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Mahakumbh 2025: पंचायती निरंजनी अखाड़े के 104 वर्षीय महामंडलेश्वर विद्याधर ने किया महाकुंभ में स्नान

जीवांजलीPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Mahakumbh 2025: बता दें कि पंचायती निरंजनी अखाड़े के साधु-संतों ने भी शाही स्नान कर लिया है। इस अखाड़े के महामंडलेश्वर विद्याधर हैं, जिन्होंने 104 साल की उम्र में संगम तक पहुंचकर शाही स्नान किया है।

Mahakumbh 2025
Mahakumbh 2025: प्रयागराज महाकुंभ का अमृत स्नान आज यानी मकर संक्रांति के दिन जारी है। महाकुंभ में शाही स्नान करने के लिए देश-विदेश से लाखों-करोड़ों श्रद्धालु आ चुके हैं। बता दें कि महाकुंभ में शाही स्नान करने के लिए देश के प्रमुख अखाड़े के साधु-संत भी शाही स्नान करने के लिए पवित्र संगम में पहुंचे। बता दें कि पंचायती निरंजनी अखाड़े के साधु-संतों ने भी शाही स्नान कर लिया है। इस अखाड़े के महामंडलेश्वर विद्याधर हैं, जिन्होंने 104 साल की उम्र में संगम तक पहुंचकर शाही स्नान किया है।

सबसे अधिक उम्र के हैं महामंडलेश्वर

माना जा रहा है कि महामंडलेश्वर विद्याधर सबसे अधिक उम्र के महामंडलेश्वर हैं, जिन्होंने प्रयागराज संगम तक पहुंचकर स्नान किया है। इतना ही नहीं महामंडलेश्वर जी आराम से बोलचाल भी की। महंत जी अपना हर काम कर रहे हैं। महामंडलेश्वर ने कहा कि भारतवर्ष विश्व भर का एक धर्म का केंद्र है। आज महाकुंभ एक ऐसा शुभ दिन हैं जहां त्रिवेणी मैया के पावन तट पर स्नान करने का मौका मिला है। यह पावन तट वेद की कर्म उपासना ज्ञान की प्रतीक है। इस स्थान पर हम सभी लोग ज्ञान, वेद, गीता सुनते हैं।

महामंडलेश्वर को याद है कई श्लोक

बता दें कि श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर विद्याधर को इस उम्र में भी श्रीमद्भागवत गीता और वेदों के कई श्लोक कंठस्थ हैं। जब महामंडलेश्वर से पूछा गया कि आप कब से संत बने हुए हैं तो उन्होंने कहा कि संत एक जन्म का नहीं होता है। इसके साथ ही उन्होंने श्लोक भी सुनाए। उन्होंने कहा कि हम बाल्यावस्था से ही संत हैं।

महामंडलेश्वर का क्या है संकल्प

जब श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर विद्याधर से पूछा गया कि आपका संकल्प क्या है तो उन्होंने कहा कि जो बाकी संतों का होता है वहीं मेरा भी है। वेद भगवान कहते हैं कि जो विशाल होते हैं, उसमें सुख होता है। आप महान कब बनते हैं, जब आप अपने घर की सेवा में आते हैं। चाहे घर से मोहल्ले, मोहल्ले से गांव, गांव से तहसील, या फिर राज्य से देश के बाद विश्व की प्राणियों की तन, धन, मन से निष्काम भाव से सेवा करते हैं। इन सभी का परिणाम त्याग ही आएगा।

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