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Shiva Story: महादेव ने क्यों लिया था अर्धनारीश्वर का रूप, जानें क्या है धार्मिक मान्यता

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Shiva Story: भोलेनाथ को देवों के देव महादेव कहा जाता है। भोलेनाथ की पूजा शिवलिंग समेत कई रूपों में की जाती है। शिव का ऐसा ही एक शुद्ध रूप है अर्धनारीश्वर। भगवान शिव के इस रूप में शक्ति भी उनके साथ होती हैं।

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Shiva Story: भोलेनाथ को देवों के देव महादेव कहा जाता है। भोलेनाथ की पूजा शिवलिंग समेत कई रूपों में की जाती है। शिव का ऐसा ही एक शुद्ध रूप है अर्धनारीश्वर। भगवान शिव के इस रूप में शक्ति भी उनके साथ होती हैं। माना जाता है कि भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के सामने यह रूप धारण किया था। भगवान शिव और शक्ति को एक साथ प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव के अर्धनारीश्वर रूप की पूजा की जाती है।

यह है शिव का अर्धनारीश्वर रूप

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अर्धनारीश्वर रूप का अर्थ है आधा स्त्री और आधा पुरुष। भगवान शिव के इस अर्धनारीश्वर रूप में आधे भाग में शिव पुरुष के रूप में और आधे भाग में शिव स्त्री यानी शक्ति के रूप में निवास करते हैं। भगवान का यह रूप इस बात का संकेत है कि पुरुष और स्त्री एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। इन दोनों के बिना सृष्टि की कल्पना नहीं की जा सकती।

इसलिए शिव जी ने लिया अर्धनारीश्वर रूप

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पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी को सृष्टि की रचना का दायित्व सौंपा गया था। ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि की रचना का कार्य आरम्भ किया तो उन्हें ज्ञात हुआ कि उनकी सभी रचनाएँ जीवन के पश्चात नष्ट हो जाएँगी तथा उन्हें हर बार उन्हें नए सिरे से बनाना पड़ेगा। उनके सामने बड़ी दुविधा थी कि इस प्रकार से सृष्टि का विकास कैसे होगा। बहुत सोच-विचार के पश्चात ब्रह्मा जी भगवान शिव के पास गए।

ब्रह्मदेव के अनुरोध पर शिव जी ने स्त्री और पुरुष दोनों की रचना के लिए यह रूप धारण किया। भगवान शंकर इस रूप में ब्रह्मा जी के सामने प्रकट हुए। उनके शरीर के एक आधे भाग में शिव तथा दूसरे आधे भाग में स्त्री रूप में शिवा अर्थात शक्ति दिखाई दी। उनके इस रूप को देखकर भगवान शिव ने ब्रह्मा जी को प्रजननशील प्राणी की रचना करने के लिए प्रेरित किया।
 
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इस प्रकार शक्ति शिव से अलग हो गई तथा फिर शक्ति ने अपने मस्तक के मध्य से उसी तेज वाली एक अन्य शक्ति को प्रकट किया। यही शक्ति फिर दक्ष के घर उनकी पुत्री के रूप में उत्पन्न हुई, जिसके पश्चात सृष्टि का आरम्भ हुआ।

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