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Kinnar Akhade Me Puja: किन्नर अखाड़े में आधी रात में क्यों करते हैं पूजा, जानें क्या है वजह

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Aadhi Rat Me Kyu Hoti Hai Kinnar Akhade Me Puja: फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने आध्यात्मिक जीवन का मार्ग अपना लिया है। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान शुक्रवार को उन्होंने किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर की उपाधि ग्रहण की।

Kinnar Akhade Me Puja
Aadhi Rat Me Kyu Hoti Hai Kinnar Akhade Me Puja: फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने आध्यात्मिक जीवन का मार्ग अपना लिया है। प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान शुक्रवार को उन्होंने किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर की उपाधि ग्रहण की। अखाड़े के आचार्यों ने उनका पट्टाभिषेक किया। 53 वर्षीय ममता कुलकर्णी अब यमाई ममता नंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। किन्नर अखाड़े के महाकुंभ में जब साधकों को दीक्षा दी जाती है तो आधी रात को पूजा की जाती है। इसके पीछे एक खास वजह है। 

महाकुंभ के दौरान कई साधकों को तंत्र विधान के अनुसार किन्नर अखाड़े में दीक्षा दी गई है। महाकुंभ हो या कुंभ, किन्नर अखाड़े में अघोरी काली पूजा हमेशा आधी रात को की जाती है। यह पूजा तंत्र विधान के अनुसार की जाती है। इस पूजा में डमरू की ध्वनि और मंत्रोच्चार किया जाता है। यह पूजा किन्नर अखाड़े की तांत्रिक परंपराओं का अहम हिस्सा यह साधना तंत्र विद्या, आध्यात्मिक शक्ति और आस्था का अनूठा संगम है।

इस बार महाकुंभ में तमिलनाडु से आए महामंडलेश्वर मणि कंतन ने यह पूजा कराई। अपने शिष्यों को दीक्षा देते हुए उन्होंने अघोर साधना और उसकी परंपराओं का महत्व समझाया। मणि कंतन कहते हैं कि यह पूजा अघोर तंत्र की सात्विक पूजा है, जिसमें आस्था और साधना का अनूठा संगम होता है।

तंत्र विद्या का ज्ञान दिया जाता है

यह पूजा लोगों के कल्याण और समृद्धि के लिए की जाती है। यह तंत्र और धर्म का ऐसा संगम है, जो आध्यात्मिक उन्नति के द्वार खोलता है। यह विशेष साधना आमतौर पर काशी के मणिकर्णिका घाट और कामाख्या देवी मंदिर में की जाती है, लेकिन पूर्ण महाकुंभ में इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस दौरान नए साधकों को दीक्षा दी जाती है और उन्हें तंत्र विद्या का ज्ञान दिया जाता है। पूजा के बाद भक्तों को आशीर्वाद भी दिया जाता है।

तंत्र साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय

इस पूजा के बाद विश्व के कल्याण की कामना की जाती है। मान्यता है कि महाकुंभ का पावन समय सभी देवी-देवताओं की उपस्थिति से भरा होता है। यही कारण है कि इस समय को तंत्र साधना के लिए भी सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। माना जाता है कि मध्य रात्रि में तंत्र साधना अधिक फलदायी होती है। इसलिए किन्नर अखाड़े में मध्य रात्रि में पूजा की जाती है।

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