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Meditation Tips: ध्यान के दौरान शरीर हिलने क्यों लगता है? जानें इसका कारण और क्या कहता है योग

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Meditation Tips: योग दर्शन में माना जाता है कि जब व्यक्ति नियमित रूप से ध्यान करता है, तो उसका मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है। शरीर में जमा तनाव कम होने लगता है और ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होने लगता है।

Meditation
Meditation Tips: ध्यान को मन और शरीर को शांत करने का सबसे प्रभावी अभ्यास माना जाता है। आज बड़ी संख्या में लोग मानसिक तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और आंतरिक शांति पाने के लिए मेडिटेशन कर रहे हैं। लेकिन कई लोग ध्यान करते समय एक ऐसी अनुभूति का अनुभव करते हैं, जो उन्हें हैरान कर देती है। कुछ लोगों का शरीर धीरे-धीरे आगे-पीछे या दाएं-बाएं हिलने लगता है, जबकि कुछ को गर्दन, हाथ या रीढ़ में हल्का कंपन महसूस होता है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर ध्यान के दौरान शरीर अपने आप क्यों हिलने लगता है? आइए इस बारे में जानते हैं।

क्या ध्यान के दौरान शरीर का हिलना सामान्य है?

योग और ध्यान के जानकारों के अनुसार, ध्यान करते समय शरीर का हल्का हिलना हर व्यक्ति में नहीं होता, लेकिन कई साधकों के साथ ऐसा अनुभव हो सकता है। यह हिलना अक्सर बहुत हल्का होता है और कुछ समय बाद अपने आप रुक भी जाता है। यदि यह बिना किसी दर्द या असुविधा के हो रहा है, तो इसे सामान्य अनुभव माना जाता है। हालांकि, यदि शरीर बहुत ज्यादा कांप रहा हो, चक्कर आ रहे हों या कोई अन्य शारीरिक परेशानी महसूस हो रही हो तो केवल इसे ध्यान का प्रभाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी होता है।

योग के अनुसार क्यों होता है ऐसा अनुभव?

योग दर्शन में माना जाता है कि जब व्यक्ति नियमित रूप से ध्यान करता है, तो उसका मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है। शरीर में जमा तनाव कम होने लगता है और ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होने लगता है। कई योगाचार्यों का मानना है कि इसी प्रक्रिया के दौरान शरीर में हल्की-हल्की स्वाभाविक गतिविधियां महसूस हो सकती हैं। योग में इसे कई बार शरीर और मन के भीतर हो रहे संतुलन का एक स्वाभाविक हिस्सा माना जाता है। हालांकि हर साधक का अनुभव अलग होता है। किसी को बिल्कुल स्थिरता महसूस होती है, तो किसी को हल्का कंपन या झुकाव महसूस हो सकता है।

शरीर में जमा तनाव भी हो सकता है एक कारण

दिनभर की भागदौड़, मानसिक दबाव और लगातार तनाव का असर केवल मन पर ही नहीं बल्कि शरीर पर भी पड़ता है। गर्दन, कंधों, पीठ और कमर की मांसपेशियां कई बार लंबे समय तक तनाव में रहती हैं। जब व्यक्ति ध्यान के दौरान पूरी तरह रिलैक्स होने लगता है, तो शरीर धीरे-धीरे उस तनाव को छोड़ना शुरू करता है। इसी प्रक्रिया में हल्का हिलना या झटका महसूस हो सकता है। कई बार यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया होती है, जो मांसपेशियों के आराम करने से जुड़ी होती है।

सांस की गति में बदलाव का भी पड़ता है असर

ध्यान करते समय व्यक्ति अपनी सांसों पर ध्यान देता है। जैसे-जैसे सांस गहरी और धीमी होती जाती है, वैसे-वैसे शरीर का संतुलन भी बदल सकता है। यदि बैठने की मुद्रा पूरी तरह स्थिर न हो या शरीर का भार बराबर न बंटा हो, तो सांस की लय के साथ हल्का आगे-पीछे झुकाव महसूस हो सकता है। यह स्थिति विशेष रूप से शुरुआती साधकों में अधिक देखने को मिल सकती है।

ध्यान के शुरुआती अभ्यास में क्यों होता है ज्यादा महसूस?

जो लोग पहली बार ध्यान करना शुरू करते हैं, उनका मन और शरीर अभी स्थिर बैठने का आदी नहीं होता। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना भी शरीर के लिए नया अनुभव होता है। ऐसे में शरीर कभी हल्का हिल सकता है, कभी बैठने की स्थिति बदलने का संकेत दे सकता है। नियमित अभ्यास के साथ शरीर धीरे-धीरे स्थिर होने लगता है और ऐसे अनुभव कम हो सकते हैं।

क्या शरीर को जबरन रोकना चाहिए?

यदि ध्यान करते समय शरीर में बहुत हल्का स्वाभाविक हिलना महसूस हो रहा है और उससे कोई परेशानी नहीं है, तो उसे जबरन रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। शरीर को आरामदायक स्थिति में रहने देना बेहतर माना जाता है, लेकिन यदि हिलना बहुत ज्यादा हो रहा है, संतुलन बिगड़ रहा है या दर्द महसूस हो रहा है, तो ध्यान रोककर अपनी बैठने की मुद्रा की जांच करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक से मार्गदर्शन लेना उपयोगी रहता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)

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