facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  lunar eclipse sootak kaal mein pooja kyon nahin ki jati janiye chandra grahan se judi dharmik manyata

Chandra Grahan: सूतक काल में पूजा क्यों नहीं की जाती? जानें चंद्रग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यता

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Sutak Kaal: ग्रहण के दौरान पूजा करने के बजाय मंत्र जाप, ध्यान और भगवान का स्मरण करने को विशेष महत्व दिया गया है। कई लोग इस दौरान अपने इष्ट देव का ध्यान करते हैं और धार्मिक मंत्रों का जाप करते हैं।
 

Chandra Grahan
Lunar Eclipse Religious Beliefs: हिंदू धर्म में ग्रहण से पहले लगने वाले समय को सूतक काल कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, चंद्रग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले सूतक शुरू हो जाता है। इस दौरान कई धार्मिक कार्यों को रोक दिया जाता है और मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। हालांकि, सूतक की मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में कुछ भिन्न हो सकती हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक और अशुभ प्रभाव बढ़ जाता है। इसी वजह से सूतक काल में पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और शुभ कार्य करने से परहेज किया जाता है। माना जाता है कि इस समय भगवान की मूर्तियों को स्पर्श करना या मंदिर में पूजा करना उचित नहीं होता। इसी मान्यता के चलते ग्रहण शुरू होने से पहले मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की साफ-सफाई तथा शुद्धिकरण किया जाता है।

ग्रहण के समय क्या करते हैं लोग?

धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के दौरान पूजा करने के बजाय मंत्र जाप, ध्यान और भगवान का स्मरण करने को विशेष महत्व दिया गया है। कई लोग इस दौरान अपने इष्ट देव का ध्यान करते हैं और धार्मिक मंत्रों का जाप करते हैं। मान्यता है कि ग्रहण के समय किया गया मंत्र जाप आध्यात्मिक रूप से विशेष फलदायी होता है।

भोजन को लेकर क्या है मान्यता?

सूतक काल के दौरान भोजन करने को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। परंपरा के अनुसार, ग्रहण से पहले भोजन कर लिया जाता है। कई घरों में भोजन और पानी को सुरक्षित रखने के लिए उसमें तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा भी है। धार्मिक विश्वास है कि तुलसी की पवित्रता भोजन को ग्रहण के प्रभाव से बचाती है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनका पालन व्यक्ति अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार करता है।

ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें?

चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना, घर की साफ-सफाई करना और पूजा स्थल को शुद्ध करना धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। इसके बाद भगवान की पूजा की जाती है और कई लोग जरूरतमंदों को दान-पुण्य भी करते हैं।

सूतक और ग्रहण की धार्मिक मान्यता 

सूतक और ग्रहण से जुड़ी परंपराएं मुख्य रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसमें पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसलिए सूतक काल में पूजा न करने की परंपरा को धार्मिक विश्वास के रूप में समझना चाहिए। इसका पालन करना व्यक्ति की आस्था, परंपरा और विश्वास पर निर्भर करता है।

ये भी पढ़ें -  चंद्रग्रहण के समय घर में क्यों रखा जाता है जलता दीपक? जानें धार्मिक महत्व

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel