
2. कालदेव का आगमन और लक्ष्मण जी का त्याग
पद्म पुराण की कथा के अनुसार, एक दिन कालदेव एक ऋषि का भेष धरकर अयोध्या में श्रीराम से मिलने आए। उन्होंने राम जी के सामने एक शर्त रखी "जब तक हमारे बीच बातचीत होगी, कोई भी कक्ष के भीतर नहीं आएगा। यदि कोई आया, तो आपको उसे मृत्युदंड देना होगा।" प्रभु राम ने शर्त मान ली और अपने भाई लक्ष्मण को द्वारपाल नियुक्त कर दिया। इसी बीच, अत्यंत क्रोधी स्वभाव के महर्षि दुर्वासा अयोध्या पहुंचे और श्रीराम से तुरंत मिलने की जिद करने लगे। लक्ष्मण जी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो दुर्वासा ऋषि ने पूरी अयोध्या को श्राप देने की चेतावनी दे दी।धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।
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