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Ramayana: माता सीता ने कहां किया था अपने ससुर राजा दशरथ का श्राद्ध? जानिए पौराणिक कथा

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Ramayana Mythological Story: पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा दशरथ की इच्छा और समय की आवश्यकता को देखते हुए माता सीता ने फल्गु नदी के तट की बालू से ही पिंड बनाया। उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ राजा दशरथ का पिंडदान किया।

Ramayana Mythological Story: 
Ramayana Mythological Story: रामायण से जुड़ी कई ऐसी कथाएं हैं, जिनका संबंध आज भी भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों और धार्मिक परंपराओं से माना जाता है। ऐसी ही एक कथा माता सीता और राजा दशरथ के श्राद्ध से जुड़ी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास के दौरान माता सीता ने अपने ससुर राजा दशरथ के लिए गया में फल्गु नदी के तट पर पिंडदान किया था। इस प्रसंग में बालू से पिंड बनाने, राजा दशरथ के दर्शन देने और साक्षियों के झूठ बोलने की कथा भी आती है। आखिर माता सीता ने यह श्राद्ध क्यों किया था और इस दौरान क्या हुआ था? आइए जानते हैं इस पौराणिक कथा के बारे में...

गया में किया था पिंडदान

धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास के दौरान राजा दशरथ का निधन हो गया था। पिता के देहांत के बाद श्रीराम ने उनके प्रति अपने पुत्र धर्म का पालन किया। इसी प्रसंग में गया की फल्गु नदी के तट पर राजा दशरथ के श्राद्ध और पिंडदान की कथा सुनाई जाती है। मान्यता है कि गया में पितरों के लिए श्राद्ध और पिंडदान करने का विशेष महत्व है। इसी पवित्र भूमि पर माता सीता ने अपने ससुर राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था। यह कथा विशेष रूप से फल्गु नदी और वहां मौजूद धार्मिक स्थलों से जुड़ी हुई है।

जब श्रीराम और लक्ष्मण सामग्री लेने गए

कथा के अनुसार, राजा दशरथ के श्राद्ध का समय आया तो भगवान श्रीराम ने विधि-विधान से पिंडदान करने की तैयारी की। इसके लिए श्राद्ध की आवश्यक सामग्री जुटानी थी। श्रीराम और लक्ष्मण सामग्री लेने के लिए चले गए। इस दौरान माता सीता फल्गु नदी के तट पर ही रहीं। इसी समय राजा दशरथ ने माता सीता को दर्शन दिए। उन्होंने अपनी बहू से कहा कि उन्हें भूख और प्यास लगी है और वे उनसे पिंडदान स्वीकार करना चाहते हैं। राजा दशरथ की बात सुनकर माता सीता असमंजस में पड़ गईं। उनके पास उस समय श्राद्ध के लिए आवश्यक सामग्री भी नहीं थी और श्रीराम भी वहां मौजूद नहीं थे।

बालू से बनाया पिंड

पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा दशरथ की इच्छा और समय की आवश्यकता को देखते हुए माता सीता ने फल्गु नदी के तट की बालू से ही पिंड बनाया। उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ राजा दशरथ का पिंडदान किया। इस तरह उन्होंने अपने ससुर के प्रति कर्तव्य निभाया। कथा में बताया जाता है कि माता सीता के इस पिंडदान से राजा दशरथ संतुष्ट हुए और उन्हें आशीर्वाद देकर चले गए। इसके बाद माता सीता को चिंता हुई कि जब श्रीराम लौटेंगे, तो उन्हें इस घटना पर विश्वास कैसे होगा। इसलिए उन्होंने अपने इस कार्य के साक्षी भी बनाए।

पांच साक्षियों की कथा

इस प्रसंग से जुड़ी लोकमान्यता के अनुसार, माता सीता ने अपने पिंडदान के समय फल्गु नदी, गाय, वटवृक्ष, केतकी के फूल और एक ब्राह्मण को साक्षी माना था। जब भगवान श्रीराम और लक्ष्मण वापस लौटे, तो माता सीता ने उन्हें राजा दशरथ के दर्शन देने और पिंडदान करने की पूरी घटना बताई। श्रीराम को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ कि उनके अनुपस्थित रहने पर माता सीता ने श्राद्ध कर दिया। उन्होंने जब साक्षियों से इस घटना के बारे में पूछा, तो वटवृक्ष को छोड़कर बाकी साक्षियों ने माता सीता की बात का समर्थन नहीं किया।

फल्गु नदी को क्यों मिला श्राप?

कथा के अनुसार, जब फल्गु नदी समेत अन्य साक्षियों ने माता सीता के पिंडदान की बात स्वीकार नहीं की, तो माता सीता क्रोधित हो गईं। उन्होंने फल्गु नदी को श्राप दिया कि उसका जल धरती के नीचे बहने लगेगा। इसी मान्यता के कारण गया की फल्गु नदी के बारे में कहा जाता है कि कई स्थानों पर उसका जल सतह के नीचे प्रवाहित होता है।

वहीं, वटवृक्ष ने माता सीता का साथ दिया था, इसलिए माता सीता ने उसे लंबी आयु का आशीर्वाद दिया। गया में अक्षयवट को इसी धार्मिक कथा से जोड़कर देखा जाता है। फल्गु नदी के प्रवाह और गया के धार्मिक महत्व को लेकर यह कथा आज भी प्रचलित है।

गया में श्राद्ध की परंपरा

गया को हिंदू धर्म में पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है। यहां फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि गया में श्रद्धापूर्वक पिंडदान करने से पितरों को शांति मिलती है। माता सीता और राजा दशरथ से जुड़ी यह कथा भी गया की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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