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Mahakumbh Stampede : धार्मिक महोत्सव में क्यों होती है भगदड़, आखिर क्या है कारण

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Stampede at Mahakumbh: प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में मंगलवार रात एक बड़ा हादसा टल गया। महाकुंभ में मौनी अमावस्या के अमृत स्नान से पहले आधी रात को भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए।

Mahakumbh Stampede
Stampede at Mahakumbh: प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में मंगलवार रात एक बड़ा हादसा टल गया। महाकुंभ में मौनी अमावस्या के अमृत स्नान से पहले आधी रात को भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। उम्मीद है कि बुधवार को करीब 10 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर सकते हैं। ऐसे में रात जैसा कोई हादसा फिर न हो, इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मंगलवार यानी 28 फरवरी तक 16 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई।

भारत में होने वाले धार्मिक आयोजनों में भगदड़ की घटनाएं ज्यादातर होती हैं। पिछले साल जुलाई में हाथरस के सिकंदराराऊ में बाबा नारायण साकार हरि भोला के सत्संग में मची भगदड़ में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं थीं। हमारे देश में धार्मिक आयोजनों में भगदड़ के दौरान अक्सर बड़े पैमाने पर मौतें होती रही हैं। आखिर इसके क्या कारण हैं और ज्यादातर महिलाएं या बच्चे ही इसका शिकार क्यों बनते हैं।

भगदड़ के दौरान ज्यादा मौतें क्यों होती हैं? 

अक्सर ये धार्मिक आयोजन या कार्यक्रम ऐसे स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं, जहां से निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता होता है और वह भी संकरा होता है। ज्यादातर धार्मिक उत्सव नदी किनारे, पहाड़ी इलाकों या पर्वत शिखरों जैसे इलाकों में मनाए जाते हैं। इन इलाकों में उचित सड़कें नहीं हैं, जिससे तीर्थयात्रियों के लिए जोखिम पैदा होता है।

किन-किन कारणों से होती है भगदड़

क्षमता से ज़्यादा भीड़ इकट्ठा होना

भीड़ को संभालने के लिए कोई नियंत्रण व्यवस्था नहीं होना

आयोजन स्थल का गलत चुनाव, जिससे निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता न हो

आयोजन स्थल का संकरा होना

आयोजन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव

प्रबंधन की कमी इसके लिए है जिम्मेदार

आमतौर पर धार्मिक समारोहों और आयोजनों को मंजूरी तभी मिलती है, जब आयोजन स्थल पर निकास की उचित व्यवस्था हो। कई निकास द्वार होने चाहिए और हर निकास द्वार बड़ा और चौड़ा होना चाहिए। आमतौर पर धार्मिक आयोजनों के आयोजकों, आयोजन स्थल के मालिकों और राज्य प्रशासन को भीड़ की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता है, विशेषज्ञों का कहना है कि भीड़ प्रबंधन की उचित व्यवस्था न होने की वजह से ऐसी आपदाएं होती हैं।

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