Mahakumbh 2025: प्रयागराज महाकुंभ में देश भर के प्रमुख 13 अखाड़े के साधु-संत, महंत और महामंडलेश्वर आए हुए हैं। अमृत स्नान के दिन देश-विदेश से लाखों-करोड़ों श्रद्धालु भी संगम में स्नान करने के लिए पहुंचे हैं।
Mahakumbh 2025: प्रयागराज महाकुंभ में देश भर के प्रमुख 13 अखाड़े के साधु-संत, महंत और महामंडलेश्वर आए हुए हैं। अमृत स्नान के दिन देश-विदेश से लाखों-करोड़ों श्रद्धालु भी संगम में स्नान करने के लिए पहुंचे हैं। सभी श्रद्धालु पवित्र संगम में आज भी डुबकी लगा रहे हैं। महाकुंभ में कई बड़े-बड़े साधु-संत भी पहुंचे हैं। जिसमें महाकुंभ में तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामाभद्राचार्य का शिविर भी लगा हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं, आखिर महाकुंभ में रामभद्राचार्य स्वामी जी का शिविर कहां लगा हुआ है। अगर नहीं तो आज इस खबर में रामभद्राचार्य जी महाराज के शिविर के बारे में जानेंगे। इसके साथ ही स्वामी जी के बारे में भी जानेंगे।
महाकुंभ में कहां है स्वामी रामभद्राचार्य का शिविर
महाकुंभ के सेक्टर 6 नागवासुकि मंदिर के पास तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज का शिविर लगा हुआ है। बता दें कि स्वामी रामभद्राचार्य जी के शिविर का मुख्य द्वार श्री राम मंदिर के मुख्य द्वार की तर्ज पर ही बनाया गया है। महाराज जी का शिविर देखने के लिए भक्तों की भीड़ भी लग रही है। बताया जा रहा है कि स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज का शिविर कोलकाता के कारीगरों द्वारा बनाया गया है।
कौन हैं स्वामी रामभद्राचार्य
स्वामी रामभद्राचार्य का नाम गिरिधर मिश्र है. मकर संक्रांति के दिन 14 जनवरी 1950 को उनका जन्म जौनपुर के सांडीखुर्द में हुआ था. उनके पिता का नाम पंडित राजदेव मिश्र और मां का नाम शची देवी मिश्र है. वो रामानंदी संप्रदाय से हैं. उनके गुरु पंडित ईश्वर दास महाराज (धर्म मंत्रोच्चार), राम प्रसाद त्रिपाठी संस्कृत और राम चरण दास रहे. उन्हें पद्म विभूषण और साहित्य अकादमी समेत कई पुरस्कार मिल चुके हैं. गंभीर बीमारी की वजह से उन्होंने दो महीने की उम्र में ही आंखों की रोशनी खो दी थी.
जानें कौन है स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज
स्वामी रामभद्राचार्य जी का वास्तविक नाम गिरिधर मिश्र है। बता दें कि स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज का जन्म 14 जनवरी 1950 को जौनपुर के सांडी खुर्द में हुआ था। महाराज जी के पिता का नाम पंडित राजदेव मिश्र और माता का नाम शची देवी मिश्र है। महाराज जी के माता पिता सामानंदी संप्रदाय से हैं, उनके गुरु जी का नाम पंडित ईश्वर दास जी महाराज, राम प्रसाद त्रिपाठी संस्कृत और राम चरण दास रहे हैं। बता दें कि उन्हें पद्य विभूषण और साहित्य अकादमी समेत अन्य कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। बता दें कि महाराज को दो महीने की उम्र में ही गंभीर बीमारी की वजह से आखों की रोशनी चली गई थी।