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Bada Mangal 5th 2025: कब है पांचवां मंगल, जानिए पूजा विधि और व्रत का धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
साक्षी
सार

Bada Mangal 5th 2025: ज्येष्ठ मास में पड़ने वाला बड़ा मंगल, भगवान हनुमान की भक्ति और शक्ति का प्रतीक है। उत्तर भारत यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। 

बड़ा मंगल
Bada Mangal 5th 2025: ज्येष्ठ मास में पड़ने वाला बड़ा मंगल, भगवान हनुमान की भक्ति और शक्ति का प्रतीक है। उत्तर भारत यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' के रूप में जाना जाता है। चार बड़े मंगल के बाद अब भक्तों के बीच पांचवें बड़े मंगल को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। आइए आपको पांचवें बड़े मंगल की तिथि, इसके महत्व, पूजन विधि और पौराणिक कथा के बारे में बताते हैं...

कब है पांचवां बड़ा मंगल?

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगलवारों को बड़ा मंगल के रूप में मनाया जाता है। ज्येष्ठ मास 2025 में पांच मंगलवार है और पांचवां बड़ा मंगल 24 जून 2025 को होगा। यह तिथि उदया तिथि के आधार पर निर्धारित की गई है। इस दिन भक्त हनुमान जी की विशेष पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और भंडारे आयोजित करते हैं।
बड़ा मंगल

बड़ा मंगल क्यों मनाया जाता है?

बड़ा मंगल भगवान हनुमान को समर्पित एक पवित्र पर्व है, जिन्हें संकटमोचन, बल और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। ज्येष्ठ मास के मंगलवार को विशेष महत्व इसलिए है, क्योंकि इस मास में हनुमान जी से जुड़ी कई पौराणिक और आध्यात्मिक घटनाएं हुई मानी जाती हैं। इस दिन पूजा और व्रत करने से भक्तों के जीवन से संकट, भय और ज्योतिषीय दोष जैसे मंगल दोष और शनि की साढ़े साती का प्रभाव कम होता है।

पूजन विधि

बड़े मंगल के दिन भगवान हनुमान की पूजा विधि-विधान से की जाती है।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लाल, पीले, या केसरिया रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये रंग हनुमान जी को प्रिय हैं।
पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और हनुमान जी की मूर्ति या चित्र को लाल कपड़े पर स्थापित करें।
घी या चमेली के तेल का दीपक जलाएं और अगरबत्ती या धूप प्रज्वलित करें।
हनुमान जी को गेंदा, चमेली, या लाल गुलाब के फूल, सिंदूर, चमेली का तेल, और लाल वस्त्र अर्पित करें। प्रसाद के रूप में बेसन के लड्डू चढ़ाएं।
हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, या बजरंग बाण का पाठ करें। "ॐ हं हनुमते नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
यदि व्रत रख रहे हैं, तो सुबह हनुमान जी के समक्ष संकल्प लें। व्रत के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करें।
पूजा के अंत में हनुमान जी की आरती करें और प्रसाद को परिवार, दोस्तों, और जरूरतमंदों में बांटें।
इस दिन दान का विशेष महत्व है। भंडारे में भोजन, वस्त्र, या अन्य दान करें।
हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं, इसलिए महिलाएं चोला या लाल वस्त्र चढ़ाने से बचें। साथ ही मासिक धर्म के दौरान व्रत न रखें।
बड़ा मंगल

बड़े मंगल का महत्व

बड़ा मंगल का धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व खास है। हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। उनकी पूजा से आर्थिक, पारिवारिक, और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। मंगल ग्रह से संबंधित दोषों का निवारण होता है, और शनि की साढ़े साती का प्रभाव कम होता है। हनुमान जी की पूजा से भक्तों में आत्मविश्वास, साहस, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भंडारों के आयोजन से सभी वर्गों के लोग एक साथ भोजन करते हैं, जिससे सामाजिक समरसता को बल मिलता है।
बड़ा मंगल

पौराणिक कथाएं

राम-हनुमान की भेंट: रामायण के अनुसार, ज्येष्ठ मास के एक मंगलवार को भगवान राम और लक्ष्मण की पहली मुलाकात हनुमान जी से हुई थी। हनुमान जी ने ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे भेंट की थी, जो उनके और भगवान राम के अटूट संबंध की शुरुआत थी। इस कारण ज्येष्ठ मास का मंगलवार विशेष माना जाता है।

लंका दहन: एक कथा के अनुसार, रावण द्वारा हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने पर उन्होंने अपनी शक्ति से पूरी लंका को जलाकर राख कर दिया था। यह घटना भी ज्येष्ठ मास के मंगलवार को हुई मानी जाती है। इसके बाद हनुमान जी को अमरता का वरदान प्राप्त हुआ, जिसके कारण वे आज भी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

ब्राह्मण दंपति की कथा: एक कथा के अनुसार, एक नि:संतान ब्राह्मण दंपति हनुमान जी के परम भक्त थे। एक मंगलवार को जब ब्राह्मण जंगल में तप कर रहा था, उसकी पत्नी ने भोजन न होने पर भी भगवान को भोग लगाए बिना भोजन न करने का संकल्प लिया। हनुमान जी उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें पुत्र का वरदान दिया। जन्मे पुत्र का नाम 'मंगल' रखा गया। जब ब्राह्मण को संदेह हुआ और उसने मंगल को कुएं में डाल दिया तो हनुमान जी की कृपा से वह सुरक्षित बच गया।

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