Year Ender 2025: 31 दिसंबर की शाम को घर में दीपक जलाना, लक्ष्मी-गणेश पूजन करना और विष्णु या शिव की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
Year Ender Puja Vidhi: साल का अंतिम दिन, यानी 31 दिसंबर न केवल ग्रेगोरियन कैलेंडर में नए साल की पूर्व संध्या होता है, बल्कि हिंदू धर्म में भी यह एक विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन पुराने साल की नकारात्मक ऊर्जा को विदा करके नए साल में सकारात्मकता, पुण्य, सुख-शांति और समृद्धि को आमंत्रित करने का मौका मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वर्ष के अंतिम दिन विशेष पूजा-पाठ करने से बीते साल की गलतियां माफ हो जाती हैं, पाप नष्ट होते हैं और आने वाला साल धन-धान्य, स्वास्थ्य और खुशहाली से भरपूर रहता है। ज्योतिष और शास्त्रों में इस दिन को आत्मशुद्धि, क्षमा याचना और नए संकल्प लेने का दिन बताया गया है।
हिंदू परंपरा में साल का अंतिम दिन कई शुभ संयोगों से जुड़ा होता है। इस वर्ष 2025 के अंत में पौष पुत्रदा एकादशी 30 दिसंबर और वैकुंठ एकादशी 31 दिसंबर को पड़ रहा है, जो साल की अंतिम एकादशी है। इसके अलावा, नए साल की शुरुआत प्रदोष व्रत से हो रही है, जो भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाता है। ऐसे में 31 दिसंबर की शाम को घर में दीपक जलाना, लक्ष्मी-गणेश पूजन करना और विष्णु या शिव की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं कि इस विशेष दिन कौन-सी पूजा-पाठ करें और कैसे करें, ताकि नए वर्ष 2026 में पुण्य और शांति की प्राप्ति हो...
साल के अंतिम दिन पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में वर्ष का अंत पौष मास से जुड़ा होता है, जो आत्मचिंतन और देव आराधना का समय है। शास्त्रों के अनुसार, साल के आखिरी दिन की गई पूजा आने वाले पूरे वर्ष के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। यह दिन पुरानी नकारात्मकता को दूर करने और नए संकल्प लेने का प्रतीक है।
इस दिन दान-पुण्य, व्रत और पूजा से अक्षय पुण्य मिलता है। बीते साल के पापों की क्षमा मांगने से मन शुद्ध होता है।
घर में दीपदान और लक्ष्मी पूजन से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, जिससे नए साल में धन की कमी नहीं होती।
क्षमा याचना और मंत्र जाप से तनाव दूर होता है और परिवार में सद्भाव बढ़ता है।
इस दिन किए उपाय ग्रहों की दशा सुधारते हैं, विशेषकर शुक्र और सूर्य के गोचर से धन-सुख मिलता है।
मान्यता है कि साल के अंतिम दिन घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाने से लक्ष्मी जी का आगमन होता है और पूरे साल शुभता बनी रहती है।
साल के आखिरी दिन विशेष पूजा-पाठ की विधि
31 दिसंबर की शाम को प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद में पूजा करना सबसे शुभ होता है। इस वर्ष प्रदोष काल शाम पांच से छह बजे से शुरू होगा। पूजा से पहले घर की सफाई करें, गंगाजल छिड़कें और पुरानी चीजों को हटाकर नई ऊर्जा आमंत्रित करें।
गणेश-लक्ष्मी पूजन
साल के अंत में धन और बाधा निवारण के लिए गणेश-लक्ष्मी की पूजा अनिवार्य है। यह समृद्धि के लिए मुख्य पूजा मानी जाती है। यह पूजा दिवाली की तरह ही की जाती है, लेकिन नए साल के संकल्प के साथ की जाएगी। यह पूजा करने से नए साल में आर्थिक स्थिरता और बाधाएं दूर होती हैं।
इस पूजा की सामग्री के लिए गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र, लाल कपड़ा, चौकी, कलश, गंगाजल, फूल, अगरबत्ती, घी का दीपक, कपूर, सिंदूर, चंदन, पंचमेवा, फल, मिठाई, कमलगट्टा, नारियल, सुपारी, दूर्वा, पान का पत्ता लें।
पूजन विधि
चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। कलश स्थापना करें और उसमें जल भरकर सुपारी, दूर्वा डालें।
सबसे पहले गणेश जी का पूजन: दूर्वा, सिंदूर, मोदक चढ़ाएं। मंत्र: "ॐ गं गणपतये नमः" का 108 बार जाप करें।
फिर लक्ष्मी जी का पूजन: कमल के फूल, चंदन, सिंदूर, मिठाई चढ़ाएं। मंत्र: "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" या "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः"।
दोनों को पंचामृत- दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से स्नान कराएं।
गणेश जी और माता लक्ष्मी जी की आरती करें।
अंत में संकल्प लें कि नए साल में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
प्रसाद वितरण करें और दान दें, जिसमें अन्न, वस्त्र या धन का दान किया जा सकता है।
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भगवान विष्णु और पुत्रदा एकादशी व्रत पूजन
इस वर्ष 31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का प्रभाव है। विष्णु जी की पूजा से संतान सुख और शांति मिलती है।
पूजन विधि
विष्णु जी की मूर्ति पर तुलसी पत्र चढ़ाएं।
मंत्र: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करें।
शंख बजाएं और दक्षिणावर्ती शंख से जल अभिषेक करें।
तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं और 11 परिक्रमा करें।
व्रत पारण अगले दिन करें और ब्राह्मण को दान दें।
शिव पूजन और प्रदोष व्रत प्रभाव
नए साल की शुरुआत प्रदोष से हो रही है, इसलिए शिवलिंग पर अभिषेक करें। पूजन सामग्री में दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा, भांग शामिल करें।
पूजन विधि
"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
शिवलिंग पर जल, दूध चढ़ाएं।
बेलपत्र चढ़ाते हुए कहें- पुराने साल के दुख दूर करो, नए साल में शांति प्रदान करो।
अन्य विशेष उपाय और पूजा-पाठ
घर के मुख्य द्वार, तुलसी के पास और पीपल के नीचे घी का दीपक जलाएं। इससे पितर प्रसन्न होते हैं।
परिवार के साथ बैठकर बीते साल की गलतियों के लिए क्षमा मांगें। छोटे कर्ज चुकाने का संकल्प लें।
तुलसी माता को जल अर्पित करें और परिक्रमा करें।
शाम को "ॐ शांति शांति शांति" या विष्णु सहस्रनाम पाठ करें।
जरूरतमंदों को अन्न, कंबल या गर्म कपड़े दान करें। कन्या पूजन करें।
पुरानी चीजें हटाएं, अशोक या आम के पत्तों का नया तोरण लगाएं।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)