facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  vrat›  sharad purnima ki raat dharti par brahman kyon karte hain maa lakshmi janiye pauranik katha aur mahatva

Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की रात धरती पर भ्रमण क्यों करती हैं मां लक्ष्मी? जानें पौराणिक कथा और महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा से जुड़ी एक प्रचलित धार्मिक मान्यता में मां लक्ष्मी के भ्रमण का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि इस रात देवी पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों की भक्ति और श्रद्धा देखती हैं।

Sharad Purnima
Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। यही वजह है कि शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी की पूजा करने, घर को साफ-सुथरा रखने और रात में दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घर जाकर यह देखती हैं कि कौन जाग रहा है और कौन उनकी आराधना कर रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी धरती पर भ्रमण क्यों करती हैं? इसके पीछे कौन-सी पौराणिक मान्यता प्रचलित है और इस रात उनकी पूजा करने से क्या फल मिलता है? आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा से जुड़ी कथा और इसका धार्मिक महत्व...

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी का भ्रमण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं। इस मान्यता का संबंध मां लक्ष्मी के धन, वैभव और समृद्धि प्रदान करने वाले स्वरूप से है। कहा जाता है कि इस रात देवी अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए निकलती हैं और देखती हैं कि कौन व्यक्ति जागकर उनकी उपासना कर रहा है। इसी वजह से शरद पूर्णिमा की रात को जागरण करने की परंपरा भी प्रचलित है। कई जगहों पर इस रात मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं और पूजा स्थल को सजाया जाता है।

क्या है मां लक्ष्मी से जुड़ी पौराणिक मान्यता

शरद पूर्णिमा से जुड़ी एक प्रचलित धार्मिक मान्यता में मां लक्ष्मी के भ्रमण का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि इस रात देवी पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों की भक्ति और श्रद्धा देखती हैं। संस्कृत के 'को जागर्ति' शब्द का अर्थ है 'कौन जाग रहा है'। इसी मान्यता के कारण शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस रात श्रद्धापूर्वक जागकर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, देवी उन पर प्रसन्न होती हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। हालांकि, इस प्रसंग से जुड़ी कथाओं के अलग-अलग क्षेत्रीय रूप मिलते हैं।

कोजागरी पूर्णिमा क्यों कहते हैं

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा कहने के पीछे भी मां लक्ष्मी के रात्रि भ्रमण की मान्यता जुड़ी है। धार्मिक परंपरा में माना जाता है कि पूर्णिमा की रात देवी पूछती हैं कि कौन जाग रहा है और उनकी आराधना कर रहा है। इसी भाव से इस पर्व का नाम कोजागरी पड़ा। पश्चिम बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में इसे विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कुछ स्थानों पर रात में जागकर भजन-कीर्तन और मंत्र जाप भी किया जाता है।

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा का महत्व

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की कामना से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से देवी की आराधना करने से घर में सकारात्मकता आती है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को कमल का फूल, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद धूप-दीप जलाकर देवी की आरती की जाती है। भक्त मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं कि उनके घर में अन्न, धन और सुख की कमी न हो। इस दिन घर की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि धार्मिक परंपरा में स्वच्छता को देवी के स्वागत से जोड़ा गया है।

शरद पूर्णिमा की रात क्या करें

इस रात मां लक्ष्मी की पूजा करने के लिए घर और पूजा स्थल को साफ रखें। शाम के समय दीपक जलाकर देवी की आराधना करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें। घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना और पूजा स्थल को स्वच्छ रखना कई परिवारों की परंपरा है। कुछ लोग रात में खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। हालांकि, खीर रखने और ग्रहण करने की परंपरा अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है। शरद पूर्णिमा पर जागरण करने वाले भक्त रात को भजन-कीर्तन करते हैं और मां लक्ष्मी से परिवार की उन्नति और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए क्या है मान्यता

धार्मिक विश्वास के अनुसार, मां लक्ष्मी ऐसे घर में प्रसन्न होती हैं जहां स्वच्छता, सदाचार और श्रद्धा का भाव हो। शरद पूर्णिमा पर पूजा-पाठ के साथ जरूरतमंदों को भोजन या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देना भी शुभ माना जाता है। इस दिन किसी का अपमान न करना, घर में शांति बनाए रखना और अच्छे कर्मों का संकल्प लेना भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। मां लक्ष्मी की पूजा का उद्देश्य केवल धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन में सुख, संतुलन और परिवार की खुशहाली की कामना करना भी है।


यह भी पढ़ें:- 

Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने का क्या है रहस्य? जानें धार्मिक मान्यता 

Sharad Purnima Daan Importance : शरद पूर्णिमा पर करें इन चीजों का दान, मिलेगा पुण्य 

Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है? जानें धार्मिक महत्व 
 
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel