योगिनी एकादशी के दिन विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो गंगाजल मिलाकर स्नान करें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़के और एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
पूजा सामग्री में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र, तुलसी का पौधा, गंगाजल, पीले फूल, तुलसी दल, पंचामृत, खीर, पंचमेवा, घी का दीपक, धूप, और रोली लें।
चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति की स्थापना करें।
भगवान विष्णु का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। हल्दी, कुमकुम और अक्षत से तिलक करें।
तुलसी दल, पीले फूल, और फल अर्पित करें। खीर या पंचमेवा का भोग लगाएं, जिसमें तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान भोग स्वीकार नहीं करते।
'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः' और 'ॐ नमो नारायणाय' मंत्रों का 108 बार जाप करें
विष्णु सहस्रनाम या योगिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।
इस दिन निर्जला व्रत रखने की परंपरा है, लेकिन यदि यह संभव न हो तो फलाहार या सात्विक भोजन ले सकते हैं।
चावल का सेवन वर्जित है।
द्वादशी तिथि पर, 22 जून को सुबह 05:24 बजे से 08:15 बजे के बीच व्रत का पारण करें।
सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल अर्पित करें, ब्राह्मणों को भोजन और दान-दक्षिणा दें और फिर तुलसी के पत्तों के साथ प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें।
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