facebook pixel
विज्ञापन
Home  maha kumbh  kaun hain murge wali mata which mother do eunuchs worship first know who is murgi wali mata

Kaun Hain Murge Wali Mata:महाकुंभ में सबसे पहले किन्नर किस मां की करते हैं पूजा, जानें कौन है मुर्गी वाली माता

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Kaun Hain Murge Wali Mata: महाकुंभ में इन दिनों किन्नर अखाड़ा चर्चा में है। यहां बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाया गया है। फिल्मी दुनिया को अलविदा कहकर ममता कुलकर्णी अब साध्वी बन गई हैं।

Kaun Hain Murge Wali Mata
Kaun Hain Murge Wali Mata: महाकुंभ में इन दिनों किन्नर अखाड़ा चर्चा में है। यहां बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाया गया है। फिल्मी दुनिया को अलविदा कहकर ममता कुलकर्णी अब साध्वी बन गई हैं। उन्होंने धर्म की राह पकड़ ली है। किन्नर अखाड़ा श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अंतर्गत आता है। अन्य अखाड़ों की तरह इसके भी देश में 10 जगहों पर मठ हैं। 

देशभर में इस अखाड़े के 13 प्रमुख अखाड़े हैं। इसमें शैव संप्रदाय को मानने वाले किन्नर, भगवान विष्णु को मानने वाले किन्नर और गुरु नानक देव को मानने वाले किन्नर शामिल हैं। इसके अलावा गुजरात के अहमदाबाद में बहुचरा माता का मंदिर है, जिसे मुर्गी वाली माता मंदिर कहा जाता है। कहा जाता है कि ये किन्नरों की कुल देवी हैं। किन्नर अखाड़े में सबसे पहले इनकी पूजा की जाती है।

किन्नर अखाड़ा किसने बनाया? 

किन्नर कार्यकर्ता डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी कई सालों से किन्नरों के कल्याण के लिए काम कर रही थीं। तभी उनके मन में किन्नर अखाड़ा बनाने का विचार आया। उन्होंने अपने समुदाय के लोगों को इकट्ठा करके साल 2015 में किन्नर अखाड़ा की स्थापना की। जब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने इसका विरोध किया। कड़े विरोध के बावजूद डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी अडिग रहीं। साल 2016 में किन्नर अखाड़े ने उज्जैन के कुंभ में अपनी छावनी लगाई।

किन्नरों को उपदेव कहा जाता था

किन्नर अखाड़े को उज्जैन के कुंभ में जगह तो मिली, लेकिन अखाड़ा परिषद ने उनके शाही स्नान पर आपत्ति जताई। इसके बाद किन्नर अखाड़े के संतों ने खुद को उपदेव बताते हुए शाही स्नान किया। किन्नर अखाड़ा उज्जैन में सभी के आकर्षण का केंद्र बन गया और लोगों का उन्हें भरपूर समर्थन भी मिला।

वर्ष 2018 के सितंबर माह में अखाड़े के महामंडलेश्वर ने देश के प्रमुख राज्यों तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के अलावा दक्षिण भारत, उत्तर भारत, विदर्भ, पूर्वोत्तर भारत के लिए अलग-अलग महामंडलेश्वरों की नियुक्ति की थी।तब से यह अखाड़ा निरंतर विस्तार कर रहा है।

यह भी पढ़ें- Mahakumbh Dharm Sansad: महाकुंभ धर्म संसद में देवकीनंदन ठाकुर ने कही ये बड़ी बात, जानें यहां...

यह भी पढ़ें- Mahakumbh Mauni Amavasya 2025 : मौनी अमावस्या पर कैसे किया जाता है पितरों को पिंडदान, जानें नियम

 

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel