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Hariyali Teej: हरियाली तीज के व्रत का कैसे करें पारण? जानें संपूर्ण विधि, नियम और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Hariyali Teej: व्रत का पारण करने से पहले सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने की परंपरा है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण कर पूजा करनी चाहिए।

Hariyali Teej
Hariyali Teej: हरियाली तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं और पति की लंबी आयु तथा सुखी दांपत्य जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। हरियाली तीज के व्रत में जितना महत्व पूजा और व्रत रखने का है, उतना ही महत्व व्रत के सही तरीके से पारण करने का भी माना जाता है। कई महिलाएं व्रत तो रख लेती हैं, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि अगले दिन व्रत कैसे खोला जाए, सबसे पहले क्या ग्रहण करना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। क्या आपको पता है हरियाली तीज के व्रत का पारण किस विधि से करना चाहिए? आइए जानते हैं व्रत खोलने की संपूर्ण विधि, नियम और धार्मिक मान्यता।

कब किया जाता है व्रत का पारण

हरियाली तीज का व्रत आमतौर पर तृतीया तिथि के दौरान रखा जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं अगले दिन चतुर्थी तिथि में पूजा-अर्चना और आवश्यक धार्मिक परंपराएं पूरी करने के बाद व्रत का पारण करती हैं। कई स्थानों पर परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार व्रत खोलने का समय अलग हो सकता है, इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यता का भी ध्यान रखना चाहिए।

पारण से पहले करें पूजा

व्रत का पारण करने से पहले सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने की परंपरा है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण कर पूजा करनी चाहिए। पूजा में भगवान शिव को जल, बेलपत्र, अक्षत, फूल और फल अर्पित किए जाते हैं। वहीं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री, फूल, अक्षत और फल अर्पित करने की मान्यता है। पूजा के दौरान माता पार्वती और भगवान शिव से सुखी दांपत्य जीवन तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

इस तरह खोलें व्रत

पूजा पूरी होने के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा मानी जाती है। सबसे पहले भगवान शिव और माता पार्वती को प्रणाम करके उनका प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके बाद जल पीकर व्रत खोला जा सकता है। निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को अचानक बहुत अधिक भोजन करने से बचना चाहिए। पहले पानी या हल्का पेय लेकर धीरे-धीरे भोजन करना उचित माना जाता है। इसके बाद फल, दूध या हल्का भोजन लिया जा सकता है। धार्मिक परंपरा में व्रत के पारण के समय सात्विक भोजन ग्रहण करने को विशेष महत्व दिया जाता है।

पारण के दौरान क्या खाएं?

हरियाली तीज के व्रत का पारण करते समय हल्का और सात्विक भोजन करना अच्छा माना जाता है। सबसे पहले पानी या दूध लेकर फल ग्रहण किए जा सकते हैं। इसके बाद सामान्य सात्विक भोजन किया जा सकता है। पारण के भोजन में ताजे फल, दूध, दही, खिचड़ी या हल्का घर का बना भोजन लिया जा सकता है। व्रत के बाद बहुत ज्यादा तला-भुना या मसालेदार भोजन करने की परंपरा नहीं है।

किन बातों का रखें ध्यान

हरियाली तीज का व्रत धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए पारण के समय भी पूजा की पवित्रता और नियमों का ध्यान रखा जाता है। व्रत खोलने से पहले भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करना चाहिए। पारण के दौरान जल्दबाजी में भोजन करने के बजाय धीरे-धीरे भोजन करने की परंपरा है। खासकर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को पहले जल ग्रहण करके उसके बाद हल्का भोजन करना चाहिए।

सुहाग की सामग्री का महत्व

हरियाली तीज की पूजा में सुहाग की सामग्री का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं माता पार्वती को सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, चुनरी और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित करती हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। इसी वजह से हरियाली तीज का व्रत माता पार्वती और भगवान शिव के दांपत्य जीवन से जुड़ा माना जाता है।

व्रत खोलने के बाद क्या करें?

पारण के बाद महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव को प्रणाम कर पूजा संपन्न करती हैं। कई जगहों पर इस दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग सामग्री, फल या भोजन का दान करने की भी परंपरा है। हरियाली तीज पर जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता

पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती की इसी तपस्या और भगवान शिव से उनके विवाह की कथा को हरियाली तीज से जोड़ा जाता है। इसी कारण सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद विधि-विधान से व्रत का पारण करने की परंपरा है। अलग-अलग क्षेत्रों में व्रत और पारण की विधि में कुछ स्थानीय अंतर देखने को मिल सकते हैं, इसलिए अपने परिवार की प्रचलित धार्मिक परंपरा का पालन करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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