Bhaum Pradosh Vrat: भौम प्रदोष के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करें। भगवान शिव और माता पार्वती के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें।
Bhaum Pradosh Vrat: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान आने वाले प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व भी बढ़ जाता है। जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। सावन में पड़ने वाला भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ माता पार्वती और हनुमान जी की उपासना के लिए भी विशेष माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करते हैं। मान्यता है कि भौम प्रदोष पर श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। क्या आपको पता है कि भौम प्रदोष की पूजा में किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए? पूजा की सही विधि क्या है? आइए जानते हैं।
कब करें भौम प्रदोष की पूजा
प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है। सूर्यास्त के बाद जब त्रयोदशी तिथि रहती है, उस समय भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस दौरान शिवलिंग का अभिषेक करके भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। भौम प्रदोष मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इस व्रत में भगवान शिव के साथ मंगल ग्रह और हनुमान जी की उपासना का भी विशेष महत्व बताया गया है। व्रती को दिनभर भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए और शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करनी चाहिए।
ऐसे करें पूजा की शुरुआत
भौम प्रदोष के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करें। भगवान शिव और माता पार्वती के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूरे दिन सात्विक नियमों का पालन करें। जो लोग निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं, वे अपनी क्षमता के अनुसार व्रत कर सकते हैं।
शिवलिंग का करें अभिषेक
प्रदोष काल में पूजा के लिए सबसे पहले शिवलिंग का जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक करते समय भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। अभिषेक के बाद शिवलिंग को साफ जल से स्नान कराएं और भगवान शिव को बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, सफेद फूल और फल अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह साफ और साबुत हो।
शिव जी को चढ़ाएं ये चीजें
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व है। इसके अलावा भांग, धतूरा, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। शिवलिंग पर चंदन या भस्म भी अर्पित कर सकते हैं। पूजा के दौरान भगवान शिव को भोग लगाएं और धूप-दीप जलाएं। इसके बाद भगवान शिव की आरती करें। श्रद्धा के अनुसार शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ भी किया जा सकता है।
करें मंत्रों का जाप
भौम प्रदोष व्रत में भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप श्रद्धा के साथ करें। इसके साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव के मंत्रों का जाप मन को एकाग्र करके पूजा करने में सहायक माना जाता है।
हनुमान जी की पूजा भी करें
भौम प्रदोष मंगलवार को पड़ने के कारण इस दिन हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। भगवान शिव की पूजा के बाद हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और उन्हें सिंदूर तथा चमेली का तेल अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करके भगवान हनुमान से बल और साहस की प्रार्थना की जा सकती है। मंगलवार होने के कारण इस दिन हनुमान जी का स्मरण विशेष रूप से किया जाता है।
शिव परिवार की करें आरती
पूजा के अंत में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय का ध्यान करें। इसके बाद शिव परिवार की आरती करें। भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति और जीवन के कष्ट दूर करने की प्रार्थना करें। आरती के बाद भगवान को भोग लगाएं और प्रसाद परिवार के सदस्यों में वितरित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
भौम प्रदोष व्रत रखने वाले भक्तों को पूरे दिन सात्विक आहार और विचारों का पालन करना चाहिए। व्रत के दौरान भगवान शिव का स्मरण करें और शाम को प्रदोष काल में पूजा अवश्य करें। पूजा में साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही व्रत करें और पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)