्हें उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। भगवान धन्वंतरि की पूजा अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्राप्ति के लिए की जाती है। वहीं, धनतेरस के दिन धन और समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके अलावा, धनतेरस पर धन के देवता के रूप में भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है।


यह भी पढ़ें 

Dhanteras: धनतेरस पर क्यों खरीदा जाता है सोना- चांदी जानिए धार्मिक मान्यता

Dhanteras 2026: कब है धनतेरस? जानें सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और सोना-चांदी खरीदने का महत्व 

Dhanteras 2026: धनतेरस पर 13 दीपक जलाने का धार्मिक महत्व क्या है, जानिए

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel