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Som Pradosh Vrat: सोम प्रदोष व्रत के दिन किन मंत्रों का करें जाप, भगवान शिव को कैसे करें प्रसन्न... जानें महत्

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Som Pradosh Vrat Niyam: सोम प्रदोष व्रत एक सरल और शक्तिशाली आध्यात्मिक प्रक्रिया है जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। यदि श्रद्धा, नियम और मन की पवित्रता के साथ यह व्रत किया जाए तो भगवान शिव की कृपा सहज ही प्राप्त हो जाती है। 

सोम प्रदोष व्रत के दिन किन मंत्रों का करें जाप, भगवान शिव को कैसे करें प्रसन्न... जानें महत्व
Som Pradosh Vrat Puja Vidhi: हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है। इसी दिन यदि प्रदोष तिथि का योग बन जाए तो उसे सोम प्रदोष कहा जाता है। यह तिथि शिव-भक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जीवन के संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सोम प्रदोष न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से श्रेष्ठ है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और सकारात्मकता बढ़ाता है। इस लेख में जानें कि सोम प्रदोष व्रत में कौन-से मंत्र जपें, पूजा कैसे करें, भगवान शिव को कैसे प्रसन्न करें, और इस व्रत का महत्व क्या है।

प्रदोष तिथि हर पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आती है। यह तिथि सूर्यास्त के ठीक बाद के समय में सबसे प्रभावशाली मानी जाती है। "प्रदोष" का अर्थ है, दोषों का नाश, यानी वह समय जब व्यक्ति अपने पापों और दुखों से मुक्ति पा सकता है। सोमवार को आने वाली प्रदोष तिथि को सोम प्रदोष कहा जाता है। चूंकि सोमवार शिव का प्रिय दिन है, इसलिए इस दिन का योग शुभ फलदायक होता है।

सोम प्रदोष व्रत की पूजा-विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • व्रत का संकल्प लें कि मैं भगवान शिव की कृपा व कल्याण हेतु सोम प्रदोष व्रत करूंगा/करूंगी।
  • पारणा (व्रत खोलना) सूर्यास्त के बाद पूजा पूर्ण कर किया जाता है।
  • फलाहार या निर्जल व्रत, अपनी क्षमता के अनुसार रखें।
  • प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट बाद शुरू होता है। यही समय शिव-पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
  • पूजा में शामिल करें- गंगाजल से अभिषेक, कच्चा दूध, दही, शहद, गन्ना रस, बेलपत्र (3 पत्तियों का समूह, साफ और छेदरहित), धतूरा, भस्म, अक्षत, दीपक, धूप, नैवेद्य आदि।
  • सोम प्रदोष की कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजन के उपरांत "ओम जय शिव ओमकारा" आरती गाएं।
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किन मंत्रों का करें जाप?

मंत्र-जाप सोम प्रदोष व्रत की आत्मा है। शिव को मंत्र अत्यंत प्रिय हैं और इनके जप से मन, तन और जीवन शुद्ध होता है।

महा मृत्युंजय मंत्र (अति प्रभावी)

“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”


यह मंत्र आयु-वृद्धि, रोग निवारण और संकट मुक्ति के लिए सर्वोत्तम है। कम से कम 108 बार जप अवश्य करें।

शिव पंचाक्षरी मंत्र

“ॐ नमः शिवाय”

यह सबसे सरल और अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है। 108, 216 या 1008 बार जप करें। यह मन को शांत करता है और शिवजी का तुरंत ध्यान आकर्षित करता है।

शिव गायत्री मंत्र

“ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥”

आध्यात्मिक विकास और दिव्य ऊर्जा प्राप्ति के लिए उत्तम।

रुद्र बीज मंत्र

“ॐ हौं जूं सः”

यह मंत्र अत्यंत तेजस्वी है और नकारात्मक शक्तियों का नाश करता है।

शिव ध्यान मंत्र (ध्यान के लिए)

“ॐ सर्वेश्वराय महादेवाय नमः।”

शिव के स्वरूप का ध्यान करते हुए जप करें।

भगवान शिव को कैसे करें प्रसन्न?

प्रदोष व्रत के दिन इस विधि से करें शिव-पार्वती की पूजा, वैवाहिक बाधाएं होंगी दूर!

भगवान शिव को प्रसन्न करना अत्यंत सरल है। वे आशुतोष हैं अर्थात् जो शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। सोम प्रदोष के दिन निम्न उपाय विशेष फलदायक माने जाते हैं।
  • जल और दूध से अभिषेक: शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल अर्पित करने से सभी दोष दूर होते हैं। जल की धारा निरंतर रखें। अभिषेक करते समय "ॐ नमः शिवाय" का जप करें।
  • बेलपत्र चढ़ाना: बेलपत्र शिव का प्रिय होता है। तीन पत्तों का समूह चढ़ाएं। पत्ते पर शुद्ध चंदन से “ॐ” लिखना शुभ माना जाता है।
  • चावल (अक्षत) और सफेद वस्त्र: चावल पवित्रता का प्रतीक है तथा सफेद रंग शिव का स्वरूप। शिवलिंग पर अक्षत अर्पित करें।
  • धतूरा, भस्म और भांग: शिव के विशेष प्रिय हैं। (साधक परिस्थिति अनुसार चढ़ा सकते हैं।)
  • दीपक जलाना: प्रदोष काल में घी का दीपक जलाकर शिव के सामने ध्यान लगाएं। दीपक का प्रकाश नकारात्मकता हटाता है।

शिव नाम का जप और शिव स्तुति

  • शिव चालीसा
  • रुद्राष्टक
  • शिवार्चन
  • लिंगाष्टक
इनका पाठ करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने लगती हैं।
 
शिव जी

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

  • पापों से मुक्ति: मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से जन्म-जन्मांतरों के पाप धुल जाते हैं।
  • दांपत्य जीवन में सुख: इस व्रत का पालन करने से पति-पत्नी में प्रेम बढ़ता है और वैवाहिक संबंध मजबूत होते हैं।
  • संतान प्राप्ति: निःसंतान दंपत्तियों के लिए यह व्रत विशेष रूप से फलदायी बताया गया है।
  • स्वास्थ्य और दीर्घायु: महा मृत्युंजय मंत्र के जप से व्यक्ति दीर्घायु और रोगमुक्त रहता है।
  • आर्थिक समृद्धि: शिव प्रसन्न होने पर जीवन में धन-संपत्ति की वृद्धि होती है और व्यवसाय में उन्नति मिलती है।
  • दुःख–संघर्षों से मुक्ति: यह व्रत नकारात्मक ऊर्जाओं और जीवन के संकटों को दूर करता है।
  • मन की शांति और ऊर्जा: प्रदोष काल का ध्यान और मंत्र-जाप मन को ओजस्वी बनाते हैं।

जानें क्या है धार्मिक मान्यता

सोम प्रदोष व्रत एक सरल और शक्तिशाली आध्यात्मिक प्रक्रिया है जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। यदि श्रद्धा, नियम और मन की पवित्रता के साथ यह व्रत किया जाए तो भगवान शिव की कृपा सहज ही प्राप्त होती है। मंत्र-जाप, अभिषेक, दान और ध्यान, इन सबके माध्यम से शिव को प्रसन्न करना अत्यंत सरल है। आशुतोष महादेव की कृपा से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता का मार्ग खुल जाता है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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