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Lord Krishna: श्रीकृष्ण ने कैसे किया राक्षस तृणावर्त का वध? पौराणिक कथा से जानें रहस्य

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Lord Krishna: श्रीकृष्ण के जन्म के बाद से ही मथुरा का राजा कंस भय में रहने लगा था। आकाशवाणी में उसे बताया गया था कि देवकी का आठवां पुत्र ही उसका वध करेगा। 

Lord Krishna
Lord Krishna: श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन जब भी आता है, उसमें उनके द्वारा किए गए असुरों के वध की कथाएं विशेष रूप से सुनाई जाती हैं। गोकुल में बाल रूप में रहते हुए श्रीकृष्ण ने कई ऐसे राक्षसों का अंत किया, जिन्हें कंस ने उनका वध करने के लिए भेजा था। इन्हीं में एक नाम तृणावर्त का है। तृणावर्त कोई साधारण राक्षस नहीं था। वह भयंकर बवंडर का रूप धारण कर सकता था और अपनी इसी शक्ति के बल पर उसने एक दिन पूरे गोकुल में ऐसा तूफान खड़ा कर दिया कि चारों ओर धूल ही धूल दिखाई देने लगी।

पौराणिक कथा के अनुसार, उस समय श्रीकृष्ण अभी बाल अवस्था में थे और माता यशोदा उनकी देखभाल कर रही थीं। तृणावर्त ने अवसर देखकर बाल कृष्ण को अपने साथ ले जाने की योजना बनाई। लेकिन जिस बालक को वह अपनी शक्ति के बल पर आकाश में उठाकर ले गया था, वही आगे चलकर उसके लिए मृत्यु का कारण बना। आइए जानते हैं तृणावर्त के वध की पूरी पौराणिक कथा...

कंस ने तृणावर्त को भेजा था गोकुल

श्रीकृष्ण के जन्म के बाद से ही मथुरा का राजा कंस भय में रहने लगा था। आकाशवाणी में उसे बताया गया था कि देवकी का आठवां पुत्र ही उसका वध करेगा। इसी भय के कारण कंस लगातार श्रीकृष्ण को मारने के लिए अलग-अलग राक्षसों को गोकुल भेजता था। पूतना के बाद कंस ने तृणावर्त को भी श्रीकृष्ण का वध करने के लिए भेजा। तृणावर्त को अपनी असाधारण मायावी शक्तियों पर बहुत अहंकार था। वह अपनी इच्छा के अनुसार भयंकर बवंडर का रूप धारण कर सकता था। उसकी गति इतनी तेज थी कि उसके सामने आने वाली धूल और वस्तुएं आकाश में उड़ने लगती थीं।

 

krishna  janmashtami

तृणावर्त ने बवंडर का रूप धारण किया

एक दिन गोकुल में बाल कृष्ण माता यशोदा की गोद में थे। कथा के अनुसार, उसी समय तृणावर्त ने अपनी मायावी शक्ति का प्रयोग किया। उसने देखते ही देखते भयंकर बवंडर का रूप धारण कर लिया। गोकुल में अचानक तेज आंधी चलने लगी। देखते ही देखते धूल का ऐसा गुबार उठ गया कि लोगों को कुछ भी दिखाई देना बंद हो गया। घरों के आसपास की वस्तुएं हवा में उड़ने लगीं और पूरा गोकुल अंधकार जैसा दिखाई देने लगा। माता यशोदा को भी कुछ समझ नहीं आया। तेज हवा और धूल के कारण उनकी आंखों के सामने सब कुछ धुंधला हो गया। इसी अवसर का लाभ उठाकर तृणावर्त बाल कृष्ण को अपने साथ लेकर आकाश की ओर उड़ गया।

माता यशोदा की गोद से बाल कृष्ण को ले गया राक्षस

तृणावर्त जब श्रीकृष्ण को लेकर आकाश की ओर बढ़ा, तब गोकुल में किसी को भी यह पता नहीं चल सका कि बाल कृष्ण कहां चले गए। माता यशोदा अपने पुत्र को न देखकर व्याकुल हो उठीं। वह कृष्ण को पुकारने लगीं और उन्हें खोजने लगीं। गोकुल की अन्य महिलाएं भी उनके पास पहुंच गईं। लेकिन चारों ओर धूल और तेज हवा के कारण किसी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। दूसरी ओर तृणावर्त बाल कृष्ण को लेकर बहुत ऊंचाई तक पहुंच चुका था। उसे विश्वास था कि अब वह आसानी से बालक का वध कर देगा, लेकिन उसे यह पता नहीं था कि जिसे वह एक साधारण बालक समझकर अपने साथ ले जा रहा है, वही भगवान श्रीकृष्ण हैं।

 

krishna  janmashtami

आकाश में पहुंचते ही भारी हो गए बाल कृष्ण

तृणावर्त बाल कृष्ण को लेकर जैसे-जैसे ऊपर उठता गया, श्रीकृष्ण का शरीर अचानक भारी होने लगा। तृणावर्त ने पहले इसे सामान्य बात समझा, लेकिन कुछ ही क्षणों में उसे महसूस हुआ कि बालक का भार लगातार बढ़ता जा रहा है । राक्षस ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी, लेकिन बाल कृष्ण का भार कम नहीं हुआ। वह उन्हें लेकर आगे नहीं बढ़ पा रहा था। पौराणिक कथा के अनुसार, तृणावर्त के लिए यह स्थिति बेहद आश्चर्यजनक थी। जिस बालक को वह आसानी से उठाकर आकाश में ले आया था, अब वही उसके लिए इतना भारी हो गया कि वह उसे संभाल नहीं पा रहा था।

श्रीकृष्ण ने तृणावर्त का गला पकड़ लिया

जब तृणावर्त अपनी शक्ति खोने लगा, तब बाल कृष्ण ने उसके गले को अपनी भुजाओं से पकड़ लिया। भगवान श्रीकृष्ण की पकड़ इतनी मजबूत थी कि तृणावर्त के लिए सांस लेना कठिन हो गया। तृणावर्त ने श्रीकृष्ण को अपने शरीर से अलग करने का प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। वह तेजी से नीचे गिरने लगा। उसकी आंखें बाहर निकलने लगीं और उसका शरीर श्रीकृष्ण के भार तथा उनकी पकड़ के कारण असहाय हो गया। आखिरकार तृणावर्त की सांस रुक गई और उसका विशाल शरीर आकाश से नीचे गिर पड़ा। वह एक बड़ी चट्टान पर जा गिरा और उसका प्राणांत हो गया। तृणावर्त का विशाल शरीर देखकर चौंक गए।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

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