Sawan Somvar: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में पड़ने वाले सोमवार का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने और विधि-विधान से शिव पूजा करने से भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हालांकि, कई बार श्रद्धालु पूरी आस्था से व्रत तो रखते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं मानी जातीं। क्या आपने कभी सोचा है कि सावन सोमवार के व्रत में किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए? क्या आपको पता है कि इस दिन क्या करना शुभ माना गया है और किन कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है? आइए जानते हैं...
सावन सोमवार का धार्मिक महत्व
सावन मास का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। अविवाहित लोग योग्य जीवनसाथी की कामना से और विवाहित लोग सुखी दांपत्य जीवन तथा परिवार की समृद्धि के लिए सावन सोमवार का व्रत रखते हैं। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, बेलपत्र अर्पित करना और शिव मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
व्रत रखने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
सावन सोमवार का व्रत केवल भोजन न करने का नाम नहीं है, बल्कि यह मन, वचन और कर्म की शुद्धता का भी प्रतीक माना जाता है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। संकल्प लेते समय पूरे दिन श्रद्धा और संयम बनाए रखने का भाव रखें।
व्रत के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां
बिना स्नान किए पूजा न करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा हमेशा स्नान करके और स्वच्छ वस्त्र पहनकर करनी चाहिए। बिना स्नान किए पूजा करना उचित नहीं माना जाता।
पूजा में खंडित सामग्री का प्रयोग न करें
शिव पूजा में टूटे हुए बेलपत्र, सूखे फूल या खराब पूजा सामग्री का उपयोग नहीं करना चाहिए। भगवान को हमेशा ताजी और शुद्ध सामग्री ही अर्पित करें।
शिवलिंग पर गलत चीजें न चढ़ाएं
शिव पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, गंगाजल, दूध, दही, शहद और शुद्ध जल अर्पित किया जाता है। वहीं हल्दी, केतकी का फूल और तुलसी दल शिवलिंग पर अर्पित नहीं किए जाते। पूजा सामग्री का चयन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ही करें।
बेलपत्र चढ़ाते समय जल्दबाजी न करें
बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। इसे चढ़ाते समय ध्यान रखें कि पत्तियां साफ हों और पूरी श्रद्धा के साथ अर्पित की जाएं। बेलपत्र उल्टा या क्षतिग्रस्त नहीं चढ़ाना चाहिए।
क्रोध और विवाद से बचें
व्रत का उद्देश्य केवल उपवास करना नहीं बल्कि मन को भी शांत रखना होता है, इसलिए इस दिन क्रोध, झगड़ा, कटु वचन और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए।
असत्य बोलने से बचें
धार्मिक मान्यता है कि व्रत के दिन सत्य बोलना और अच्छे व्यवहार का पालन करना चाहिए। झूठ बोलना या किसी को धोखा देना व्रत की भावना के विपरीत माना जाता है।
नशे और तामसिक भोजन से दूर रहें
सावन सोमवार के दिन शराब, मांसाहार तथा अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत रखने वाले लोगों को सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है।
पूजा अधूरी छोड़कर न उठें
यदि आपने भगवान शिव की पूजा प्रारंभ कर दी है तो उसे पूरी श्रद्धा और विधि से संपन्न करें। बीच में पूजा छोड़ देना उचित नहीं माना जाता।
सावन सोमवार के दिन क्या करें
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग पर गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें।
- दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक भी कर सकते हैं।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और फल अर्पित करें।
- 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- शिव चालीसा, रुद्राष्टक या शिव स्तुति का पाठ करें।
- जरूरतमंद लोगों को अपनी श्रद्धा के अनुसार दान दें।
- पूरे दिन सात्विक विचार और संयम बनाए रखें।
सावन सोमवार के दिन क्या न करें
- बिना स्नान किए भगवान शिव की पूजा न करें।
- शिवलिंग पर हल्दी, तुलसी और केतकी का फूल अर्पित न करें।
- टूटे या खराब बेलपत्र का उपयोग न करें।
- मांसाहार और नशे का सेवन न करें।
- किसी का अपमान या अनादर न करें।
- क्रोध, झूठ और विवाद से बचें।
- पूजा के समय मन को इधर-उधर भटकने न दें।
- धार्मिक कार्यों को जल्दबाजी में पूरा करने की कोशिश न करें।
व्रत में क्या खा सकते हैं?
जो श्रद्धालु फलाहार व्रत रखते हैं, वे दूध, दही, फल, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, मूंगफली, नारियल पानी और सेंधा नमक से बने व्रत के भोजन का सेवन कर सकते हैं। वहीं जो लोग निर्जला या केवल जल ग्रहण करके व्रत रखते हैं, वे अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार संकल्प निभाते हैं। व्रत का स्वरूप व्यक्ति की श्रद्धा और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
पूजा के समय किन बातों का रखें विशेष ध्यान
भगवान शिव की पूजा करते समय शांत मन से बैठें और पूरी श्रद्धा के साथ अभिषेक करें। जल की धारा धीरे-धीरे शिवलिंग पर अर्पित करें। मंत्रों का उच्चारण यथासंभव शुद्ध तरीके से करें। यदि सभी मंत्र याद न हों तो केवल 'ॐ नमः शिवाय' का जाप भी श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है। पूजा के बाद भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल की कामना करें।
व्रत का पारण कब करें?
सावन सोमवार का व्रत अगले दिन प्रातःकाल स्नान और भगवान शिव का स्मरण करने के बाद पारण किया जाता है। कई लोग सोमवार की संध्या पूजा के बाद भी अपनी परंपरा के अनुसार व्रत खोलते हैं। इसलिए पारण का समय अपने परिवार की परंपरा या धार्मिक मान्यता के अनुसार रखा जा सकता है। व्रत खोलते समय पहले भगवान शिव को भोग अर्पित करें, उसके बाद प्रसाद ग्रहण करके भोजन करें।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।