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Ramghat Chitrakoot Hanuman Temple: रामघाट चित्रकूट हनुमान मंदिर इतिहास, मंदाकिनी नदी, आरती समय व धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Ramghat Chitrakoot Hanuman Temple: रामघाट चित्रकूट उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित मंदाकिनी नदी के तट पर बसा है। यह चित्रकूट धाम का सबसे प्रमुख घाट है, जहां सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रहती है।

Ramghat Chitrakoot Hanuman Temple:
Ramghat Chitrakoot Hanuman Temple: चित्रकूट की पावन भूमि पर स्थित रामघाट न केवल मंदाकिनी नदी के किनारे का एक घाट है, बल्कि रामायण काल की जीवंत साक्षी, तुलसीदास की भक्ति की अमर गाथा और हनुमान जी के अनोखे तोता मुखी स्वरूप का केंद्र है। यहां भगवान राम, सीता और लक्ष्मण ने वनवास के दौरान स्नान किया, गोस्वामी तुलसीदास को राम-दर्शन हुए और हनुमान जी तोते के रूप में प्रकट होकर भक्त को प्रभु का परिचय कराया। यह स्थान आध्यात्मिक शांति, पाप-मोचन और मनोकामना पूर्ति का प्रतीक है। ऐसे में आइए जानते हैं रामघाट चित्रकूट हनुमान मंदिर का इतिहास और महत्व..

रामघाट चित्रकूट के बारे में (Ramghat Chitrakoot Overviews)

रामघाट चित्रकूट उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित मंदाकिनी नदी के तट पर बसा है। यह चित्रकूट धाम का सबसे प्रमुख घाट है, जहां सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रहती है। घाट पर सीढ़ियां नदी तक जाती हैं, जहां श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं। रंग-बिरंगे नावों की कतारें, संतों का सत्संग, अगरबत्ती की महक और मंत्रोच्चार का माहौल यहां हर किसी को रामायण काल में ले जाता है। 

रामघाट पर तुलसीदास मंदिर (तुलसी बिरला मानस मंदिर) है, जहां तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना की। घाट के एक कोने में विशाल हनुमान जी की मूर्ति है, लेकिन असली आकर्षण तोता मुखी हनुमान मंदिर है। शाम को मंदाकिनी आरती का दृश्य वनारसी गंगा आरती जैसा भव्य है- दियों की रोशनी, घंटों की ध्वनि और भजन गूंजते हैं। नावों से आरती देखना और रामायण लेजर शो अनुभव को यादगार बनाते हैं। यह घाट सिर्फ दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और भक्ति का केंद्र है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु पाप-मुक्ति और शांति के लिए आते हैं।

 

Ramghat Chitrakoot Hanuman Temple:

चित्रकूट क्यों है इतना पवित्र?

चित्रकूट को “राम की तपोस्थली” कहा जाता है क्योंकि भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने यहां 14 वर्ष के वनवास में से लगभग 11.5 वर्ष बिताए। वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास के रामचरितमानस में इसका वर्णन है। यहां ब्रह्मा, विष्णु और महेश के कई अवतार हुए, ऋषि-मुनि जैसे अत्रि, अनुसूया, दत्तात्रेय ने तपस्या की। कामदगिरी पर्वत इच्छापूरक माना जाता है- इसकी 5 किमी परिक्रमा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 

मंदाकिनी नदी स्वयं पवित्र है, जो सती अनुसूया की तपस्या से पृथ्वी पर अवतरित हुई। सूखे के समय अनुसूया ने प्राणियों के कल्याण के लिए तप किया और नदी प्रकट हुई। चित्रकूट की पहाड़ियां, गुफाएं, झरने और वन राम-सीता की लीला से जुड़े हैं। यहां की मिट्टी, पत्थर और पानी में दिव्यता समाहित है। तुलसीदास ने लिखा: “चित्रकूट के घाट घाट पर भई संतन की भीर, तुलसीदास चंदन घिसे तिलक करे रघुवीर”। यहां भक्ति की धारा आज भी बहती है। चित्रकूट पवित्र इसलिए है, क्योंकि यह कर्म, भक्ति और मोक्ष का संगम है, जहां भगवान स्वयं वनवासी बने।

रामघाट चित्रकूट का इतिहास (Ramghat Chitrakoot History)

रामघाट का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। भगवान राम, सीता और लक्ष्मण यहां मंदाकिनी में स्नान करते थे। सूखे के दौरान सती अनुसूया की तपस्या से मंदाकिनी नदी आई, जिसने पूरे क्षेत्र को जीवन दिया। रामघाट उसी नदी के किनारे बसा है। 

मध्यकाल में गोस्वामी तुलसीदास (1532-1623 ई.) यहां आए। वे राम-दर्शन की तलाश में काशी और अयोध्या गए, लेकिन हनुमान जी ने बताया कि कलियुग में चित्रकूट में राम मिलेंगे। सम्वत 1607 में तुलसीदास रामघाट पर चंदन घिस रहे थे, तभी बालक रूप में श्रीराम-लक्ष्मण आए। तुलसीदास उन्हें पहचान न सके, तब हनुमान जी तोते के रूप में बोले- “चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़, तुलसीदास चंदन घिसे तिलक देत रघुबीर।” इस दोहे से तुलसीदास को राम-दर्शन हुए और उन्होंने रामचरितमानस की रचना पूरी की। 

रामघाट पर तुलसीदास गुफा भी है, जहां वे ध्यान करते थे। ब्रिटिश काल में भी यह तीर्थ स्थल बना रहा। आज यह यूपी-एमपी टूरिज्म का प्रमुख केंद्र है, जहां रामायण लेजर शो और आरती आकर्षण हैं। इतिहासकारों के अनुसार, यह घाट राम-वनवास की साक्षी है और भक्ति आंदोलन का प्रतीक भी है।

 

Ramghat Chitrakoot Hanuman Temple:

तोता मुखी हनुमान मंदिर (Tota Mukhi Hanuman Mandir)

रामघाट पर स्थित तोता मुखी हनुमान मंदिर चित्रकूट का अनोखा मंदिर है। यहां हनुमान जी तोते के मुख वाले स्वरूप में विराजमान हैं- यह दुर्लभ और अद्वितीय रूप है। मंदिर पुराना है और भक्तों की आस्था का केंद्र। मूर्ति में हनुमान जी का चेहरा तोते जैसा है, जो कलियुग में भक्ति की राह दिखाता है। 

मंदिर रामघाट के पास है, जहां भक्त चंदन, फूल और लड्डू चढ़ाते हैं। दर्शन से सभी काम सिद्ध होते हैं, मान्यता है। यह मंदिर तुलसीदास कथा से जुड़ा है- हनुमान जी ने तोते का रूप धारण कर तुलसीदास को राम का परिचय कराया। आज भी भक्त मानते हैं कि यहां हनुमान जी भक्तों की रक्षा करते हैं। मंदिर में शांति और ऊर्जा का वातावरण है। आसपास छोटे-छोटे हनुमान मंदिर भी हैं।

मंदाकिनी नदी का धार्मिक महत्व (The Religious Significance of the Mandakini River)

मंदाकिनी नदी चित्रकूट की जीवनधारा है। पौराणिक कथा अनुसार, सूखे के समय सती अनुसूया ने तपस्या कर नदी को पृथ्वी पर उतारा। यह गंगा का ही रूप मानी जाती है। राम, सीता और लक्ष्मण यहां स्नान करते थे, इसलिए स्नान से पाप नष्ट होते हैं। नदी का जल पवित्र है- स्नान, तर्पण और दीपदान से मोक्ष मिलता है। रामघाट पर नदी की धारा शांत और निर्मल है। तुलसीदास यहां चंदन घिसते थे। नदी भक्ति, शुद्धि और जीवन का प्रतीक है। पर्यावरणीय रूप से भी यह क्षेत्र संरक्षित है।

 

Ramghat Chitrakoot Hanuman Temple:

तुलसीदास को यहीं हुए थे भगवान राम के दर्शन

तुलसीदास को राम-दर्शन रामघाट पर ही हुए। वे राम-भक्ति में लीन थे, लेकिन दर्शन नहीं हो रहे थे। हनुमान जी ने मार्गदर्शन दिया। माघ की मौनी अमावस्या पर तुलसीदास चंदन घिस रहे थे, तब राम-लक्ष्मण आए। तुलसीदास उन्हें नहीं पहचाने। तोते रूप में हनुमान जी ने दोहा पढ़ा, जिससे तुलसीदास को ज्ञान हुआ। राम ने खुद तिलक लगाया। यह घटना रामचरितमानस की रचना का आधार बनी। आज भी भक्त इस कथा को दोहराते हैं।

तोता मुखी हनुमान जी मंदिर का रहस्य

हनुमान जी कलियुग में तोते के रूप में प्रकट हुए, ताकि तुलसीदास राम को पहचान सकें। यह रूप भक्ति की सूक्ष्मता दिखाता है- हनुमान जी भक्त की सहायता के लिए किसी भी रूप में आ सकते हैं। मंदिर में यह स्वरूप आज भी भक्तों को चमत्कारिक अनुभव कराता है। मान्यता है कि यहां दर्शन से बाधाएं दूर होती हैं। रहस्य भक्ति और विश्वास में छिपा है। 

हनुमान धारा चित्रकूट का महत्व

हनुमान धारा रामघाट से करीब 4-5 किमी दूर पहाड़ी पर है। यहां प्राकृतिक झरना हनुमान जी की मूर्ति पर बहता है। लंका दहन के बाद हनुमान जी गुस्से और जलन से व्याकुल थे। राम ने उन्हें यहां भेजा, जहां एक झरने ने उन्हें शांत किया। मंदिर में राम-हनुमान की प्रतिमाएं हैं। चढ़ाई पर हनुमान जी की छोटी मूर्तियां हैं। यहां शांति और शक्ति मिलती है।

 

Ramghat Chitrakoot Hanuman Temple:

रामघाट चित्रकूट की आरती का समय (Ramghat Chitrakoot Aarti Timings)

रामघाट की मंदाकिनी आरती शाम को होती है। अक्टूबर-मार्च में लगभग 6:30 बजे, अप्रैल-सितंबर में 7:00 बजे। आरती 1 घंटे तक चलती है। पंडित घंटे-शंख बजाते हैं, दीप जलाते हैं। नाव से देखना सर्वोत्तम है। सुबह भी छोटी आरती होती है। लेजर शो आरती के बाद रामायण दर्शाता है।

रामघाट चित्रकूट कैसे पहुंचे (How to Reach Ramghat Chitrakoot)

रेल मार्ग हवाई मार्ग सड़क मार्ग
निकटतम स्टेशन चित्रकूट धाम है, जो 8-11 किमी दूर है। दिल्ली, वाराणसी, प्रयागराज से ट्रेनें उपलब्ध हैं। प्रयागराज एयरपोर्ट 130 किमी दूर है। खजुराहो एयरपोर्ट 175 किमी दूर है इलाहाबाद, सतना, खजुराहो से बसें उपलब्ध हैं।
स्टेशन से मंदिर तक के लिए ऑटो या टैक्सी उपलब्ध हैं।   यहां से मंदिर तक के लिए टैक्सी या बस मिल जाती हैं।   करवी बस स्टैंड 8 किमी दूर है, जहां से रामघाट पैदल या ऑटो से पहुंचें।
 

रामघाट चित्रकूट घूमने का सबसे अच्छा समय (The Best Time to Visit Ramghat Chitrakoot)

अक्टूबर से मार्च उत्तम समय रहता है, जब मौसम सुहावना और भीड़ कम रहती है। नवंबर-फरवरी में आरती और परिक्रमा मजेदार रहती है। मानसून में नदी उफान पर होती है, जो खतरनाक होती है। गर्मी यानी अप्रैल-जून में जानें से बचें। साथ ही त्योहारों जैसे- (राम नवमी, दीवाली पर विशेष व्यवस्था के साथ जाना चाहिए।
 
Ramghat Chitrakoot Hanuman Temple:

रामघाट के पास प्रमुख दर्शनीय स्थल 

कामदगिरी: रामघाट से मात्र 2-3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामदगिरी पर्वत चित्रकूट का सबसे पवित्र और इच्छापूरक स्थल माना जाता है। यह पर्वत साक्षात भगवान राम का स्वरूप है, जिसे कामतानाथ के नाम से भी जाना जाता है। वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास के रामचरितमानस में इसका उल्लेख है कि भगवान राम ने वनवास के दौरान यहां 11.5 वर्ष बिताए। जब राम चित्रकूट छोड़कर जाने लगे तो पर्वत ने उनसे याचना की, तब प्रभु ने इसे वरदान दिया कि अब यह कामदगिरी बन जाएगा यानी हर भक्त की मनोकामना पूरी करेगा। पर्वत की 5 किलोमीटर लंबी परिक्रमा मार्ग पर चार मुख्य मंदिर (मुखारविंद) हैं, जहां भक्त नंगे पैर चलते हुए राम-सीता-लक्ष्मण की लीला का स्मरण करते हैं। मार्ग पर लक्ष्मण पर्वत भी है, जहां केबल कार से चढ़ा जा सकता है।

हनुमान धारा: रामघाट से लगभग 4-5 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित हनुमान धारा चित्रकूट की अद्भुत प्राकृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है। यहां प्राकृतिक झरना हनुमान जी की मूर्ति पर लगातार बहता है, जो लंका दहन के बाद हनुमान जी की जलन और गुस्से को शांत करने वाली धारा मानी जाती है। कथा के अनुसार, लंका जलाने के बाद हनुमान जी की पूंछ में आग लग गई थी और जलन से व्याकुल होकर वे राम जी के पास पहुंचे। तब भगवान राम ने अपने बाण से इस पवित्र धारा को प्रकट किया, जो आज भी हनुमान जी की मूर्ति पर गिरकर उन्हें शीतलता प्रदान करती है। मंदिर पहाड़ की ऊंचाई पर है, जहां चढ़ाई की सीढ़ियां या रोप-वे से पहुंचा जा सकता है। ऊपर सिता रसोई और छोटे मंदिर भी हैं। 

सती अनुसूया आश्रम: रामघाट से करीब 12-17 किलोमीटर दूर मंदाकिनी नदी के किनारे घने जंगलों के बीच सती अनुसूया आश्रम स्थित है, जो चित्रकूट की तपस्या भूमि का प्रतीक है। यहां महर्षि अत्रि और उनकी पत्नी सती अनुसूया ने तपस्या की थी। कथा अनुसार, जब चित्रकूट में 10 वर्षों तक सूखा पड़ा तो अनुसूया ने तपस्या कर मंदाकिनी नदी को पृथ्वी पर अवतरित किया, जिससे पूरे क्षेत्र को जीवन मिला। उनके तीन पुत्र- दत्तात्रेय, चंद्र और दुर्वासा- त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) के अवतार माने जाते हैं। आश्रम में सती अनुसूया मंदिर, अत्रि मुनि की कुटी और झूरी नदी का उद्गम स्थल है। 

गुप्त गोदावरी: रामघाट से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित गुप्त गोदावरी चित्रकूट की रहस्यमयी गुफाओं का अनुपम स्थल है, जहां भगवान राम और लक्ष्मण वनवास के दौरान कुछ समय रहे थे। दो गुफाएं हैं- पहली बड़ी और चौड़ी, जिसमें राम और लक्ष्मण के सिंहासन जैसी चट्टानें हैं, जबकि दूसरी लंबी और संकरी, जिसमें घुटनों तक पानी बहता है। कथा के अनुसार, गुप्त गोदावरी नदी यहां गुप्त रूप से निकलती और फिर अदृश्य हो जाती है। 

स्फटिक शिला: रामघाट से थोड़ी दूरी पर मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित स्फटिक शिला (क्रिस्टल शिला) एक विशाल चमकदार चट्टान है, जो सीता जी के श्रृंगार स्थल और राम-सीता के पदचिह्नों के लिए प्रसिद्ध है। यह लाल-सफेद रंग की चट्टान रामायण काल की साक्षी है। कथा अनुसार, यहां माता सीता नित्य स्नान और श्रृंगार करती थीं, जबकि भगवान राम का चरण स्पर्श इस शिला पर अंकित हो गया। जयंत (काक भुशुंडि) द्वारा सीता जी को चोट पहुंचाने की घटना भी इसी स्थान से जुड़ी मानी जाती है। 

भारत मिलाप मंदिर: कामदगिरी पर्वत के निकट स्थित भारत मिलाप मंदिर भाईचारे और त्याग का प्रतीक है, जहां भरत ने राम से मिलकर उन्हें अयोध्या लौटने का अनुरोध किया था। रामायण कथा के अनुसार, दशरथ की मृत्यु के बाद भरत राम को सिंहासन सौंपने आए, लेकिन राम ने वनवास पूरा करने की जिद की। तब भरत ने राम के चरण-पादुका मांगीं और उन्हें सिंहासन पर विराजमान कर अयोध्या लौट गए। इस भावुक मिलन के समय चित्रकूट की चट्टानें भी पिघल गईं, जिससे राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के पदचिह्न शिला पर अंकित हो गए। मंदिर में ये पदचिह्न आज भी दर्शनार्थी देख सकते हैं। 

जनकी कुंड: रामघाट से मात्र 2-2.5 किलोमीटर ऊपर मंदाकिनी नदी के किनारे जनकी कुंड स्थित है, जो माता सीता का स्नान स्थल माना जाता है। वनवास के दौरान सीता जी यहां नित्य स्नान करती थीं और कुंड का जल आज भी पवित्र माना जाता है। कुंड का वातावरण अत्यंत शांतिपूर्ण है, जहां नदी की निर्मल धारा और आसपास की हरियाली भक्तों को रामायण काल में ले जाती है। यहां स्नान या जल अभिषेक कर भक्त पाप-मुक्ति और माता सीता की कृपा प्राप्त करते हैं। 

 

Ramghat Chitrakoot Hanuman Temple:

हनुमान जी के शक्तिशाली मंत्र और पूजा

हनुमान जी की पूजा में हनुमान चालीसा सबसे शक्तिशाली है। 
प्रमुख मंत्र हैं- - 
 “ॐ हं हनुमते नमः”।  
“ॐ रामदूताय विद्महे, वायुपुत्राय धीमहि, तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्” (गायत्री मंत्र)।  
“बजरंग बाण” संकट मोचन।  

पूजा विधि: मंगलवार या शनिवार को लाल चंदन, फूल, लड्डू चढ़ाएं। राम-हनुमान साथ पूजें। चालीसा पाठ से रक्षा मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामघाट चित्रकूट क्यों प्रसिद्ध है?  
राम-वनवास, तुलसीदास राम-दर्शन और तोता मुखी हनुमान मंदिर के कारण।

तोतामुखी हनुमान मंदिर क्या है?  
हनुमान जी का तोते वाले मुख का अनोखा मंदिर रामघाट पर, जहां वे तुलसीदास को राम दिखाने आए।

क्या सच में तुलसीदास जी को यहां राम जी के दर्शन हुए थे?  
हां, रामचरितमानस और लोककथा अनुसार रामघाट पर तोते रूप में हनुमान जी की मदद से तुलसीदास को यहां राम जी के दर्शन हुए थे।

हनुमान धारा क्या है?
लंका दहन के बाद हनुमान जी को शांत करने वाला झरना है, जहां राम जी ने उन्हें भेजा था।

रामघाट में स्नान का क्या महत्व है?
मंदाकिनी स्नान पाप नाश, शुद्धि और मोक्ष प्रदान करता है, राम-सीता के स्नान स्थल होने से इसका धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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