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Kajari Teej: कजरी तीज की पूजा में क्यों चढ़ाई जाती हैं सुहाग की चीजें? जानें हर सामग्री का महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Kajari Teej: कजरी तीज की पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू धर्म में सिंदूर सुहाग का प्रमुख प्रतीक है। सुहागिन महिलाएं इसे अपनी मांग में लगाती हैं और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करती हैं।

Kajari Teej
Kajari Teej: कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं। कजरी तीज की पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के साथ सुहाग की सामग्री चढ़ाने की भी परंपरा है। पूजा की थाली में सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, कुमकुम और चुनरी जैसी कई चीजें रखी जाती हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर कजरी तीज की पूजा में इन सुहाग की चीजों को क्यों चढ़ाया जाता है और हर सामग्री का क्या महत्व है? आइए जानते हैं।

कजरी तीज में सुहाग सामग्री का महत्व

कजरी तीज पर सुहाग की सामग्री माता पार्वती को अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से महिलाएं कजरी तीज पर माता पार्वती की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। पूजा में सुहाग की सामग्री अर्पित करना माता पार्वती के प्रति श्रद्धा और अपने सुहाग की मंगलकामना से जुड़ा माना जाता है। इसके बाद कई महिलाएं इन चीजों को प्रसाद या माता का आशीर्वाद मानकर अपने पास रखती हैं।

 

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सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है

कजरी तीज की पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू धर्म में सिंदूर सुहाग का प्रमुख प्रतीक है। सुहागिन महिलाएं इसे अपनी मांग में लगाती हैं और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करती हैं। पूजा के दौरान माता पार्वती को सिंदूर अर्पित करने के पीछे मान्यता है कि इससे देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और सुहाग की रक्षा की कामना की जाती है। महिलाएं पूजा के बाद माता को अर्पित सिंदूर को अपने लिए शुभ मानती हैं।

चूड़ियों का क्या महत्व है

सुहाग की सामग्री में चूड़ियों का भी खास स्थान है। चूड़ियां विवाहित महिलाओं के श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं। कजरी तीज पर माता पार्वती को चूड़ियां अर्पित कर महिलाएं अपने दांपत्य जीवन में प्रेम और सौभाग्य की कामना करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं इस दिन नई चूड़ियां पहनती हैं। हरी चूड़ियों को विशेष रूप से शुभ माना जाता है और सावन के मौसम में इनके पहनने की परंपरा भी काफी पुरानी है।

बिंदी का धार्मिक महत्व

बिंदी भी सुहाग की सामग्री में शामिल की जाती है। महिलाएं पूजा में माता पार्वती को बिंदी अर्पित करती हैं और फिर इसे अपने श्रृंगार में शामिल करती हैं। धार्मिक परंपराओं में बिंदी को सौभाग्य और स्त्री के श्रृंगार का प्रतीक माना गया है। कजरी तीज पर माता को बिंदी अर्पित करने का उद्देश्य देवी का आशीर्वाद प्राप्त करना और दांपत्य जीवन की मंगलकामना करना माना जाता है।

मेहंदी क्यों लगाई जाती है

कजरी तीज पर मेहंदी लगाने की भी खास परंपरा है। सावन और तीज के त्योहारों में महिलाएं हाथों पर मेहंदी रचाती हैं। इसे सुहाग और श्रृंगार से जोड़कर देखा जाता है। पूजा में माता पार्वती को मेहंदी अर्पित करने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। महिलाएं मानती हैं कि माता को मेहंदी अर्पित करने और स्वयं लगाने से सौभाग्य की कामना पूरी होती है।

 

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कुमकुम का महत्व

कुमकुम को भी पूजा की सुहाग सामग्री में रखा जाता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में कुमकुम का इस्तेमाल देवी-देवताओं की पूजा और तिलक के लिए किया जाता है। कजरी तीज पर माता पार्वती को कुमकुम अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ महिलाएं अपने पति के सुख, स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में मंगल की कामना करती हैं।

चुनरी क्यों चढ़ाते हैं

माता पार्वती को लाल या लाल रंग वाली चुनरी अर्पित करने की परंपरा भी कजरी तीज की पूजा में महत्वपूर्ण मानी जाती है। लाल रंग को सौभाग्य, शक्ति और मंगल का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं पूजा के दौरान माता पार्वती को चुनरी चढ़ाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करती हैं। कई जगह पूजा के बाद चुनरी को देवी का प्रसाद मानकर घर में सुरक्षित रखा जाता है।

काजल और अन्य सामग्री

सुहाग की सामग्री में काजल, महावर, बिछिया, पायल और अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी स्थान के अनुसार शामिल की जाती हैं। इन सभी चीजों को माता पार्वती के श्रृंगार से जोड़कर देखा जाता है। काजल को सुहाग के श्रृंगार का हिस्सा माना जाता है, जबकि महावर और बिछिया जैसी वस्तुएं विवाहित स्त्री के पारंपरिक श्रृंगार से जुड़ी हैं। महिलाएं अपनी श्रद्धा और स्थानीय परंपरा के अनुसार इन वस्तुओं को पूजा में अर्पित करती हैं।

पूजा के बाद क्या करें

कजरी तीज की पूजा पूरी करने के बाद महिलाएं माता पार्वती को अर्पित सुहाग सामग्री को श्रद्धा से ग्रहण करती हैं। सिंदूर, बिंदी या अन्य उपयोगी श्रृंगार सामग्री को महिलाएं अपने श्रृंगार में शामिल कर सकती हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में कजरी तीज की पूजा और सुहाग सामग्री से जुड़े नियमों में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अपने परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित माना जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

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