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Lord Shiva: भगवान शिव ने क्यों लिया था वीरभद्र अवतार, जानें उत्पत्ति की कथा

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Lord Shiva: देवों के देव महादेव की पूजा विधि-विधान से की जाती है। इसके साथ ही भक्त श्रद्धापूर्वक व्रत भी रखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग होंगे जो शिव के अवतारों के बारे में जानते होंगे।

Lord Shiva
Lord Shiva: देवों के देव महादेव की पूजा विधि-विधान से की जाती है। इसके साथ ही भक्त श्रद्धापूर्वक व्रत भी रखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग होंगे जो शिव के अवतारों के बारे में जानते होंगे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महादेव ने कुल 19 अवतार लिए हैं। भगवान शिव से अनेक कथाएं जुड़ी हुई हैं, जिसमें उनके अवतारों की कथाएं और रहस्य भी एक हैं। शिव महापुराण के अनुसार, भगवान शिव के अनेक अवतारों के बारे में वर्णन मिलता है। कुछ जगह शिव के 24 अवतार बताए गए हैं, तो कुछ में 19 अवतार। शिव के कुछ अवतार तंत्र प्रधान हैं, तो कुछ दक्षिणा प्रधान। वैसे तो भगवान शिव के 19 अवतारों की सबसे ज्यादा चर्चा होती है, जो इस प्रकार हैं-

भगवान शिव के 19 अवतार

वीरभद्र, पिप्पलाद, नंदी अवतार, भैरव अवतार, अश्वत्थामा, शरभावतार, गृहपति, ऋषि दुर्वासा, हनुमान जी, वृषभ, यतिनाथ, कृष्णदर्शन, अवधूत, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, किरात, ब्रह्मचारी अवतार, सुनटनतारक और यक्ष अवतार। ये भगवान शिव के 19 अवतारों के नाम हैं। आइए जानते हैं भगवान शिव के पहले वीरभद्र अवतार के बारे में..

वीरभद्र अवतार की उत्पत्ति की कथा

भगवान शिव के इस अवतार को शिव का गण माना जाता है, जो उनकी जटा से उत्पन्न हुआ था। वीरभद्र की उत्पत्ति से जुड़ी कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव के ससुर राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने सभी ऋषियों, देवताओं को आमंत्रित किया। लेकिन राजा दक्ष ने सती और भगवान शिव को इस यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया था। लेकिन सती ने इस यज्ञ में जाने की जिद की, जिसके कारण शिव को उन्हें जाने की अनुमति देनी पड़ी।

यज्ञ में सती के पिता राजा दक्ष ने शिव के बारे में कठोर शब्द बोलकर उनका बहुत अपमान किया। सती अपने पति शिव का अपमान सहन नहीं कर सकीं और वे यज्ञ की जलती हुई अग्नि कुंड में कूद गईं। जब शिव को इस बात का पता चला तो वे क्रोधित हो गए और अपने सिर से एक जटा उखाड़कर पर्वत पर फेंक दी।

शिव की इस जटा के अग्र भाग से उनके प्रथम अवतार वीरभद्र प्रकट हुए, जो अत्यंत भयंकर थे। शिव के वीरभद्र अवतार ने न केवल दक्ष के यज्ञ का विध्वंस किया बल्कि दक्ष का सिर काटकर शिव के सामने रख दिया। लेकिन ऋषियों और देवताओं के अनुरोध के बाद शिव ने राजा दक्ष के सिर पर बकरे का सिर लगाकर उन्हें जीवनदान दिया। शिव से उत्पन्न होने के कारण वीरभद्र को शिव का अवतार माना जाता है। बाद में शिव ने वीरभद्र को अपने अनुयायियों में शामिल कर लिया। भैरव और नंदी भगवान शिव के प्रमुख अनुयायी माने जाते हैं।

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