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Mahakumbh 2025: महाकुंभ में क्या होता है अखाड़े का महत्व, जानें इसकी मान्यताएं

जीवांजलीPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Mahakumbh 2025: महाकुंभ में देश के प्रमुख अखाड़े के साधु-संत देखने को मिलेंगे। सभी अखाड़ों की अपनी अहम भूमिका होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं महाकुंभ में अखाड़े का महत्व क्या होता है और यह कितने तरह के होते हैं।

Mahakumbh 2025
Mahakumbh 2025: प्रयागराज में कल यानी 13 जनवरी से महाकुंभ का आयोजन होने वाला है। महाकुंभ में साधु-संतों के साथ ही कई अखाड़े के साधु-संत भी शामिल है। महाकुंभ में देश के प्रमुख अखाड़े के साधु-संत देखने को मिलेंगे। सभी अखाड़ों की अपनी अहम भूमिका होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं महाकुंभ में अखाड़े का महत्व क्या होता है और यह कितने तरह के होते हैं। अगर नहीं तो आज इस खबर में अखाड़ों के महत्व और उसके बारे में विस्तार से जानेंगे।

देश में कितने हैं प्रमुख अखाड़े


 
Mahakumbh 2025
बता दें कि पूरे देश भर में कुल अखाड़ों की संख्या 13 है। जिसमें से सभी अखाड़े उदासीन, शैव और वैष्णव पंथ के संन्यासियों के लिए माना गया है। इनमें से 7 अखाड़ों का संबंध शैव सन्यासी संप्रदाय से हैं और 3 अखाड़े बैरागी वैष्णव संप्रदाय से जुड़े हुए हैं। बाकी बचे हुए अखाड़े उदासीन संप्रदाय के 3 अखाड़े में आते हैं।

अखाड़े का क्या होता है प्रतीक

बता दें कि महाकुंभ में अखाड़े साधु-संत पवित्र नदी में स्नान के लिए जाते हैं। बता दें कि वैसे तो अखाड़े शब्द का इस्तेमाल पहलवानों की कुश्ती लड़ने वाली जगह से होता है, लेकिन महाकुंभ में अखाड़े साधु-संतों के निवास स्थान के नाम से जाना जाता है। अखाड़ों में लाखों साधु-संत रहते हैं। साधु-संत इन अखाड़ों को हिंदू धर्म में धार्मिकता और साधना का प्रतीक भी माना जाता है।

किसने बनाया था अखाड़ा

Mahakumbh 2025
धार्मिक और हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अखाड़े का निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए साधुओं के संगठन बनाए थे। बता दें कि आदि गुरु शंकराचार्य को शास्त्र विद्या का सबसे ज्यादा ज्ञान था। इन संगठनों को अखाड़े के नाम से भी जाना जाता है। देश के प्रमुख अखाड़ों का इतिहास काफी पुराना है।

महाकुंभ में अखाड़े का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ में शाही स्नान सबसे पहले अखाड़े के साधु करते हैं। इसके बाद ही अन्य लोग स्नान करते हैं। बता दें कि महाकुंभ में अखाड़े के साधु-संतों के बिना स्नान अधूरा माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो जातक महाकुंभ में शाही स्नान करते हैं उनके सारे पाप धुल जाते हैं, इसके साथ ही जीवन में हर तरह के संकटों से मुक्ति मिल जाती है। महाकुंभ में शाही स्नान करने का का खास महत्व होता है। महाकुंभ में स्नान करने से आत्मा को शांति भी मिलती है।

 

Mahakumbh 2025

महाकुंभ में शाही स्नान की तिथियां

Mahakumbh Mela 2025
13 जनवरी - स्नान, सोमवार, पौष पूर्णिमा
14 जनवरी - शाही स्नान, मंगलवार, मकर संक्रांति
29 जनवरी - शाही स्नान, बुधवार, मौनी अमावस्या
3 फरवरी - शाही स्नान, सोमवार, बसंत पंचमी
12 फरवरी - स्नान, माघी पूर्णिमा
26 फरवरी -  स्नान, महाशिवरात्रि

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