Eighth Bada Mangal: सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह के मंगलवार का विशेष महत्व माना जाता है। उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश और अवध क्षेत्र में बड़े मंगल का पर्व अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त व्रत रखकर संकटमोचन से सुख, समृद्धि और रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। ज्येष्ठ माह का अंतिम या आठवां बड़ा मंगल विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह बड़े मंगल श्रृंखला का समापन करता है। वर्ष 2026 में पड़ने वाला आठवां बड़ा मंगल भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। आइए जानते हैं इसकी तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।
कब है ज्येष्ठ माह का आखिरी बड़ा मंगल?
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में पड़ने वाले सभी मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास का अंतिम यानी आठवां बड़ा मंगल 16 जून 2026, मंगलवार को मनाया जा रहा है। इस दिन हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा, सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा का पाठ और भंडारों का आयोजन किया जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन कर उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
आठवें बड़े मंगल की तिथि
पंचांग के अनुसार यह बड़ा मंगल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में पड़ता है। धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगलवार भगवान हनुमान को अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए इस दिन की गई पूजा और उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर भगवान हनुमान को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और बूंदी अथवा बेसन के लड्डू अर्पित करते हैं। साथ ही हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ भी किया जाता है।
बड़े मंगल का शुभ मुहूर्त
आठवें बड़े मंगल के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय के बाद तक पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त सूर्योदय के समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा आरंभ करते हैं।
अभिजीत मुहूर्त: लगभग दोपहर 11:55 बजे से 12:50 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः लगभग 4:03 बजे से 4:43 बजे तक
विजय मुहूर्त: अपराह्न लगभग 2:43 बजे से 3:38 बजे तक
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त और प्रातःकाल में भगवान हनुमान की पूजा करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
बड़े मंगल पर कैसे करें भगवान हनुमान की पूजा?
बड़े मंगल के दिन प्रातः स्नान के बाद पूजा स्थान को शुद्ध करें और भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। लाल पुष्प, तुलसी दल और प्रसाद अर्पित कर दीपक जलाएं। इसके पश्चात हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और राम नाम का स्मरण करना शुभ माना जाता है।
कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर केवल सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बड़े मंगल पर दान-पुण्य और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी कारण अनेक स्थानों पर शरबत, जल सेवा और भंडारे आयोजित किए जाते हैं।
बड़े मंगल का धार्मिक महत्व
ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल का संबंध भगवान हनुमान की आराधना से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से भक्तों को हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन के संकट दूर होते हैं।
अवध क्षेत्र में बड़े मंगल की परंपरा कई शताब्दियों से चली आ रही है। इस दिन हनुमान मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है और भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के अनेक शहरों में बड़े मंगल का उत्सव अत्यंत भव्य रूप से मनाया जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार भगवान राम के परम भक्त हनुमान को समर्पित माने जाते हैं। इसलिए इस दिन उनकी आराधना का विशेष महत्व बताया गया है।
बड़े मंगल पर क्या अर्पित करना शुभ माना जाता है?