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Sawan Shivratri: सावन शिवरात्रि पर रात में क्यों होती है विशेष पूजा, जानें चार पहर की पूजा का महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Shivratri Puja: सावन शिवरात्रि की चार पहर की पूजा हमें धैर्य, संयम और भक्ति का संदेश देती है। रातभर भगवान शिव का स्मरण करना इस बात का प्रतीक है कि कठिन समय में भी इंसान को अपनी आस्था और सकारात्मक सोच बनाए रखनी चाहिए। 
 

Sawan Shivratri
Shivratri Puja Rituals: हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस पूरे महीने में शिव भक्त भगवान भोलेनाथ की पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। सावन में पड़ने वाली शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान शिव की पूजा दिन के साथ-साथ रात में भी की जाती है। खासतौर पर रात के चार पहर में शिवलिंग का अभिषेक और पूजन करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस तरह पूरी रात भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को विशेष पुण्य प्राप्त होता है और भगवान शिव की कृपा बनी रहती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को रात्रि के समय की जाने वाली पूजा विशेष रूप से प्रिय मानी जाती है। शिवरात्रि का अर्थ ही है भगवान शिव की विशेष आराधना वाली रात। इस दिन भक्त जागरण करते हैं और रात के अलग-अलग समय पर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। माना जाता है कि रात में वातावरण शांत होता है और इस समय मन को एकाग्र करके भगवान शिव का ध्यान करना आसान होता है।

शिवरात्रि की रात भक्त भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। इसके साथ ही बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल चढ़ाने की परंपरा भी है। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं।

क्या है चार पहर की पूजा?

शिवरात्रि की रात को चार हिस्सों यानी चार पहर में बांटकर पूजा करने की परंपरा है। रात के हर पहर में शिवलिंग का अभिषेक और पूजन किया जाता है। चारों पहर की पूजा भगवान शिव के प्रति भक्त की श्रद्धा, समर्पण और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक मानी जाती है।
 
Masik Shivratri

पहले पहर की पूजा का महत्व

पहले पहर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा है। जल को शुद्धता और शांति का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान भक्त भगवान शिव को जल अर्पित करके अपने मन और विचारों की शुद्धि की प्रार्थना करते हैं। माना जाता है कि इस पूजा से नकारात्मक विचार दूर करने और मन को शांत रखने की भावना मजबूत होती है।

दूसरे पहर की पूजा का महत्व

दूसरे पहर में दूध से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। दूध को पवित्रता और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। भक्त इस दौरान भगवान शिव से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा के साथ किया गया यह पूजन भगवान शिव को प्रसन्न करता है।

तीसरे पहर की पूजा का महत्व

तीसरे पहर में दही, घी या शहद जैसी पूजन सामग्री से अभिषेक करने की परंपरा कई स्थानों पर देखने को मिलती है। इस पहर की पूजा में भक्त भगवान शिव का ध्यान करते हुए अपने जीवन से परेशानियों को दूर करने और सकारात्मकता बढ़ाने की कामना करते हैं। इस समय मंत्र जाप और शिव स्तुति का भी विशेष महत्व माना जाता है।
 
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चौथे पहर की पूजा का महत्व

चौथे और अंतिम पहर की पूजा को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान भक्त शिवलिंग का अभिषेक करके बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। इसके बाद भगवान शिव की आरती और मंत्र जाप किया जाता है। चारों पहर की पूजा पूरी होने के बाद भक्त भगवान शिव से अपने परिवार और सभी लोगों के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

भगवान शिव की भक्ति

सावन शिवरात्रि की चार पहर की पूजा हमें धैर्य, संयम और भक्ति का संदेश देती है। रातभर भगवान शिव का स्मरण करना इस बात का प्रतीक है कि कठिन समय में भी इंसान को अपनी आस्था और सकारात्मक सोच बनाए रखनी चाहिए। यही कारण है कि सावन शिवरात्रि पर रात की पूजा और चार पहर के अभिषेक को विशेष महत्व दिया जाता है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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