Lord Krishna: माखन चोरी की सबसे प्रसिद्ध कथाओं में एक कथा माता यशोदा और बाल कृष्ण से जुड़ी है। एक दिन यशोदा मैया ने कृष्ण को माखन खाते हुए देख लिया। उन्होंने कान्हा को पकड़ लिया और डांटने लगीं।
Lord Krishna: भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का जिक्र आते ही माखन चोरी की कथा जरूर याद आती है। गोकुल की गलियों में बाल गोपाल का अपने सखाओं के साथ घूमना, घरों में जाकर माखन चुराना और पकड़े जाने पर भोली-सी बातें बनाना, श्रीकृष्ण की सबसे प्रिय लीलाओं में गिनी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण को माखन इतना प्रिय था कि वह अपने सखाओं के साथ मिलकर घरों से माखन चुरा लिया करते थे, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बाल गोपाल को माखन ही सबसे ज्यादा क्यों पसंद था? माखन चोरी के पीछे कौन सी पौराणिक कथा जुड़ी है और गोकुल की गोपियां श्रीकृष्ण की इस लीला से परेशान होने के बाद भी उनसे इतना प्रेम क्यों करती थीं? आइए जानते हैं।
माखन से जुड़ा था बाल गोपाल का प्रेम
पौराणिक कथाओं के अनुसार, बाल्यकाल में भगवान श्रीकृष्ण का अधिकांश समय गोकुल और वृंदावन में बीता। यहां नंद बाबा के घर सहित आसपास के घरों में गायों का पालन किया जाता था। दूध, दही और माखन वहां के खान-पान का प्रमुख हिस्सा थे। माता यशोदा भी घर में गायों के दूध से दही जमातीं और उसे मथकर माखन निकालती थीं। बाल कृष्ण को माखन बहुत पसंद था। वह अक्सर अपनी मां से माखन मांगकर खाते थे, लेकिन कई बार ऐसा भी होता था कि वह चुपके से माखन की मटकी तक पहुंच जाते और अपने सखाओं के साथ मिलकर माखन निकाल लेते।
क्यों करते थे माखन चोरी
श्रीकृष्ण की माखन चोरी की कथा केवल उनके नटखट बाल स्वरूप से जुड़ी लीला के रूप में बताई जाती है। मान्यता है कि गोकुल की गोपियां अपने घरों में माखन मटकी में ऊंचाई पर रखती थीं, ताकि बाल कृष्ण वहां तक आसानी से न पहुंच सकें, लेकिन कान्हा भी कम शरारती नहीं थे। वह अपने सखाओं के साथ मिलकर एक-दूसरे के कंधों पर चढ़ते और ऊंचाई पर रखी मटकी तक पहुंच जाते। इसके बाद माखन निकालकर खुद खाते और अपने साथियों को भी खिलाते। कई कथाओं में वर्णन मिलता है कि श्रीकृष्ण माखन खाने के साथ-साथ बंदरों को भी खिलाते थे। उनकी इस बाल लीला से गोकुल की गोपियां कभी नाराज होतीं तो कभी कान्हा की भोली शरारत देखकर मुस्कुराने लगतीं।
गोपियां यशोदा से करती थीं शिकायत
बाल कृष्ण की माखन चोरी से परेशान होकर गोकुल की गोपियां अक्सर माता यशोदा के पास शिकायत लेकर पहुंचती थीं। वे कहती थीं कि कृष्ण उनके घर आते हैं और माखन चुराकर खा जाते हैं। माता यशोदा जब कृष्ण से पूछतीं कि उन्होंने माखन चुराया है या नहीं, तो बाल कृष्ण मासूमियत से इनकार कर देते। उनकी भोली बातें सुनकर यशोदा मैया भी कई बार उन्हें डांट नहीं पाती थीं। कृष्ण की यही नटखट अदाएं गोकुलवासियों के बीच उनकी लोकप्रियता का कारण थीं। गोपियां शिकायत तो करती थीं, लेकिन उनके मन में बाल गोपाल के लिए गहरा स्नेह भी था।
मटकी फोड़ने की भी थी लीला
श्रीकृष्ण की माखन चोरी से जुड़ी कथाओं में मटकी फोड़ने का भी विशेष वर्णन मिलता है। जब गोपियां माखन को ऊंचाई पर लटका देती थीं, तब कृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर उसे निकालने का उपाय खोजते थे। कई बार वह मटकी तक पहुंचने के लिए मानव पिरामिड बनाते और मटकी फोड़कर उसमें रखा माखन निकाल लेते। यही लीला आगे चलकर जन्माष्टमी के अवसर पर होने वाली दही-हांडी परंपरा से भी जोड़ी जाती है।
यशोदा मैया ने भी कान्हा को पकड़ा था
माखन चोरी की सबसे प्रसिद्ध कथाओं में एक कथा माता यशोदा और बाल कृष्ण से जुड़ी है। एक दिन यशोदा मैया ने कृष्ण को माखन खाते हुए देख लिया। उन्होंने कान्हा को पकड़ लिया और डांटने लगीं। कृष्ण ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने माखन नहीं खाया। लेकिन यशोदा मैया ने जब उनके मुंह में माखन देखा तो उन्हें समझ आ गया कि कान्हा फिर से शरारत कर रहे थे। श्रीकृष्ण की ऐसी बाल लीलाओं का वर्णन धार्मिक कथाओं में बड़े प्रेम से किया गया है। इसी वजह से भगवान का बाल स्वरूप भक्तों के बीच बाल गोपाल के नाम से विशेष रूप से प्रिय माना जाता है।
माखन ही क्यों था श्रीकृष्ण को प्रिय
धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीकृष्ण को माखन इसलिए प्रिय था, क्योंकि यह दूध से तैयार होने वाला शुद्ध और सात्त्विक आहार माना जाता था। गोकुल में गायों के दूध से दही और फिर उसे मथकर माखन निकाला जाता था। श्रीकृष्ण के जीवन और बाल लीलाओं में गायों, दूध, दही और माखन का विशेष संबंध दिखाई देता है। यही कारण है कि भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का जिक्र होते ही माखन की मटकी और माखन खाते हुए कान्हा का स्वरूप भक्तों के मन में उभर आता है।
माखन चोर कहलाए कान्हा
माखन चोरी की इन्हीं बाल लीलाओं के कारण भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम से ‘माखन चोर’ और ‘माखन चुराने वाले नंदलाल’ जैसे नामों से भी पुकारा जाता है। धार्मिक कथाओं में उनका यह स्वरूप बेहद मनमोहक माना गया है। गोकुल की गोपियों के घर से माखन चुराने वाले कान्हा की शरारतों की कथाएं आज भी भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जन्माष्टमी और अन्य कृष्ण उत्सवों के दौरान माखन-मिश्री का भोग लगाने की परंपरा भी इसी प्रेम और श्रद्धा से जुड़ी हुई मानी जाती है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)