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Padmasana for Meditation: ध्यान के लिए पद्मासन को सर्वश्रेष्ठ आसन क्यों माना जाता है? जानिए इसके लाभ

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Padmasana for Meditation: सबसे पहले समतल स्थान पर योगा मैट या दरी बिछाकर बैठ जाएं। दोनों पैरों को सामने फैलाएं। अब दाएं पैर को उठाकर बाईं जांघ पर रखें। इसके बाद बाएं पैर को उठाकर दाईं जांघ पर रखें। 

Padmasana
Padmasana for Meditation: ध्यान करने की बात आती है तो सबसे पहले जिस आसन का नाम लिया जाता है, वह है पद्मासन। योगशास्त्र में इसे केवल बैठने का तरीका नहीं, बल्कि शरीर, मन और श्वास के बीच संतुलन बनाने वाला एक महत्वपूर्ण आसन माना गया है। प्राचीन समय से ऋषि-मुनि, योगी और साधक लंबे समय तक ध्यान, जप और साधना के लिए पद्मासन का ही प्रयोग करते रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बैठने पर शरीर स्थिर रहता है और मन को एकाग्र करने में आसानी होती है।

आज भी योग और ध्यान का अभ्यास करने वाले लोग पद्मासन को सबसे प्रभावी ध्यान मुद्रा मानते हैं, लेकिन आखिर ऐसा क्या है कि इतने सारे योगासनों के बीच पद्मासन को ही विशेष महत्व दिया जाता है? क्या केवल पैरों को मोड़कर बैठ जाने से ध्यान बेहतर हो जाता है या इसके पीछे कोई गहरी योग परंपरा और वैज्ञानिक आधार भी है? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं, तो आइए जानते हैं।

पद्मासन क्या है?

पद्मासन संस्कृत के दो शब्दों "पद्म" यानी कमल और "आसन" यानी बैठने की मुद्रा से मिलकर बना है। इस मुद्रा में बैठने पर शरीर की आकृति खिले हुए कमल के समान दिखाई देती है, इसलिए इसे पद्मासन कहा जाता है। इस आसन में दोनों पैरों को विपरीत जांघों पर रखा जाता है, रीढ़ सीधी रहती है और हाथ घुटनों पर ज्ञान मुद्रा या चिन मुद्रा में रखे जाते हैं। योग ग्रंथों में इसे ध्यान, प्राणायाम और मंत्र जाप के लिए सबसे उपयुक्त आसन बताया गया है।

ध्यान के लिए पद्मासन को सर्वश्रेष्ठ क्यों माना जाता है?

ध्यान का सबसे पहला नियम है कि शरीर जितना स्थिर रहेगा, मन उतनी जल्दी शांत होगा। पद्मासन इसी उद्देश्य को पूरा करता है। इस मुद्रा में बैठने पर शरीर का संतुलन मजबूत बना रहता है और बार-बार हिलने-डुलने की आवश्यकता नहीं पड़ती। जब शरीर स्थिर होता है तो ध्यान के दौरान बाहरी गतिविधियां कम महसूस होती हैं और साधक का ध्यान भीतर की ओर केंद्रित होने लगता है। यही कारण है कि योग परंपरा में पद्मासन को ध्यान की आदर्श मुद्रा माना गया है।

रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने में मदद करता है

ध्यान करते समय रीढ़ का सीधा होना बहुत जरूरी माना जाता है। झुककर बैठने से कुछ समय बाद पीठ, गर्दन और कंधों में दर्द होने लगता है, जिससे ध्यान भंग हो सकता है। पद्मासन में शरीर स्वाभाविक रूप से सीधा रहता है। इससे गर्दन, कंधे और कमर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। लंबे समय तक बैठने के बाद भी शरीर अपेक्षाकृत आरामदायक स्थिति में बना रहता है, जिससे ध्यान का अभ्यास बेहतर हो पाता है।

लंबे समय तक बिना थकान के बैठने में सहायक

ध्यान कई बार 20 मिनट, 30 मिनट या उससे भी अधिक समय तक किया जाता है। यदि बैठने की मुद्रा सही न हो तो पैरों में दर्द, सुन्नपन या बेचैनी होने लगती है। पद्मासन में शरीर का भार संतुलित रूप से जमीन पर टिकता है। नियमित अभ्यास के बाद व्यक्ति लंबे समय तक एक ही स्थिति में अपेक्षाकृत सहज होकर बैठ सकता है। यही कारण है कि अनुभवी योग साधक इसी आसन में घंटों तक ध्यान और जप कर पाते हैं।

मन की एकाग्रता बढ़ाने में सहायक

योग में शरीर और मन को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना जाता है। जब शरीर स्थिर रहता है तो मन भी धीरे-धीरे शांत होने लगता है। पद्मासन में बैठकर ध्यान करने से बार-बार शरीर की स्थिति बदलने की आवश्यकता कम पड़ती है। इससे मन का ध्यान बार-बार भटकने के बजाय श्वास, मंत्र या ध्यान के विषय पर केंद्रित रखने में सहायता मिलती है।

श्वास को संतुलित रखने में मदद करता है

ध्यान के दौरान गहरी और शांत श्वास का विशेष महत्व होता है। पद्मासन में बैठने पर छाती खुली रहती है और पेट पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। इससे श्वास लेना और छोड़ना सहज महसूस होता है। जब सांस की गति शांत होती है तो ध्यान की अवस्था में प्रवेश करना भी अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। इसी कारण प्राणायाम का अभ्यास भी अक्सर पद्मासन में करने की सलाह दी जाती है।

शरीर का संतुलन बेहतर बनाता है

पद्मासन में बैठने पर शरीर का केंद्र स्थिर रहता है। इससे आगे या पीछे झुकने की संभावना कम होती है। ध्यान करते समय यह संतुलन बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि शरीर जितना स्थिर रहेगा, ध्यान उतना गहरा हो सकता है। यही कारण है कि योग शिक्षकों द्वारा ध्यान शुरू करने से पहले सही बैठने की मुद्रा पर विशेष जोर दिया जाता है।

मानसिक शांति का अनुभव कराने में सहायक

नियमित रूप से पद्मासन में बैठकर ध्यान करने से मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है। ध्यान के दौरान जब शरीर स्थिर रहता है और श्वास नियंत्रित रहती है, तब मन में चल रहे अनावश्यक विचारों की गति भी कम होने लगती है। इसी वजह से ध्यान का अभ्यास करने वाले अधिकांश लोग पद्मासन को प्राथमिकता देते हैं। यह आसन ध्यान के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद करता है।

पद्मासन करने का सही तरीका

सबसे पहले समतल स्थान पर योगा मैट या दरी बिछाकर बैठ जाएं। दोनों पैरों को सामने फैलाएं। अब दाएं पैर को उठाकर बाईं जांघ पर रखें। इसके बाद बाएं पैर को उठाकर दाईं जांघ पर रखें। रीढ़ को पूरी तरह सीधा रखें। कंधों को ढीला छोड़ दें और गर्दन को सामान्य स्थिति में रखें। दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा या चिन मुद्रा में रखें। आंखें बंद करें और सामान्य गति से श्वास लेते हुए ध्यान शुरू करें। यदि शुरुआत में पूरा पद्मासन लगाना कठिन लगे तो पहले अर्ध पद्मासन का अभ्यास किया जा सकता है। धीरे-धीरे शरीर में लचीलापन आने पर पूर्ण पद्मासन किया जा सकता है।



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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)

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