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Naga Sadhu Lifestyle: कैसा होता है नागा साधुओं का जीवन, जानें पूजा-पाठ करने का तरीका

जीवांजलीPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Naga Sadhu Lifestyle: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन कल यानी 13 जनवरी 2025 से होने जा रहा है। महाकुंभ में तमाम अखाड़ों के साधु-संत नजर आने वाले हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ में तमाम तरह के साधु-संतों का दर्शन करना भी पुण्य फलदायी माना जाता है।

Naga Sadhu Lifestyle
Naga Sadhu Lifestyle: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन कल यानी 13 जनवरी 2025 से होने जा रहा है। महाकुंभ में तमाम अखाड़ों के साधु-संत नजर आने वाले हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ में तमाम तरह के साधु-संतों का दर्शन करना भी पुण्य फलदायी माना जाता है। महाकुंभ में इन साधु-संतों के अलावा नागा साधु भी रहेंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं नागा साधु की जीवन शैली क्या होती है। इसके साथ ही नागा साधु पूजा-पाठ कैसे करते हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

कैसा होता है नागा साधु का जीवनशैली

नागा साधु परंपरा अखाड़ों से निकली है। माना जाता है कि परंपरा का गुरू आदि शंकराचार्य को माना गया है। बता दें कि नागा साधु परंपरा को आठवीं शताब्दी के आस-पास का बताया जाता है। इस दौरान नागा साधु बनने की प्रक्रिया भी 12 सालों तक की होती है, जिसमें 6 सालों को काफी अहम माना गया है। बता दें कि नागा साधु बनने की प्रक्रिया में सबसे प्रथम नागा साधु बनने आए व्यक्ति को ब्रह्मचर्य की शिक्षा-दीक्षा दी जाती है। इसके साथ ही उसे महापुरुष की दीक्षा दी जाती है। उसके बाद उस व्यक्ति को यज्ञोपवीत किया जाता है। फिर उस व्यक्ति से पूरे परिवार और स्वयं का पिंडदान भी कराया जाता है। तब जाकर नागा साधु बनने की प्रक्रिया संपन्न होती हैं। नागा साधु हमेशा नग्न अवस्था में ही रहते हैं।

नागा साधु कैसे करते हैं पूजा पाठ

बता दें कि नागा साधु शस्त्र कला में निपुण होते हैं। ये लोग भगवान शिव के उपासक होते हैं, इसके साथ ही ये शैव पंरपरा से पूजा करते हैं। नागा साधु शिवलिंग पर भस्म, जल और बेलपत्र आदि अर्पित करते हैं। इसके साथ ही नागा साधुओं की पूजा में अग्नि और भस्म बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है। नागा साधु गहन ध्यान और योग में हमेशा लीन रहते हैं। ध्यान और योग के जरिए ही ये भगवान शिव में लीन होने की कोशिश करते हैं। नागा साधुओं का कार्य बाकि इंसानों और धर्म की रक्षा करने के लिए है। इनका जीवन हमेशा भिक्षा मांगकर अपना पेट पालन होता है। बता दें कि नागा साधु दिन में सिर्फ एक ही बार खाते हैं।

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