facebook pixel
विज्ञापन
Home  mythology  kuber dev who made kuber dev god of wealth know mythological story behind it

Kuber Dev: कुबेर देव को किसने बनाया धन के देवता, जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Dhan ke Devata Kuber: हिंदू धर्म में कुबेर देव की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जो लोग कुबेर देव की पूजा करते हैं उनके जीवन में कभी भी आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता है।

Kuber Dev
Dhan ke Devata Kuber: हिंदू धर्म में कुबेर देव की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जो लोग कुबेर देव की पूजा करते हैं उनके जीवन में कभी भी आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता है। पुराणों के अनुसार कुबेर का जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था, तो सवाल उठता है कि वे धन के देवता कैसे बने?

कौन हैं धन के देवता कुबेर?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धन के देवता कुबेर ऋषि विश्रवा के पुत्र और लंका के राजा रावण के सौतेले भाई हैं। विश्रवा के पुत्र होने के कारण कुबेर को वैश्रवण भी कहा जाता है। मान्यता है कि कुबेर देव घर की उत्तर दिशा में निवास करते हैं और उन्हें भगवान शिव का परम भक्त और नौ निधियों का देवता माना जाता है। कुबेर देव को धन का देवता बनाने के पीछे पुराणों में कई कथाएं प्रचलित हैं। कुछ कथाओं के अनुसार वे अपने पिछले जन्म में चोर थे। इस तरह वे धन के देवता बन गए

पौराणिक कथाओं के अनुसार कुबेर महाराज पूर्वजन्म में गुणनिध नामक ब्राह्मण थे। बचपन में उन्होंने कुछ दिनों तक धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया, लेकिन बाद में वे बुरी संगत में पड़ गए और जुआ खेलने लगे। धीरे-धीरे वे चोरी और अन्य गलत काम भी करने लगे। जब उनके पिता को इस बारे में पता चला तो उन्होंने उन्हें घर से निकाल दिया। 

बेघर होने के बाद वे भटकते हुए एक शिव मंदिर में पहुंचे और वहां प्रसाद चुराने की योजना बनाई। मंदिर में एक पुजारी सो रहा था। उससे बचने के लिए गुणनिध ने दीपक पर तौलिया फैला दिया, लेकिन पुजारी ने फिर भी उन्हें चोरी करते हुए पकड़ लिया और इस हाथापाई में गुणनिध की मृत्यु हो गई।

भगवान शिव ने दिया वरदान

मृत्यु के बाद जब यमदूत गुणनिध को लेकर आ रहे थे, तो दूसरी ओर से भगवान शिव के दूत भी आ रहे थे। भगवान शिव के दूतों ने गुणनिध को भोलेनाथ के सामने पेश किया। तब भगवान शिव को लगा कि गुणनिध ने तौलिया बिछाकर उनके लिए जल रहे दीपक को बुझने से बचा लिया है। इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गुणनिध को कुबेर की उपाधि दी और देवताओं के धन का कोषाध्यक्ष बनने का आशीर्वाद भी दिया।

यह भी पढ़ें- Panchbali Kya Hai: पंचबलि का क्या है महत्व, जानें इस दौरान किन 5 जगहों पर निकाला जाता है पितरों का खाना

यह भी पढ़ें- Mandir Ke Niyam: मंदिर जाएं तो भूलकर भी ना करें ये गलतियां,जीवन में आ सकती है परेशानियां

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel