Sawan Forth Somvar: सावन के आखिरी सोमवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करके भगवान शिव का ध्यान करें।
Sawan Forth Somvar: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पूरे महीने में आने वाले सोमवार को श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं। सावन का आखिरी सोमवार भी शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन व्रत रखने के बाद पारण की विधि और समय का भी ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। आखिर सावन के आखिरी सोमवार के व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए? पारण के दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए? आइए जानते हैं।
सावन के आखिरी सोमवार का महत्व
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सावन सोमवार के व्रत में भक्त दिनभर भगवान शिव का ध्यान करते हैं और शाम के समय पूजा-अर्चना करते हैं। सावन के आखिरी सोमवार का व्रत भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। जो श्रद्धालु पूरे सावन सोमवार का व्रत रखते हैं, उनके लिए अंतिम सोमवार की पूजा और व्रत का पारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
कब करें व्रत का पारण
सावन सोमवार के व्रत में पारण सामान्य तौर पर सोमवार की पूजा पूरी करने के बाद किया जाता है। कई श्रद्धालु दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं और पूजा संपन्न होने के बाद फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। वहीं, जो लोग सोमवार व्रत में दिनभर निराहार रहते हैं, वे अपनी पूजा-पद्धति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा के बाद व्रत खोल सकते हैं। पारण से पहले भगवान शिव को भोग लगाना और फिर प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है।
सुबह की पूजा से करें शुरुआत
सावन के आखिरी सोमवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करके भगवान शिव का ध्यान करें। संभव हो तो शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भगवान शिव को प्रिय मानी जाने वाली अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। शिवजी को चंदन और भस्म अर्पित करने के बाद धूप-दीप जलाकर आरती करें।
पूजा में इन मंत्रों का करें जाप
सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र या भगवान शिव के अन्य मंत्रों का भी जाप कर सकते हैं। पूजा के दौरान शिव चालीसा और शिव स्तुति का पाठ भी किया जाता है। इसके बाद भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
पारण से पहले क्या करें
व्रत खोलने से पहले भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करना चाहिए। यदि पूरे दिन पूजा नहीं कर पाए हैं तो शाम के समय स्नान करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकते हैं। शिवलिंग पर जल अर्पित करें और बेलपत्र चढ़ाएं। इसके बाद भगवान शिव को फल, मिठाई या घर में बनाए गए सात्विक पकवान का भोग लगाएं। पूजा और आरती पूरी करने के बाद भगवान का प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण किया जा सकता है।
पारण में सात्विक भोजन करें
व्रत के पारण के समय भोजन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की धार्मिक परंपरा है। पारण के बाद हल्का और सात्विक भोजन करना अच्छा माना जाता है। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन और अन्य सात्विक आहार का सेवन किया जा सकता है। जो लोग पूरे दिन फलाहार पर रहते हैं, वे भी अपनी परंपरा के अनुसार फल या सात्विक भोजन से व्रत खोल सकते हैं। पारण के तुरंत बाद बहुत अधिक या भारी भोजन करने से बचना चाहिए।
ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान
सावन सोमवार के व्रत में पूजा-पाठ के साथ दान का भी महत्व बताया गया है। व्रत के पारण के अवसर पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, फल, वस्त्र या दक्षिणा का दान किया जा सकता है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। सावन के आखिरी सोमवार पर शिव मंदिर में जाकर पूजा करने के बाद दान-पुण्य करने की भी परंपरा है। हालांकि, दान हमेशा अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार ही करना चाहिए।
किन बातों का रखें ध्यान
व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म से संयम रखने की परंपरा है। पूजा के समय भगवान शिव का ध्यान करें और सात्विक आचरण का पालन करें। व्रत खोलने से पहले भगवान को भोग लगाना और प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है। पारण के समय अपने परिवार में चली आ रही पूजा-पद्धति और धार्मिक परंपरा का भी ध्यान रखना चाहिए। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में सोमवार व्रत रखने और खोलने की विधि में कुछ अंतर हो सकता है। सावन के आखिरी सोमवार का व्रत भगवान शिव की भक्ति और आराधना से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस दिन सुबह से लेकर व्रत के पारण तक शिवजी की पूजा, मंत्र जाप और सात्विक आचरण का विशेष ध्यान रखा जाता है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)