Mahakumbh 2025: प्रयागराज अपनी आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक धरोहर के साथ ही दुनिया के प्रत्येक कोने से श्रद्धालुओं का स्वागत करता है। प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन होने वाला है। ऐसे में महाकुंभ के अलावा प्रयागराज के 5 ऐतिहासिक जगहों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
Mahakumbh 2025: महाकुंभ का महापर्व अब 3 दिन बाद शुरू हो जाएगा और यह 26 फरवरी को समापन होगा। प्रयागराज अपनी आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक धरोहर के साथ ही दुनिया के प्रत्येक कोने से श्रद्धालुओं का स्वागत करता है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के साथ ही चारों ओर गूंजते मंत्रों के साथ ही प्रयागराज शहर एक अद्भुत दिव्य अनुभव का प्रतीक बन गया गया है।
लेकिन क्या आप जानते हैं धर्म और संस्कृति की भूमि पर महाकुंभ के अलावा कुछ ऐसी भी जगहें हैं, जो केवल तीर्थ ही नहीं बल्कि आपको कहानियों में भी सुनने को मिल जाते हैं। ये जगहें अपने इतिहास की, भक्ति की और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। तो आज इस खबर में जानेंगे कि महाकुंभ के अलावा और कौन-कौन से तीर्थ स्थानों पर जा सकते हैं।
त्रिवेणी संगम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर मात्र एक बार डुबकी लगाने से आत्मा का शुद्धिकरण हो जाता है। इसके साथ ही यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम स्थान भी है। त्रिवेणी संगम के पास स्नान करने से पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। बता दें कि त्रिवेणी संगम पर सूर्योदय के समय बढ़ती नावें, घंटों की गूंज और जलता हुआ दीपक का दृश्य एक जादुई जैसा अनुभव कराता है।
अक्षयवट
बता दें कि प्रयागराज में अक्षयवट का इतिहास काफी पुराना है। बता दें कि प्रयागराज किले के अंदर एक अक्षयवट का वृक्ष है। बता दें कि अक्षयवट एक ऐसा वटवृक्ष है जिसमें अमर माना गया है। मान्यता है कि इस वृक्ष के नीचे मृत्यु पाने वाले को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही भगवान का शरण भी मिलता है।
प्रयागराज में यह वृक्ष पातालपुरी मंदिर के अंदर स्थित है, जो यमुना नदी के किनारे और सरस्वती कूप के पास है। अक्षयवट का वृक्ष किला के अंदर होने से सेना के नियंत्रण में है लेकिन इस वृक्ष का दर्शन करने के लिए भक्तों और श्रद्धालुओं का उत्साह हमेशा देखने को मिलता है। यह कभी भी कम नहीं होता है।
लेटे हुए हनुमान जी
प्रयागराज में लेटे हुए हनुमान जी इलाहाबाद किले के पास स्थित है। लेटे हुए हनुमान जी को बड़े हनुमान जी के नाम से भी जानते हैं। बता दें कि यह हनुमान जी महाराज की विशाल और अद्वितीय लेटी हुई प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। बता दें कि प्रयागराज में लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा करीब 20 फीट लंबी है।
इस मंदिर को देखने के लिए भक्तों की भीड़ भी काफी लगती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी का यह मंदिर शहर को बाढ़ और अन्य तरह के आपदाओं से बचाता है। त्रिवेणी संगम के पास स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए काफी आकर्षक बना रहता है। इस मंदिर के आस-पास का वातावरण बहुत ही शांत रहता है। यह भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है।
आनंद भवन
प्रयागराज का यह ऐतिहासिक जगह जिसे आधुनिक भारत का गवाह के नाम से जाना जाता है। बता दें कि यह भवन भारत के स्वतंत्रता संग्राम की झलक देखने के लिए काफी मशहूर है। यह भवन पहले नेहरू परिवार का था लेकिन अब यह घर एक संग्रहालय है, जहां पर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े हुए सभी चित्र, वस्त्र और ऐतिहासिक दस्तावेजों को देखा जा सकता है। इस भवन के पास ही में स्थित स्वराज भवन भी है। स्वराज भवन में इंदिरा गांधी का जन्म हुआ था। इसलिए यह स्थान भी इतिहास प्रेमियों के लिए काफी खास है।
खुसरो बाग
प्रयागराज के ऐतिहासिक जगहों में एक खुसरो बाग भी शामिल है। यह शहर से बिल्कुल दूर एक शांतिपूर्ण मुगलकालीन बगीचा है। बता दें कि इस स्थान पर जहांगीर के पुत्र खुसरो और उनके परिवार की समाधियां हैं। बगीचे की खूबसूरत नक्काशी और हरियाली ही इसे इतिहास और प्रकृत प्रेमियों के लिए खास बनाती है।