facebook pixel
विज्ञापन
Home  maha kumbh  how to become mahamandaleshwar how guru diksha done akhada

How to become Mahamandaleshwar: अखाड़े में कैसे होती है गुरु दीक्षा, जानें कौन बन सकता है महामंडलेश्वर

जीवांजलीPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

How to become Mahamandaleshwar: देश में प्रमुख अखाड़ों की संख्या 13 है। इन अखाड़ों में महामंडलेश्वर, महंत और साधु-संत होते हैं। बता दें कि अखाड़ों में महामंडलेश्वर का पद बहुत ही बड़ा होता है। इनके कहने पर ही अखाड़े के साधु-संत और महंत कार्य करते हैं।

अखाड़े में गुरु दीक्षा
How to become Mahamandaleshwar: देश में प्रमुख अखाड़ों की संख्या 13 है। इन अखाड़ों में महामंडलेश्वर, महंत और साधु-संत होते हैं। बता दें कि अखाड़ों में महामंडलेश्वर का पद बहुत ही बड़ा होता है। इनके कहने पर ही अखाड़े के साधु-संत और महंत कार्य करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है महामंडलेश्वर कैसे बनते हैं और इनकी गुरु दीक्षा कैसे होती है। यदि नहीं तो आज इस खबर में विस्तार से इसके बारे में जानेंगे।

जानें अखाड़ों में कैसे बनते हैं महामडंलेश्वर

सनातन धर्म में संन्यासी परंपरा का चलन सदियों पुरानी है। अखाड़ों में कई अलग-अलग तरह के साधु-संत भी होते हैं। इन साधु-संतों का अपने धर्म में अलग-अलग महत्व भी होता है। अखाड़ों में सबसे बड़ा शंकराचार्य का होता है उसके बाद महामंडलेश्वर की। ऐसा नहीं हैं कि कोई भी महामंडलेश्वर बन सकता है। महामंडलेश्वर बनने के लिए वेद-पुराण का ज्ञान होना बहुत ही जरूरी है। इसके साथ ही यदि आप आयार्य या फिर शास्त्री हैं तो आपको इसका फायदा भी मिल सकता है। इससे आपको चयन में ज्यादा फायदा मिल सकता है।

जब किसी को महामंडलेश्वर बनाने का फैसला किया जाता है, तो उसमें सबसे पहले ये देखा जाता है कि वो किस गुट से या मठ से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही वह समाज कल्याण के कार्य करते हैं या नही। यदि वह व्यक्ति कथावाचक होते हैं तो उसका और ज्यादा फायदा मिलता है। यदि आप 10 से 12 सालों तक कथा कर रहे हैं या किसी मठ के साथ जुड़े हुए हैं, तो ऐसे में आप महामंडलेश्वर पद के लिए योग्य है।

महामंडलेश्वर बनने की शर्तें

बता दें कि जो व्यक्ति महामंडलेश्वर बनते हैं उन्हें कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। इतना आसान नहीं होता है महामंडलेश्वर बनाना। जी हां जब महामंडलेश्वर के चयन की प्रक्रिया पूरी हो जाती हैं, तो उसके बाद उस व्यक्ति को संन्यास दिलाया जाता है। उस व्यक्ति को खुद के हाथों की खुद का पिंडदान करना पड़ता है। इसके बाद ही महामंडलेश्वर का पट्टाभिषेक होता है। साथ ही इस दौरान 13 अखाड़ों के संत व महंत भी उस स्थान पर मौजूद रहते हैं। इस दौरान दूध, घी, दही, शहद और चीनी से बना पंचामृत सभी में बाँटा जाता है। इसके साथ ही उन्हें चादर भी भेंट की जाती है।

यह भी पढ़ें-  Akhade Ka Niyam: क्या होता है अखाड़े का नियम, जानें इसका इतिहास

यह भी पढ़ें- Mahakumbh 2025: कब और कैसे हुई अखाड़ों की स्थापना, जानें इन अखाड़ों के इष्टदेव

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel