Krishna Janmashtami: जन्माष्टमी की पूजा के लिए घर के पूजा स्थान को साफ करके वहां भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की प्रतिमा या लड्डू गोपाल को स्थापित करें। भगवान के लिए एक साफ चौकी पर पीले या लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।
Krishna Janmashtami: समय बाल गोपाल का अभिषेक कर आरती उतारते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जन्माष्टमी पर विधि-विधान से भगवान कृष्ण की पूजा करने और उनका स्मरण करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है। लेकिन क्या आपको पता है कि जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण की पूजा किस विधि से करनी चाहिए और किन चीजों को पूजा में शामिल करना शुभ माना जाता है? आइए जानते हैं।
जन्माष्टमी पर रखें व्रत
जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के भक्त व्रत रखते हैं। सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। व्रत रखने वाले लोग अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। धार्मिक परंपरा में जन्माष्टमी का व्रत भगवान कृष्ण को समर्पित माना गया है। पूरे दिन भगवान कृष्ण का नाम स्मरण करें और उनके बाल स्वरूप की पूजा की तैयारी करें। इस दिन घर में भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़े भजन और मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
पूजा की जगह करें तैयार
जन्माष्टमी की पूजा के लिए घर के पूजा स्थान को साफ करके वहां भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की प्रतिमा या लड्डू गोपाल को स्थापित करें। भगवान के लिए एक साफ चौकी पर पीले या लाल रंग का वस्त्र बिछाएं। इसके बाद चौकी पर भगवान कृष्ण को विराजमान करें। पूजा में रोली, अक्षत, चंदन, फूल, तुलसी दल, धूप, दीप, माखन-मिश्री, फल और मिठाई जैसी सामग्री रखें। भगवान कृष्ण को तुलसी बेहद प्रिय मानी जाती है, इसलिए भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें।
इस विधि से करें पूजा
रात में भगवान कृष्ण के जन्म का समय होने पर सबसे पहले दीपक जलाएं और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें। इसके बाद भगवान का पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का प्रयोग किया जाता है। पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान को स्वच्छ जल से स्नान कराएं। फिर उन्हें साफ वस्त्र पहनाएं और उनका श्रृंगार करें। बाल गोपाल को मुकुट, मोरपंख, बांसुरी और आभूषणों से सजाना शुभ माना जाता है। श्रृंगार के बाद भगवान को चंदन और रोली का तिलक लगाएं। उन्हें फूल और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान कृष्ण की पूजा करें।
माखन-मिश्री का लगाएं भोग
भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री बहुत प्रिय मानी जाती है। जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग जरूर लगाएं। इसके अलावा दूध, दही, मिठाई, फल और अन्य सात्विक पकवान भी अर्पित किए जा सकते हैं। भोग लगाते समय भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें और अपनी मनोकामना उनके सामने रखें। धार्मिक मान्यता के अनुसार सच्चे मन से भगवान को भोग अर्पित करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।
आधी रात करें जन्म आरती
धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की मुख्य पूजा रात 12 बजे के आसपास की जाती है। भगवान के जन्म के समय शंख और घंटी बजाएं। इसके बाद भगवान कृष्ण की आरती करें। घर के सभी सदस्य मिलकर श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं और उनके जयकारे लगाएं।
पढ़ें श्रीकृष्ण की कथा
जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण के जन्म की कथा पढ़ना और सुनना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। कथा में भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा में जन्म लेने, वासुदेव जी द्वारा उन्हें गोकुल पहुंचाने और नंद बाबा के घर उनके पालन-पोषण से जुड़ी घटनाओं का वर्णन किया जाता है। कथा का पाठ करने के बाद भगवान कृष्ण के मंत्रों का जाप करें और फिर प्रसाद सभी भक्तों में वितरित करें।
तुलसी दल जरूर करें अर्पित
भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए भगवान को भोग लगाते समय माखन-मिश्री और अन्य प्रसाद के साथ तुलसी दल अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी भगवान कृष्ण को अत्यंत प्रिय है। इसलिए जन्माष्टमी की पूजा में तुलसी का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है।
इस तरह मांगें भगवान से आशीर्वाद
पूजा और आरती के बाद भगवान श्रीकृष्ण के सामने हाथ जोड़कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें। भगवान से घर-परिवार के कष्ट दूर करने और जीवन में सुख बनाए रखने की कामना करें। इसके बाद भगवान को अर्पित किया गया प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों में बांटें। जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले भक्त धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा और जन्मोत्सव के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)