Akhade Ka Niyam: आम तौर पर अखाड़े का मतलब व्यायामशाला या फिर कुश्ती लड़ने की जगह होती है। लेकिन देश में साधु-संतों के लिए कुछ पारंपरिक विशेष समूहों को भी अखाड़ा का नाम दिया गया है। महाकुंभ में विभिन्न अखाड़े के साधु-संतों को देखने को मिलता है।
Akhade Ka Niyam: आम तौर पर अखाड़े का मतलब व्यायामशाला या फिर कुश्ती लड़ने की जगह होती है। लेकिन देश में साधु-संतों के लिए कुछ पारंपरिक विशेष समूहों को भी अखाड़ा का नाम दिया गया है। महाकुंभ में विभिन्न अखाड़े के साधु-संतों को देखने को मिलता है। देश में प्रमुख रूप से 13 अखाड़े हैं, जिनके अपने अलग-अलग नियम व कायदे हैं। तो आज इस खबर में जानेंगे कि अखाड़े का इतिहास क्या है और इनके नियम क्या-क्या है। आइए विस्तार से जानते हैं।
अखाड़े की कैसे हुई शुरुआत
माना जाता है कि 8वीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य जी ने 13 अखाड़ों का गठन किया था। इन अखड़ों को बनाने का मकसद हिंदू धर्म में वैदिक संस्कृति की रक्षा करना था। बता दें कि उस दौरान में वैदिक संस्कृति और यज्ञ परंपरा संकट में थी। उस समय में बौद्ध धर्म तेजी से भारत में फैल रहा था और बौद्ध धर्म में यज्ञ और वैदिक परंपराओं का निषेध था।
ऐसे में धर्म की रक्षा करने के लिए नागा साधुओं की एक सेना के रूप में अखाड़ों को तैयार किया गया। इन अखाड़ों में योग, अध्यात्म के साथ ही अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दीक्षा दी गई। उसके बाद ही से ही अखाड़े आज तक बने हुए हैं।
अखाड़े के नियम और कायदे
बता दें कि अखाड़े के नियम-कायदे बड़े ही कड़े होते हैं। महाकुंभ में शामिल होने वाले सभी अखाड़े अपने अलग-अलग नियमों से ही संचालित होते हैं। मान्यता है कि यदि एक छोटी सी भी चूक हो जाती है तो साधु को अखाड़े के कोतवाल के साथ गंगा में 5 से लेकर 108 बार डुबकी लगाने के लिए भेजा जाता है।
डुबकी के बाद वह भीगे कपड़े में ही देव स्थान पर आकर अपनी त्रुटि के लिए क्षमा मांगते हैं। इसके साथ ही पुजारी पूजा स्थल पर रखा प्रसाद देकर उसे दोषमुक्त करते हैं। मान्यता है कि साधु विवाह, हत्या या दुष्कर्म जैसे कार्य करते हैं तो उन्हें अखाड़े से निष्कासित किए जाने का नियम है। साथ ही साथ ही अखाड़ों के अनुशासन को मनाने की शपथ नागा साधु बनने की प्रक्रिया के दौरान दिलाई जाती है। यह भी पढ़ें- Mahakumbh 2025: कब और कैसे हुई अखाड़ों की स्थापना, जानें इन अखाड़ों के इष्टदेव
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