Sawan 2026: भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस पूरे माह में शिवभक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और शिव पुराण का पाठ करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन में शिव पुराण का श्रवण और पाठ करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और साधक को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शिव पुराण का ऐसा कौन-सा अध्याय है, जिसका पाठ सावन में विशेष फलदायी माना गया है? क्या इसके पीछे कोई धार्मिक कारण भी बताया गया है? आइए जानते हैं शिव पुराण और धार्मिक मान्यताओं में इसका क्या महत्व बताया गया है।
शिव पुराण का कौन-सा अध्याय पढ़ना होता है शुभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन के महीने में शिव पुराण के विद्येश्वर संहिता का प्रथम अध्याय और उससे जुड़े प्रारंभिक अध्यायों का पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसी संहिता में भगवान शिव की महिमा, शिवलिंग की उपासना, शिवभक्ति का महत्व और शिव आराधना के नियमों का विस्तार से वर्णन मिलता है। मान्यता है कि विद्येश्वर संहिता का नियमित पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और साधक के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि सावन के दौरान अनेक शिव मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर इसी संहिता का सामूहिक पाठ भी कराया जाता है।
विद्येश्वर संहिता का धार्मिक महत्व
शिव पुराण की शुरुआत विद्येश्वर संहिता से होती है। इसमें भगवान शिव के स्वरूप, उनकी महिमा, शिवलिंग की उत्पत्ति, पूजा की विधि, व्रत, दान, जप और धर्म से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस संहिता का अध्ययन करने से शिव तत्व को समझने का अवसर मिलता है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव की आराधना करने वाला भक्त उनके विशेष आशीर्वाद का पात्र बनता है।
शिवलिंग की महिमा का मिलता है वर्णन
विद्येश्वर संहिता में शिवलिंग की महिमा का विशेष उल्लेख मिलता है। इसमें बताया गया है कि शिवलिंग केवल पूजा का प्रतीक नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के आदि और अनंत स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है। धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त सावन में शिवलिंग का पूजन करते हुए विद्येश्वर संहिता का पाठ करता है। उसकी पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए अनेक श्रद्धालु जलाभिषेक के बाद इसी संहिता का पाठ करते हैं।
सावन में कब करें इस अध्याय का पाठ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के पश्चात शिव पुराण का पाठ करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो भगवान शिव के समक्ष दीपक जलाकर, बेलपत्र अर्पित करके और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करने के बाद विद्येश्वर संहिता का पाठ आरंभ करना चाहिए। सावन के प्रत्येक सोमवार, प्रदोष व्रत और मास शिवरात्रि के दिन इस अध्याय का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। हालांकि श्रद्धालु पूरे सावन में प्रतिदिन भी इसका पाठ कर सकते हैं।
यदि पूरा अध्याय पढ़ना संभव न हो तो क्या करें?
हर व्यक्ति के पास पर्याप्त समय हो, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में धार्मिक मान्यता कहती है कि कोई यदि श्राद्धालु पूरे अध्याय का पाठ नहीं कर सकता तो वह प्रतिदिन कुछ अंश का पाठ भी कर सकता है। कई लोग प्रतिदिन एक एक अध्याय पढ़कर पूरे सावन में संपूर्ण विद्येश्वर संहिता का पाठ पूरा करते हैं। इसके अलावा श्रद्धापूर्वक शिव पूराण का श्रवण करना भी पुण्यदायी माना जाता है। मंदिरों में होने वाले सामुहिक पाठ या घर पर श्रद्धा से किया गया श्रवण भी धार्मिक रूप से शुभ माना गया है।
शिव पुराण के पाठ के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पुराण का पाठ करने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखना शुभ माना जाता है। भगवान शिव को जल, बेलपत्र, धतूरा, आक और पुष्प अर्पित करने के बाद पाठ आरंभ किया जाता है। पाठ के दौरान मन को शांत रखने, अनावश्यक बातचीत से बचने और पूरी श्रद्धा के साथ प्रत्येक श्लोक या उसके अर्थ को समझने का प्रयास करने की भी परंपरा बताई गई है। यदि संस्कृत पढ़ना कठिन लगे तो हिंदी भावार्थ का अध्ययन भी किया जा सकता है।
यह भी पढ़ें-
(
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)