Aghori Last Rites: अघोरी के बारे में मान्यता है कि ये हमेशा धर्म की रक्षा करने के लिए सबसे आगे खड़ा नजर आते हैं। ऐसी मान्यता है कि जब अघोरी साधु की मृत्यु होती है, तो उस अघोरी साधु का शव को जलाया नहीं जाता है। बल्कि अघोरी साधु की मौत होने पर चौकड़ी लगाकर शव को उलटा रखा जा जाता है।
Aghori Last Rites: संगम नगरी प्रयागराज में महाकुंभ का भव्य आयोजन की शुरुआत हो चुकी है। आज तीसरा दिन है। महाकुंभ में शाही स्नान करने के लिए श्रद्धालु संगम घाट पर पहुंचते हैं। जिसके वजह से महाकुंभ पूरे विश्व के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुए हैं। महाकुंभ अघोरी बाबा और नागा साधुओं के कारण और अधिक आकर्षक का केंद्र बने हुए हैं। लोगों के मन में अघोरियों को लेकर मन में कई सवाल जरूर घूमते रहते हैं। जैसे लोग ये सोचते हैं कि क्या अघोरी सच में इंसानी मांस खाते हैं, आखिर अघोरी नर मुंड हमेशा अपने साथ क्यों रखते हैं, और सबसे जरूरी सवाल कि क्या अघोरियों का अंतिम संस्कार कौन करता है और कैसे होता है। इन्हीं सब सवालों का जवाब इस खबर में बताने वाले हैं। तो आइए विस्तार से जानते हैं।
अघोरी का कैसा होता है अंतिम संस्कार
अघोरी के बारे में मान्यता है कि ये हमेशा धर्म की रक्षा करने के लिए सबसे आगे खड़ा नजर आते हैं। ऐसी मान्यता है कि जब अघोरी साधु की मृत्यु होती है, तो उस अघोरी साधु का शव को जलाया नहीं जाता है। बल्कि अघोरी साधु की मौत होने पर चौकड़ी लगाकर शव को उलटा रखा जा जाता है। यानी सिर नीचे और टांग ऊपर की ओर लटका दिया जाता है। उसके बाद सवा महीना यानी 40 दिन तक इंतजार किया जाता है जब तक उस अघोरी के शव में कीड़े न पड़ें।
कीड़े पड़ने के बाद मृत शरीर को वहां से निकालते हैं। मृत अघोरी साधु के आधे शरीर को गंगा में बहा देते हैं। उसके बाद सिर को हिस्से को अन्य अघोरी साधु साधना के लिए इस्तेमाल करते हैं। वहीं कुछ ऐसे भी अघोरी होते हैं जो सिर वाले हिस्से को साधना के बाद अपने पास ही रख लेते हैं, तो कुछ साधु उसे गंगा नदी में बहा देते हैं। मान्यता है कि इसके पीछे करने का यह कारण हैं कि उस साधु के सारे पाप धुल जाते हैं।