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Meditation Tips: ध्यान करते समय कौन-सा मंत्र बोलना चाहिए? जानें सबसे प्रभावी मंत्र और उनका महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Meditation Tips: सनातन परंपरा में मंत्र को केवल शब्द नहीं बल्कि दिव्य ध्वनि माना गया है। जब किसी मंत्र का बार-बार उच्चारण किया जाता है तो उसकी ध्वनि मन को एक दिशा में केंद्रित करने में मदद करती है।

Meditation Tips
Meditation Tips: ध्यान को मन, शरीर और आत्मा के संतुलन का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है, लेकिन अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि ध्यान करते समय क्या सिर्फ शांत बैठना ही पर्याप्त है या किसी मंत्र का जाप भी करना चाहिए? धार्मिक ग्रंथों और योग परंपरा में मंत्रों को ध्यान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। ऐसा माना जाता है कि सही मंत्र का उच्चारण मन की चंचलता को कम करता है, एकाग्रता बढ़ाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

हालांकि हर व्यक्ति के लिए मंत्र अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोग 'ॐ' का जाप करते हैं, तो कुछ अपने इष्ट देव के मंत्र का स्मरण करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि ध्यान के समय सबसे अधिक कौन-सा मंत्र बोला जाता है? क्या सभी मंत्रों का प्रभाव एक जैसा होता है? आइए जानते हैं ध्यान करते समय बोले जाने वाले प्रमुख मंत्रों और उनके धार्मिक महत्व के बारे में।

ध्यान में मंत्र का क्या महत्व माना जाता है?

सनातन परंपरा में मंत्र को केवल शब्द नहीं बल्कि दिव्य ध्वनि माना गया है। जब किसी मंत्र का बार-बार उच्चारण किया जाता है तो उसकी ध्वनि मन को एक दिशा में केंद्रित करने में मदद करती है। ध्यान के दौरान मन बार-बार भटकता है, लेकिन मंत्र उस भटकाव को कम करने का माध्यम बनता है। योग शास्त्र के अनुसार मंत्र का कंपन शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। नियमित अभ्यास से मन शांत होने लगता है और ध्यान की गहराई बढ़ने लगती है।

ध्यान के समय 'ॐ' मंत्र का जाप क्यों किया जाता है?

ध्यान के लिए सबसे अधिक प्रचलित मंत्र 'ॐ' माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि 'ॐ' सृष्टि की आदि ध्वनि है और इसी से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। उपनिषदों में भी 'ॐ' को अत्यंत पवित्र और दिव्य मंत्र बताया गया है। ध्यान करते समय धीरे-धीरे और लंबी सांस के साथ 'ॐ' का उच्चारण करने से मन की गति शांत होती है। इसकी ध्वनि शरीर में कंपन उत्पन्न करती है, जिससे ध्यान में स्थिरता आने लगती है। यही कारण है कि योग और ध्यान की शुरुआत अक्सर 'ॐ' के उच्चारण से की जाती है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप कब करना चाहिए?

जो लोग भगवान शिव की उपासना करते हैं, वे ध्यान के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह मंत्र भय, तनाव और नकारात्मक विचारों को दूर करने का प्रतीक माना जाता है।

"ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥"


इस मंत्र का जाप शांत मन से बैठकर किया जाता है। शिव भक्तों के लिए यह ध्यान का अत्यंत लोकप्रिय मंत्र माना जाता है।

गायत्री मंत्र का ध्यान में क्या महत्व है?

गायत्री मंत्र को वेदों का अत्यंत पवित्र मंत्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका नियमित जाप बुद्धि, विवेक और सकारात्मक सोच को विकसित करने वाला माना जाता है। ध्यान के समय यदि मन बार-बार भटक रहा हो तो गायत्री मंत्र का मानसिक जाप भी किया जा सकता है। इसका उच्चारण धीरे-धीरे और स्पष्ट भाव के साथ करना उचित माना जाता है।

'सोऽहम' मंत्र क्यों माना जाता है विशेष?

योग साधना में 'सोऽहम' मंत्र का भी विशेष स्थान है। इसका अर्थ होता है- 'वह मैं हूं' अर्थात आत्मा और परमात्मा की एकता का भाव। इस मंत्र के अभ्यास में सांस के साथ ध्यान लगाया जाता है। सांस अंदर लेते समय मन ही मन 'सो' और सांस छोड़ते समय 'हम' का स्मरण किया जाता है। योग परंपरा में इसे प्राकृतिक ध्यान विधि माना गया है।

अपने इष्ट देव के मंत्र का जाप भी कर सकते हैं

ध्यान के दौरान केवल सार्वभौमिक मंत्र ही नहीं, बल्कि अपने आराध्य देव का मंत्र भी बोला जा सकता है। जैसे भगवान शिव के भक्त 'ॐ नमः शिवाय', भगवान विष्णु के भक्त 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', श्रीराम भक्त 'श्री राम जय राम जय जय राम' और श्रीकृष्ण भक्त 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'हरे कृष्ण' महामंत्र का स्मरण कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जिस देवता के प्रति श्रद्धा और विश्वास हो, उनके मंत्र का जाप ध्यान को अधिक सहज और भावपूर्ण बना सकता है।

ध्यान करते समय मंत्र बोलने का सही तरीका

ध्यान शुरू करने से पहले किसी शांत और स्वच्छ स्थान का चयन करें। रीढ़ सीधी रखते हुए आरामदायक मुद्रा में बैठें। कुछ क्षण सामान्य सांसों पर ध्यान दें और फिर चुने हुए मंत्र का जाप शुरू करें। यदि शुरुआत कर रहे हैं तो मंत्र को धीमी आवाज में बोल सकते हैं। अभ्यास बढ़ने पर मानसिक जाप भी किया जा सकता है। ध्यान रखें कि मंत्र का उच्चारण जल्दबाजी में न करें, बल्कि प्रत्येक शब्द को स्पष्ट भाव के साथ बोलें।





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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी योग और आयुर्वेद से संबंधित सामान्य जानकारियों, परंपरागत मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। जीवांजलि इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए किसी योग्य चिकित्सक, योग विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।)

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