facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  vrat›  sharad purnima ki raat chandrama se nikalne wali kirano ko kyon mana jata hai amrit saman janiye mahatva

Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से निकलने वाली किरणों को क्यों माना जाता है अमृत समान? जानें महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Sharad Purnima: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूर्ण आभा के साथ दिखाई देता है। कहा जाता है कि इस रात चंद्रमा से निकलने वाली किरणें अमृत के समान होती हैं और इनमें विशेष शीतलता होती है।

Sharad Purnima
Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की रात को हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृत के समान गुण होते हैं। यही वजह है कि शरद पूर्णिमा पर चांद की रोशनी में खीर रखने और रात में चंद्रमा की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणें मन को शीतलता देने के साथ सुख-समृद्धि और आरोग्य का प्रतीक मानी जाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों को अमृत समान क्यों कहा जाता है? इसके पीछे कौन-सी धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हैं? आइए जानते हैं।

शरद पूर्णिमा की किरणें अमृत समान क्यों?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूर्ण आभा के साथ दिखाई देता है। कहा जाता है कि इस रात चंद्रमा से निकलने वाली किरणें अमृत के समान होती हैं और इनमें विशेष शीतलता होती है। अमृत को हिंदू धर्म में जीवन, आरोग्य और अमरता का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से शरद पूर्णिमा की चांदनी को सकारात्मकता, सुख और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, चंद्रमा की किरणों में अमृत होने की बात धार्मिक आस्था और परंपरा पर आधारित है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

16 कलाओं से पूर्ण होता है चंद्रमा

हिंदू धर्म में चंद्रमा को मन, शीतलता और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसी कारण इस रात का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि पूर्ण चंद्रमा की रोशनी जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मकता का संदेश देती है। इस दिन श्रद्धालु चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

खीर को चांदनी में रखने की परंपरा

शरद पूर्णिमा पर रात में खीर बनाकर उसे खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखने की विशेष परंपरा है। इसके पीछे मान्यता है कि चंद्रमा की अमृतमयी किरणों से खीर में विशेष गुण आ जाते हैं। कई घरों में खीर को रातभर चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है और अगले दिन परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। इस परंपरा में दूध और चावल से बनी खीर को पवित्रता, शीतलता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, चांदनी में रखने से खीर के औषधीय गुण बढ़ने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खीर को खुले में रखते समय धूल, कीड़े और अन्य दूषित चीजों से बचाना जरूरी है।

मां लक्ष्मी से जुड़ी है मान्यता

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। इसी वजह से कई लोग रात में जागकर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और घर में दीपक जलाते हैं। चंद्रमा की उजली रोशनी को सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

भगवान कृष्ण के महारास से भी संबंध

शरद पूर्णिमा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पूर्णिमा की मनोरम चांदनी रात में भगवान कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। इस प्रसंग में चंद्रमा की शीतल रोशनी को प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि वैष्णव परंपरा में शरद पूर्णिमा का विशेष स्थान है। भक्त इस दिन भगवान कृष्ण और राधा रानी की पूजा करते हैं तथा भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

शरद पूर्णिमा की रात क्या करना चाहिए?

इस दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा करने की परंपरा है। रात में चंद्रमा के दर्शन करके उन्हें जल अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के अनुसार खीर का भोग लगाते हैं और प्रसाद बांटते हैं। कई लोग इस रात ध्यान, जप और भजन-कीर्तन भी करते हैं। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।


यह भी पढ़ें:- 

Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने का क्या है रहस्य? जानें धार्मिक मान्यता 

Sharad Purnima Daan Importance : शरद पूर्णिमा पर करें इन चीजों का दान, मिलेगा पुण्य 

Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है? जानें धार्मिक महत्व 
 
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel