Krishna Janmashtami: जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी कथा के साथ उनके जीवन की कई महत्वपूर्ण घटनाओं का भी वर्णन किया जाता है। इनमें मथुरा की रंगभूमि में हुआ कंस वध सबसे प्रमुख प्रसंगों में से एक है। जिस कंस से मथुरा की प्रजा भयभीत थी, उसी कंस का अंत उसके भांजे श्रीकृष्ण के हाथों हुआ था। श्रीकृष्ण ने कंस के अत्याचारों का अंत करने के लिए मथुरा पहुंचकर पहले उसके पहलवानों का सामना किया और फिर रंगभूमि में अपने मामा कंस से युद्ध किया। आखिर उस दिन रंगभूमि में क्या हुआ था और श्रीकृष्ण ने कंस का वध किस प्रकार किया था? आइए जानते हैं इस पूरी पौराणिक कथा के बारे में...
कंस की मृत्यु की भविष्यवाणी
पौराणिक कथा के अनुसार मथुरा के राजा कंस को आकाशवाणी के जरिए पता चला था कि उसकी बहन देवकी का आठवां पुत्र ही उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। इस भविष्यवाणी के बाद कंस ने देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में डाल दिया था। देवकी की संतानों में से कई का कंस ने जन्म लेते ही वध कर दिया।
जब देवकी के आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब वसुदेव उन्हें कंस से बचाकर गोकुल ले गए और वहां नंद बाबा के घर उनका पालन-पोषण हुआ। श्रीकृष्ण के बड़े होने के साथ ही कंस को उनके जीवित होने की जानकारी होती गई। उसने कई असुरों को श्रीकृष्ण का वध करने के लिए भेजा, लेकिन श्रीकृष्ण ने एक-एक करके उनका अंत कर दिया।
अक्रूर के साथ श्रीकृष्ण और बलराम पहुंचे मथुरा
जब कंस को यह विश्वास हो गया कि श्रीकृष्ण और बलराम ही उसके लिए सबसे बड़ा खतरा हैं, तब उसने एक योजना बनाई। उसने अपने संबंधी अक्रूर को गोकुल भेजकर श्रीकृष्ण और बलराम को मथुरा बुलाने का आदेश दिया। कंस ने बहाना बनाया कि मथुरा में धनुष यज्ञ और एक विशाल उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। अक्रूर श्रीकृष्ण और बलराम को लेकर मथुरा पहुंचे। मथुरा आने के बाद श्रीकृष्ण ने वहां कंस के अत्याचारों से परेशान लोगों की स्थिति देखी। इसी दौरान उन्होंने कंस के धनुष को तोड़ दिया और कंस के कई सैनिकों को भी पराजित किया।
कंस ने रंगभूमि में कराया मल्लयुद्ध का आयोजन
कंस ने श्रीकृष्ण और बलराम को मारने के लिए रंगभूमि में मल्लयुद्ध का आयोजन कराया। इसके लिए उसने अपने सबसे शक्तिशाली पहलवान चाणूर और मुष्टिक को तैयार किया था। कंस की योजना थी कि श्रीकृष्ण और बलराम को मल्लयुद्ध में हराकर उनका अंत कर दिया जाए। रंगभूमि में मथुरा की प्रजा के साथ कंस के दरबारी और बड़े-बड़े योद्धा भी मौजूद थे। कंस ऊंचे आसन पर बैठा हुआ था और पूरे आयोजन पर नजर रख रहा था। दूसरी ओर श्रीकृष्ण और बलराम रंगभूमि में प्रवेश कर चुके थे।
चाणूर ने श्रीकृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा
रंगभूमि में प्रवेश करने के बाद विशालकाय पहलवान चाणूर ने श्रीकृष्ण को मल्लयुद्ध के लिए चुनौती दी। मुष्टिक ने बलराम को युद्ध के लिए ललकारा। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच भयंकर मल्लयुद्ध शुरू हुआ। चाणूर श्रीकृष्ण की तुलना में काफी बलवान और विशाल शरीर वाला था। उसने श्रीकृष्ण को पकड़ने और अपनी शक्ति से परास्त करने का प्रयास किया। लेकिन श्रीकृष्ण ने उसकी हर चाल का सामना किया। दोनों के बीच लंबे समय तक युद्ध चलता रहा। इसी प्रकार बलराम और मुष्टिक के बीच भी भीषण मल्लयुद्ध हुआ। बलराम ने अपनी शक्ति से मुष्टिक को पराजित कर दिया। अंत में श्रीकृष्ण ने चाणूर को भी युद्ध में मार गिराया। चाणूर और मुष्टिक के मारे जाने के बाद कंस की योजना विफल होने लगी।
कंस ने श्रीकृष्ण को मथुरा से निकालने का आदेश दिया
अपने पहलवानों के मारे जाने के बाद कंस क्रोधित हो उठा। उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि श्रीकृष्ण और बलराम को मथुरा से बाहर निकाल दिया जाए। साथ ही उसने नंद बाबा सहित व्रज से आए लोगों को बंदी बनाने और वसुदेव तथा देवकी को भी दंड देने का आदेश दिया। कंस के इन आदेशों के बाद श्रीकृष्ण ने देर नहीं की। वह सीधे उस स्थान की ओर बढ़े जहां कंस बैठा हुआ था। कंस ने जब श्रीकृष्ण को अपनी ओर आते देखा तो वह स्वयं भी युद्ध के लिए तैयार हो गया।
रंगभूमि में हुआ श्रीकृष्ण और कंस का अंतिम युद्ध
कंस और श्रीकृष्ण आमने-सामने आ गए। कंस ने श्रीकृष्ण पर प्रहार करने का प्रयास किया, लेकिन श्रीकृष्ण ने उसकी शक्ति का सामना किया। दोनों के बीच युद्ध शुरू हो गया। कंस ने श्रीकृष्ण को पकड़ने और उन्हें परास्त करने की पूरी कोशिश की, लेकिन श्रीकृष्ण ने उसे कोई अवसर नहीं दिया। श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने युद्ध के दौरान कंस को पकड़ लिया। इसके बाद उन्होंने उसे बलपूर्वक रंगभूमि में पटक दिया। श्रीकृष्ण ने कंस को बार-बार उठने का अवसर नहीं दिया और अंततः उसका वध कर दिया। कंस के वध के साथ ही मथुरा पर उसका अत्याचारी शासन समाप्त हो गया। जिस रंगभूमि में कंस ने श्रीकृष्ण को मारने की योजना बनाई थी, उसी रंगभूमि में श्रीकृष्ण ने उसका अंत कर दिया।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)