Krishna Janmashtami: श्रीकृष्ण का बाल रूप जितना मनमोहक माना जाता है, उतनी ही प्रसिद्ध हैं उनकी बाल लीलाएं। भगवान कृष्ण के बाल रूप का स्मरण होते ही मुरली, मोरपंख और माखन की मटकी की तस्वीर मन में उभर आती है। ब्रज की गलियों में गोपियों के घर जाकर माखन चुराना और फिर अपने सखाओं के साथ उसे खाना श्रीकृष्ण की सबसे प्रिय बाल लीलाओं में गिना जाता है। जन्माष्टमी के अवसर पर जब भक्त बाल गोपाल की पूजा करते हैं, तब उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाने की परंपरा भी इसी कथा से जुड़ी मानी जाती है, लेकिन आखिर श्रीकृष्ण को माखन इतना प्रिय क्यों था? वह गोपियों के घरों से माखन क्यों चुराते थे और उनकी इस लीला से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है? आइए जानते हैं बाल गोपाल की माखन चोरी की प्रसिद्ध कथा...
गोकुल में माखन चोरी करते थे बाल गोपाल
श्रीकृष्ण का बचपन गोकुल और बाद में वृंदावन की गलियों में बीता। नंद बाबा के घर में उनका पालन-पोषण हुआ। माता यशोदा उन्हें बहुत प्रेम करती थीं और बाल कृष्ण की हर शरारत पर कभी उन्हें डांटतीं तो कभी हंसकर उनकी बात टाल देतीं। बाल कृष्ण को दूध, दही और माखन बहुत पसंद था। माता यशोदा घर में माखन निकालकर उसे सुरक्षित रखती थीं, लेकिन कृष्ण अपनी बाल सुलभ चंचलता के कारण किसी न किसी तरह माखन तक पहुंच ही जाते थे।
कई बार वह अकेले माखन खाते और कई बार अपने सखाओं को भी साथ लेकर गोपियों के घर पहुंच जाते। धीरे-धीरे कृष्ण की माखन चोरी की चर्चा पूरे गोकुल में होने लगी। जिन घरों में गोपियां माखन तैयार करके रखती थीं, वहां कृष्ण और उनके सखा किसी न किसी बहाने पहुंच जाते। माखन की मटकी यदि ऊंचाई पर टंगी होती तो कृष्ण अपने सखाओं की मदद से वहां तक पहुंचते और माखन निकालकर खा लेते।
माखन की मटकी तक ऐसे पहुंचते थे कृष्ण
कृष्ण की माखन चोरी की एक प्रसिद्ध लीला में बताया जाता है कि गोपियां माखन की मटकियां घर की छत या ऊंची जगह पर टांगकर रखती थीं, ताकि बाल कृष्ण वहां तक न पहुंच सकें, लेकिन कृष्ण भी कहां मानने वाले थे। वह अपने सखाओं को एकत्र करते और सभी मिलकर एक-दूसरे के ऊपर चढ़ जाते। सबसे ऊपर कृष्ण पहुंचते और मटकी से माखन निकाल लेते। इसके बाद वह खुद भी माखन खाते और अपने मित्रों को भी खिलाते।
कभी-कभी कृष्ण मटकी फोड़ देते और पूरा माखन नीचे गिर जाता। गोपियां जब तक वहां पहुंचतीं, तब तक कृष्ण और उनके सखा वहां से भाग चुके होते। यही कारण था कि गोकुल की गोपियां कृष्ण की शिकायत लेकर माता यशोदा के पास पहुंचती थीं। गोपियों की शिकायत सुनकर यशोदा मैया कृष्ण को समझाती थीं। लेकिन कृष्ण अपनी मासूमियत से ऐसा उत्तर देते कि यशोदा भी मुस्कुराने लगतीं। कई बार वह माखन खाने से साफ इनकार कर देते और कहते कि उन्होंने माखन नहीं खाया।
कृष्ण की माखन चोरी से परेशान थीं गोपियां
भागवत और कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी परंपराओं में गोपियों की माखन चोरी की शिकायतों का वर्णन मिलता है। गोपियां कहती थीं कि नंदलाल उनके घर आते हैं, माखन खाते हैं और अपने सखाओं को भी खिलाते हैं। इतना ही नहीं, कई बार वह माखन की मटकी तोड़कर वहां से चले जाते हैं। गोपियां कृष्ण की इन शरारतों से परेशान तो होती थीं, लेकिन उनके मन में कृष्ण के प्रति स्नेह भी था, इसलिए उनकी शिकायतों में भी बाल कृष्ण के प्रति अपनापन दिखाई देता था। कृष्ण के माखन चोरी करने की खबर जब माता यशोदा तक पहुंचती तो वह उन्हें पकड़कर पूछतीं कि आखिर वह दूसरे के घरों में माखन खाने क्यों जाते हैं। बाल कृष्ण कभी कोई बहाना बनाते तो कभी अपनी भोली बातें करके माता को मना लेते।
क्यों प्रिय था श्रीकृष्ण को माखन?
पौराणिक मान्यताओं में माखन को श्रीकृष्ण के प्रिय भोगों में माना गया है। माखन दूध और दही से तैयार किया जाता था और ब्रज में गोपियों के घरों में इसे विशेष रूप से बनाया जाता था। श्रीकृष्ण को ताजा माखन और उससे बने पदार्थ बहुत पसंद थे। बाल कृष्ण की माखन चोरी की लीला केवल नंद भवन तक सीमित नहीं थी। ब्रज की गोपियों के घरों में जाकर माखन खाना उनकी प्रसिद्ध बाल लीलाओं का हिस्सा बन गया। इसी कारण भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को ‘माखन चोर’ और ‘माखनचोर नंदलाल’ जैसे नामों से भी पुकारा जाता है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)