Mahakumbh Naga Sadhu: प्रयागराज में महाकुंभ का आगाज हो चुका है। पहला शाही स्नान 14 जनवरी को संपन्न हो गया है। शाही स्नान में देश के अलग-अलग जगहों से नागा साधु स्नान करने के लिए आते हैं। नागा साधु सनातन धर्म की रक्षा के लिए होते हैं।
Mahakumbh Naga Sadhu: प्रयागराज में महाकुंभ का आगाज हो चुका है। पहला शाही स्नान 14 जनवरी को संपन्न हो गया है। शाही स्नान में देश के अलग-अलग जगहों से नागा साधु स्नान करने के लिए आते हैं। नागा साधु सनातन धर्म की रक्षा के लिए होते हैं। उनकी जीवनशैली बाकी साधुओं से बिल्कुल अलग होती है। इनका श्रृंगार बहुत ही विशेष होता है। तो आज इस खबर में जानेंगे कि नागा साधु कितने प्रकार से श्रृंगार करते हैं। इसके साथ ही जो श्रृंगार करते हैं उनमें क्या-क्या सामग्री का इस्तेमाल करते हैं, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
नागा साधुओं का क्या होता है
महाकुंभ 2025 में पहला शाही स्नान मकर संक्रांति पर हुआ है। शाही स्नान के दिन अनोखा नजारा देखने को मिला है। नागा साधु घोड़े पर सवार होकर पवित्र संगम तट की ओर निकले। नागा साधु पूरे शरीर में भस्म लगाए अलग-अलग रूपों में नागा साधु दिखाई दिए। नागा साधुओं का श्रृंगार काफी विशेष होता है। बता दें कि नागा सन्यासियों का शृंगार 17 तरह का होता है।
आइए जानें 17 तरह के कौन-कौन होते हैं श्रृंगार
नागा साधु अपने पूरे शरीर पर भभूत लगाते हैं। माथे और गले पर चंदन का लेप लगाते हैं। गले और बाजुओं में रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं। इसके बाद माथे पर तिलक भी लगाते हैं। नागा साधु आंखों में सूरमा लगाते हैं। हाथ, पैर और बाजू में कड़ा पहनते हैं। हाथ में चिमटा रखते हैं। नागा साधुओं के लिए चिमटा अस्त्र माना गया है। वहीं कुछ साधु अपने हाथों में डमरू भी रखते हैं। साथ ही कमंडल रखते हैं। नागा साधुओं की जटाएं बाकी लोगों के से एक दम अलग होती हैं। नागा साधु अपनी जटाओं को पांच बार लपेटकर पंचकेश श्रृंगार किया जाता है।
बता दें कि नागा साधु भगवा रंग के लंगोट धारण करते हैं। अंगुलियों में अंगूठी पहनते हैं। माथे पर रोली का लेप भी लगाते हैं। कानों में चांदी या सोने के बड़े-बड़े कुंडल पहनते हैं। कमर में माला भी धारण करते हैं। नागा साधुओं के एक श्रृंगार विश्व मंगल की कामना भी होता है। नागा साधुओं की वाणी भी उनका एक श्रृंगार माना गया है। यह भी पढ़ें- Mahakumbh 2025 : महाकुंभ में कब है अमृत स्नान, जानें शुभ तिथि, मुहूर्त व महत्व
यह भी पढ़ें- Mahakumbh 2025: पंचायती निरंजनी अखाड़े के 104 वर्षीय महामंडलेश्वर विद्याधर ने किया महाकुंभ में स्नान