Stampede at Mahakumbh: प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में मंगलवार रात एक बड़ा हादसा टल गया। महाकुंभ में मौनी अमावस्या के अमृत स्नान से पहले आधी रात को भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए।
Stampede at Mahakumbh: प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में मंगलवार रात एक बड़ा हादसा टल गया। महाकुंभ में मौनी अमावस्या के अमृत स्नान से पहले आधी रात को भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। उम्मीद है कि बुधवार को करीब 10 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर सकते हैं। ऐसे में रात जैसा कोई हादसा फिर न हो, इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मंगलवार यानी 28 फरवरी तक 16 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई।
भारत में होने वाले धार्मिक आयोजनों में भगदड़ की घटनाएं ज्यादातर होती हैं। पिछले साल जुलाई में हाथरस के सिकंदराराऊ में बाबा नारायण साकार हरि भोला के सत्संग में मची भगदड़ में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं थीं। हमारे देश में धार्मिक आयोजनों में भगदड़ के दौरान अक्सर बड़े पैमाने पर मौतें होती रही हैं। आखिर इसके क्या कारण हैं और ज्यादातर महिलाएं या बच्चे ही इसका शिकार क्यों बनते हैं।
भगदड़ के दौरान ज्यादा मौतें क्यों होती हैं?
अक्सर ये धार्मिक आयोजन या कार्यक्रम ऐसे स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं, जहां से निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता होता है और वह भी संकरा होता है। ज्यादातर धार्मिक उत्सव नदी किनारे, पहाड़ी इलाकों या पर्वत शिखरों जैसे इलाकों में मनाए जाते हैं। इन इलाकों में उचित सड़कें नहीं हैं, जिससे तीर्थयात्रियों के लिए जोखिम पैदा होता है।
किन-किन कारणों से होती है भगदड़
क्षमता से ज़्यादा भीड़ इकट्ठा होना
भीड़ को संभालने के लिए कोई नियंत्रण व्यवस्था नहीं होना
आयोजन स्थल का गलत चुनाव, जिससे निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता न हो
आयोजन स्थल का संकरा होना
आयोजन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव